up board class 10 social science full solution chapter 45 विकसित एवं विकासशील देश तथा इनकी विशेषताएँ

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इकाई-1 (ख): विकसित देशों की ओर अग्रसर भारत

up board class 10 social science full solution chapter 45 विकसित एवं विकासशील देश तथा इनकी विशेषताएँ


पाठ-45 विकसित एवं विकासशील देश तथा इनकी विशेषताएँ

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न—1 विकसित देश किसे कहते हैं? किन्हीं दो विकसित देशों के नाम लिखिए।


उ०- सामान्य रूप से वह देश जिसने अपने विकास का संपूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, एक विकसित देश कहलाता है। विकसित देश को लक्षित करने का राष्ट्रीय मापक न होकर अंतर्राष्ट्रीय मापक है। “विकसित देश वह है, जिसने अपने प्राकृतिक संसाधनों का उचित दोहन करके तथा अपनी श्रमिक शक्ति का भरपूर उपयोग करके आर्थिक समृद्धि का लक्ष्य पूर्ण कर लिया है।’ विश्व बैंक ने विकसित देश का इन शब्दों में परिभाषित किया है, “जिन देशों की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 10,000 डॉलर या इससे अधिक हैं उन्हें विकसित देश कहा जाता है।
दो विकसित देश- संयुक्त राज्य अमेरिका व जापान हैं।

प्रश्न–2. विकासशील देश किसे कहते हैं? किन्हीं दो विकासशील देशों के नाम लिखिए।


उ०- निर्धनता का दुष्चक्र तोड़कर तथा आर्थिक विकास की बाधाओं को दूर करके आर्थिक विकास के लक्ष्य का पीछा करने वाला देश, विकासशील देश कहलाता है। दूसरे शब्दों में, “जो देश धीरे-धीरे आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति वरके आगे बढ़ रहा है अर्थात् विकास के लिए प्रयत्नशील है, वह देश विकासशील देश कहलाता है।

विश्व बैंक ने विकसित देश को इन शब्दों में परिभाषित किया है, “वह राष्ट्र जिसकी प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 4,000 डॉलर या इससे कम है, विकासशील राष्ट्र कहलाता है।” विकासशील देशों की श्रेणी में दो देश भारत व चीन हैं।

प्रश्न–3. विकासशील देशों की चार प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उ०- विकासशील देशों की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(i) प्रति व्यक्ति निम्न आय- विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति आय बहुत कम होती है, जिसके कारण गरीब लोगों की
संख्या अधिक पाई जाती है। भारत की एक-तिहाई से अधिक जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करती है।
(ii) जन-सुविधाओं का अभाव- विकासशील देशों में जन-सुविधाओं; जैसे- भोजन, वस्त्र, मकान, परिवहन, उपकरण आदि का अभाव रहता है। अतः लोगों की कार्यक्षमता कम होती है।


(iii) कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था- कृषि में अधिक जनसंख्या का लगा होना इन देशों की एक प्रमुख विशेषता है। अतः इन
देशों में आय के अन्य स्रोत; जैसे- कुटीर उद्योग, व्यापार, तथा कृषि-आधारित उद्योगों के विकास की दर भी नीची होती है।


(iv) औद्योगीकरण का निम्न स्तर- विकासशील देशों में औद्योगीकरण हीन अवस्था में होता है। अधिकांश देश, विदेशी उपनिवेश रहने के कारण आधुनिक औद्योगिक विकास नहीं कर पाते। भारत इसका उदाहरण है। यहाँ शासन द्वारा संचालित औद्योगिक संस्थानों की दशा शोचनीय है। जबकि पाँच दशकों से उद्योगों के प्रति उदार नीति के द्वारा औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया जाता रहा है।


प्रश्न–4. विकासशील देशों की तीन प्रमुख समस्याएँ लिखिए।


उ०- विकासशील देशों की तीन प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं
(i) अत्यधिक जनसंख्या (ii) जन सुविधाओं का अभाव (iii) कृषि प्रधान व्यवस्था


प्रश्न–5. जापान को एक विकसित देश कहने के तीन प्रमुख कारण लिखिए।
उ०- जापान को एक विकसित देश कहने के तीन प्रमुख कारण निम्नलिखित है
(i) उच्चकोटि का औद्योगीकरण- जापान की अर्थव्यवस्था उद्योग प्रधान है। इस देश ने उच्चकोटि का औद्योगीकरण करके ‘एशिया का ग्रेट ब्रिटेन’ बनने का यश पा लिया है। उच्चकोटि के औद्योगिक विकास ने ही इसे विकसित राष्ट्र बना दिया है।


(ii) प्राकृतिक संसाधनों का योजनाबद्ध विदोहन- यद्यपि जापान प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में निर्धन है और देश की केवल 16% भूमि ही कृषि-योग्य है, फिर भी इसने अपने प्राकृतिक संसाधनों का योजनाबद्ध ढंग से विदोहन करके
तथा वैज्ञानिक ढंग से खाद्यान्न तथा व्यापारिक फसलों का उत्पादन करके अपने विकसित बनने के द्वार खोल लिए हैं।

(iii) उच्चकोटि की तकनीकी और प्रौद्योगिकी का विकास- जापान ने शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधानों को बढ़ावा देकर
देश में तकनीकी तथा नवीन प्रौद्योगिकी का विकास करके स्वयं को विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया |

प्रश्न—6 विकसित तथा विकाश शील देशों के तीन अंतर लिखिए |

उत्तर -विकसित तथा विकाश शील देशों के तीन अंतर निम्न लिखित है —

विकास के क्षेत्र विकसित देश विकाश शील देश
कृषि इन देशों में जनसंख्या का अल्पभाग कृषि में संलग्न रहता है, फिर भी देश की कुल जनसंख्या के लिए पर्याप्त उत्पादन कर लिया जाता हैइन देशों में जनसंख्या का अधिकांश भाग कृषि में संलग्न रहता है, फिर भी उत्पादन देश की आवश्यकता से कम बना रहता है।
उधयोग इन देशों में उत्पादन बड़े पैमाने पर होता हैप्रति इकाई औसत उत्पादन लागत कम होती है| प्रति श्रमिक उत्पादकता अधिक होती है।इन देशों में उत्पादन छोटे पैमाने पर होता है।इकाई औसत उत्पादन लागत अधिक होती है।
तकनीक स्तर 3. तकनीकी | इन देशों में तकनीकी स्तर उच्च होता है और | स्तर पूँजी-प्रधान तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
इन देशों में तकनीकी स्तर परंपरागत होता है औरमुख्यतः श्रम-प्रधान तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न–7. विकासशील देशों के विकास हेतु तीन सुझाव दीजिए।


उ०- विकासशील देशों के विकास हेतु तीन सुझाव निम्नलिखित हैं
(i) जनसंख्या के बढ़ते आकार पर तुरंत प्रभावी नियंत्रण लगाया जाना चाहिए।
(ii) विकासशील देशों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार करके नारी की दशा को सुधारा जाना चाहिए।
(iii) यातायात, संचार-तंत्र और औद्योगिकरण का विकास किया जाना चाहिए।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न–1. विकसित देश किसे कहते हैं? विकसित देशों की विशेषताएँ लिखिए।


उ०- संयुक्त राष्ट्र संघ __विश्व के समस्त देशों के आर्थिक विकास और संपन्नता पर दृष्टि बनाए रखता है। उसने आर्थिक विकास को आधार मानकर विश्व के सभी देशों को विकसित राष्ट्र और विकासशील राष्ट्र के रूप में वर्गीकृत किया है। विकास प्रकृति का नियम तथा संसार की स्वाभाविक प्रक्रिया है। प्रत्येक राष्ट्र आर्थिक विकास का लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने का प्रयास करता है। सामान्य रूप से वह राष्ट्र जिसने अपने विकास का संपूर्ण लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, एक विकसित राष्ट्र कहलाता है। विकसित राष्ट्र को लक्षित करने का राष्ट्रीय मापक न होकर अंतर्राष्ट्रीय मापक है। “विकसित राष्ट्र वह है, जिसने अपने प्राकृतिक संसाधनों का उचित दोहन करके तथा अपनी श्रमिक शक्ति का भरपूर उपयोग करके आर्थिक समृद्धि का लक्ष्य पूर्ण कर लिया है।” विकसित राष्ट्र पर्याप्त पूँजी तथा तकनीकी का उपयोग कर अपनी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना लेते हैं। विश्व बैंक ने विकसित राष्ट्र को इन शब्दों में परिभाषित किया है, “जिन राष्ट्रों की प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय 10,000 डॉलर या इससे अधिक है, उन्हें विकसित राष्ट्र कहा जाता है।” विश्व के वर्तमान 216 राष्ट्रों में से मात्र 41 राष्ट्र ही विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आते हैं। जापान, रूस, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, नार्वे, स्वीडन, फिनलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका विकसित राष्ट्र हैं। इन सभी देशों ने उच्च स्तरीय आर्थिक विकास करके प्रति व्यक्ति आय का ऊँचा स्तर पा लिया है। आर्थिक विकास का अर्थ दीर्घकाल में होने वाली प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय की वृद्धि से लगाया जाता है।

विकसित राष्ट्र की विशेषताएँ- विकसित राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं


(i) अधिक प्रतिव्यक्ति आय तथा राष्ट्रीय आय- विकसित राष्ट्र की मुख्य विशेषता वहाँ प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय का स्तर ऊँचा होना है। इसीलिए ये राष्ट्र समृद्ध और संपन्न होते हैं।


(ii) उन्नत विज्ञान तथा तकनीकी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग- प्राकृतिक संसाधन किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास की आधारशिला होते हैं। पर्याप्त संसाधन राष्ट्र के आर्थिक विकास की कुंजी हैं। विकसित देश उन्नत विज्ञान तथा तकनीकी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होते हैं।

(iii) वृहत् स्तर पर औद्योगीकरण– सभी विकसित राष्ट्रों ने आर्थिक स्तर की उच्चता को प्राप्त करने की दृष्टि से बड़े पैमाने के उद्योगों की स्थापना विशाल स्तर पर कर ली है। ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान तथा जर्मनी आदि देशों ने औद्योगीकरण की ओर विशेष ध्यान दिया है।


(iv) कृषि का यंत्रीकरण- इन राष्ट्रों में बड़े-बड़े फार्मों में आधुनिक कृषि-यंत्रों तथा उन्नत तकनीकों द्वारा विस्तृत तथा सघन खेती की जाती है, जिसे व्यापारिक कृषि भी कहते हैं। कृषि उत्पादन का बड़ा हिस्सा निर्यात कर दिया जाता है।।


(v) व्यापारिक आधार पर उद्यानों का विकास- विकसित देशों में बड़े-बड़े महानगरीय क्षेत्रों में निवास करने वाली जनसंख्या के लिए फल एवं सब्जियों के उत्पादन के लिए व्यापारिक स्तर पर उद्यानों का विकास किया गया है। इस प्रकार की कृषि को बाजार के लिए बागवानी या फलों की कृषि कहते हैं। अमेरिका एवं यूरोप के बड़े नगरों के चारों ओर ऐसे उद्यान स्थित हैं।


(vi) उन्नत स्तर पर पशुपालन तथा दुग्ध व्यवसाय का विकास- शीतोष्ण जलवायु, उत्तम चरागाह तथा उत्तम नस्ल के पशुओं के कारण विकसित देशों में पशुपालन तथा दुग्ध व्यवसाय बहुत प्रगति कर गया है। बड़े स्तर पर पशुओं से दूध, माँस, चमड़ा तथा ऊन आदि पदार्थ प्राप्त होते हैं।


(vii) अत्यधिक विकसित यातायात एवं संचार-व्यवस्था- विकसित देशों में यातायात एवं संचार व्यवस्था का अत्यधिक विकास कर लिया गया है। इन देशों में सड़कों तथा वृहत रेल मार्गों का जाल बिछा है। ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग विश्व का सबसे लंबा रेलमार्ग विकसित देशों में ही स्थित है। इन देशों में जल तथा वायुपरिवहन का भी विकास कर लिया गया है। विकसित संचार व्यवस्था ने भी इन देशों को विकसित देशों की श्रेणी में ला दिया है।


(viii) शिक्षा विज्ञान एवं तकनीकी का उच्च स्तरीय विकास- विकसित देशों में शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी का विकास चरम सीमा तक हो चुका है। ये राष्ट्र विज्ञान एवं तकनीकी के कारण उद्योग एवं संचार के क्षेत्र में नए-नए रिकार्ड बनाते हैं। इन देशों में कुशल एवं उच्चकोटि की उत्पादक श्रम-शक्ति पाई जाती है।


(ix) जनसंख्या का लघु आकार– विकसित राष्ट्र अल्प जनसंख्या या आदर्श जनसंख्या के आकार वाले देश हैं। अतः यहाँ जनसंख्या की समस्याएँ सिर नहीं उठाती हैं।
(x) नारी की उन्नत दशा- विकसित राष्ट्रों में शिक्षा तथा विज्ञान का भरपूर लाभ नारी को भी मिलता है। अतः इन देशों में नारी पुरुषों के समान लाभों का उपभोग करने के कारण समाज में सम्मान पाती हैं। अत: इन राष्ट्रों में नारी की दशा उन्नत है।


(xi) अन्य विशेषताएँ- विकसित राष्ट्रों में अपेक्षाकृत अधिक प्रशासनिक कार्यकुशलता होती है, पूँजी निर्माण की ऊँची दर होती है तथा बैंकिग, बीमा, वाणिज्य आदि की सुविधाएँ उन्नत स्तर की पाई जाती हैं।

प्रश्न — 2. विकासशील देश से क्या तात्पर्य हैं? विकासशील देशों की विशेषताएँ लिखिए।


उ०- विकासशील देश-विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। मानव का स्वभाव प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने का रहा है। प्रत्येक राष्ट्र विकास के पथ पर आगे बढ़ते हुए विकास का चरम लक्ष्य प्राप्त करना चाहता है। विकासशील राष्ट्र उस राष्ट्र को कहा जाता है, जो चरम विकास का लक्ष्य पाने के लिए विकास की दौड़ में भाग रहा है। प्रत्येक राष्ट्र को निर्धनता, बेरोजगारी आदि के दुष्चक्रों से होकर गुजरना पड़ता है। विकासशील राष्ट्र विकास के पथ पर आगे तो बढ़ रहा होता है, परंतु आर्थिक विकास की दृष्टि से उसका स्तर विकसित राष्ट्रों की अपेक्षा नीचा रहता है। विकासशील राष्ट्र का लक्ष्य औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों में आर्थिक विकास का लक्ष्य प्राप्त करना होता है। अतः “निर्धनता का दुष्चक्र तोड़कर तथा आर्थिक विकास की बाधाओं को दूर करके आर्थिक विकास के लक्ष्य का पीछा करने वाला राष्ट्र, विकासशील राष्ट्र कहलाता है।”

दूसरे शब्दों में, “जो राष्ट्र धीरे-धीरे आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति कर आगे बढ़ रहा है अर्थात् विकास के लिए प्रयत्नशील है, वह राष्ट्र विकासशील राष्ट्र कहलाता है।” विकासशील राष्ट्र सदैव उत्तरोत्तर आर्थिक विकास की ओर बढ़ने का प्रयास करता रहता है। विश्व बैंक ने विकासशील राष्ट्र को इन शब्दों में परिभाषित किया है, “वह राष्ट्र जिसकी प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर वार्षिक या इससे कम है, विकासशील राष्ट्र कहलाता है।” विकासशील राष्ट्र आर्थिक विकास की विविध अवस्थाओं से होकर गुजरता है। भारत, चीन, पाकिस्तान, मिस्र, ब्राजील, बांग्लादेश, हांगकाग, साइप्रस, सिंगापुर आदि विकासशील देशों के उदाहरण हैं। विकासशील देशों की विशेषताएँ- विकासशील देश को निम्नलिखित विशेषताओं के माध्यम से पहचाना जा सकता है | Up board class 10 social science free solution chapter 43:मानव व्यवसाय (गौण व्यवसाय) (विनिर्माण उद्योग, सूती वस्त्र, चीनी, कागज, लोह-इस्पात, सीमेंट, पेट्रोरसायन, ईंजीनियरिंग) |


(i) प्रति व्यक्ति निम्न आय– विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति आय बहुत कम होती है, जिसके कारण गरीब लोगों की
संख्या अधिक पाई जाती है। भारत की एक-तिहाई से अधिक जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करती है।
(ii) जन-सुविधाओं का अभाव- विकासशील देशों में जन-सुविधाओं; जैसे- भोजन, वस्त्र, मकान, परिवहन, उपकरण आदि का अभाव रहता है। अतः लोगों की कार्यक्षमता कम होती है।


(iii) कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था- कृषि में अधिक जनसंख्या का लगा होना इन देशों की एक प्रमुख विशेषता है। अत: इन
देशों में आय के अन्य स्रोत; जैसे- कुटीर उद्योग, व्यापार, तथा कृषि-आधारित उद्योगों के विकास की दर भी नीची होती है।


(iv) औद्योगीकरण का निम्न स्तर- विकासशील देशों में औद्योगीकरण हीन अवस्था में होता है। अधिकांश देश, विदेशी उपनिवेश रहने के कारण आधुनिक औद्योगिक विकास नहीं कर पाते। भारत इसका उदाहरण है। यहाँ शासन द्वारा संचालित औद्योगिक संस्थानों की दशा शोचनीय है। जबकि पाँच दशकों से उद्योगों के प्रति उदार नीति के द्वारा औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया जाता रहा है।


(v) प्रतिकूल व्यापार संतुलन– विकासशील देशों में आयात की तुलना में निर्यात कम होने से व्यापार संतुलन प्रतिकूल बना रहता है।


(vi) ऋण की अधिकता- इन देशों को पूँजी और प्रौद्योगिकी के आयात के लिए अत्यधिक विदेशी ऋण लेना पड़ता है।
जिसके कारण इन्हें आर्थिक विकास का पूरा लाभ नहीं मिलता है ।
(vii) खराब अर्थव्यवस्था- विकासशील देशों में लंबे समय तक औपनिवेशिक दासता होने के कारण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था
खराब अवस्था में रही है। अतः स्वावलंबन की भावना निराशाजनक स्थिति में पहुँच गई है।


(viii) निम्नकोटि की यातायात एवं संचार व्यवस्था– विकासशील देशों में यातायात एवं संचार व्यवस्था का पर्याप्त
विकास नहीं हो जाता है क्योंकि इन देशों के पास संसाधन और तकनीकी का अभाव पाया जाता है। यातायात एवं संचार
व्यवस्था के पिछड़ेपन के कारण इन देशों का आर्थिक विकास बाधित बना रहता है।
(ix) प्राकृतिक संसाधनों का अनुचित दोहन- विकासशील देश पूँजी की कमी तथा तकनीकी क्षेत्र में पिछड़े होने के
कारण अपने प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं कर पाते। प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण भी इन
देशों में उद्योग तथा व्यापार पनप नहीं पाते हैं।


(x) नारी की हीन दशा- बेरोजगारी, अशिक्षा तथा अज्ञानता के कारण विकासशील देशों में नारी की दशा बड़ी दीन-हीन होती है। अधिक संतान पैदा करने के कारण उसका स्वास्थ्य भी बिगड़ जाता है।


(xi) अधिक जनसंख्या– विकासशील देशों में जनसंख्या में निरंतर वृद्धि के कारण जनाधिक्य के कारण जनाधिक्य की _ स्थिति पाई जाती है। चिकित्सा-सुविधाओं में जन्म-दर में कमी तथा औसत आयु में तो वृद्धि हो गई हैं किंतु जन्म-दर में कमी नहीं होने से इन देशों की जनसंख्या बढ़ती जाती हैं जिसका भार कृषि-भूमि पर पड़ता है।

up board class 10 social science free solution chapter 41: जनसंख्या (जनसंख्या का घनत्व, वितरण, लिंग अनुपात, बढ़ती जनसंख्या की समस्याएँ, जनसंख्या नियंत्रण के उपाय)

प्रश्न—3 मिस्र देश का सामान्य परिचय देते हुए इसे विकासशील राष्ट्र कहने के लिए उत्तरदायी कारणों पर प्रकाश डलिए।
उ०- मिस्र एक विकासशील राष्ट्र के रूप में- विश्व की आदि सभ्यता वाला देश मिस्र अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख विकासशील देश है। इसका कुल क्षेत्रफल 9,97,667 वर्ग किमी० है। यहाँ की 94% जनसंख्या मुस्लिम है तथा अरबी यहाँ की राजभाषा है। लगभग 5.10 करोड़ जनसंख्या वाले इस राष्ट्र की राजधानी काहिरा है। मिस्र को नील नदी का वरदान कहा जाता है क्योंकि इसी नदी द्वारा सिंचाई के सहारे यहाँ कृषि फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसी कारण यहाँ की अर्थव्यवस्था में नील नदी का महत्वपूर्ण स्थान है। राष्ट्रीय आय का 45% भाग कृषि-उत्पादों से प्राप्त होता है त था यहाँ की 50% जनसंख्या कृषि-कार्यों में संलग्न है। गेहूँ, चावल, मोटे अनाज तथा कपास यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। भारत की तरह मिस्र की अर्थव्यवस्था भी विकासशील है। मिस्र को विकासशील राष्ट्र कहने के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं

(i) मिस्र एक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था का देश होने के कारण विकासशील राष्ट्रों के कुल का सदस्य माना जाता है।

(ii) मिस्र में औद्योगीकरण का स्तर नीचा होने के कारण उसे विकासशील राष्ट्र कहना उचित है।


(iii) मिस्र में परिवहन व्यवस्था तथा संचार-तंत्र अल्प विकसित अवस्था में है अत: यह एक विकासशील राष्ट्र है।


(iv) मिस्र में लोगों की प्रति व्यक्ति आय तथा राष्ट्रीय आय कम होने के कारण यह एक विकासशील राष्ट्र माना जाता है।


(v) मिस्र में शिक्षा और विज्ञान का स्तर सामान्य होने के कारण यह एक विकासशील राष्ट्र ही है।


(vi) मिस्र में पर्दा प्रथा का प्रचलन होने तथा स्त्री शिक्षा पर ध्यान न दिए जाने के कारण नारी की दशा खराब हैं, जो इसे एक विकासशील राष्ट्र बनाने के लिए पर्याप्त है।


(vii) मिस्र में पूँजी का निर्माण बहुत मंद गति से हो रहा है अतः इसे एक विकासशील राष्ट्र कहना सर्वथा उचित है।


(viii) मिस्र कपास, खजूर तथा खनिज पदार्थों का निर्यात करने के कारण एक विकासशील राष्ट्र ही बना हुआ है, यद्यपि संसाधनों के उचित दोहन और औद्योगीकरण में वृद्धि के फलस्वरूप यहाँ सूती वस्त्र, सीमेंट, काँच, रासायनिक उर्वरक, कागज, सिगरेट, पेट्रोलियम परिष्करण, विद्युत उपकरण, चीनी, टायर, रेफ्रीजरेटर तथा संचार उपकरणों के उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है ।

प्रश्न—4 विकसित और विकासशील देशों की तुलना करते हुए उनमें अंतर बताइए।


उ०- विकसित एवं विकासशील देशों की तुलनाविकास के क्षेत्र विकसित देश

विकास के क्षेत्र विकसित देश विकासशील देश
कृषिइन देशों में जनसंख्या का अल्पभाग कृषि में संलग्न रहता है, फिर भी देश की कुल जनसंख्या के लिए पर्याप्त उत्पादन कर लिया |इन देशों में जनसंख्या का अधिकांश भाग कृषि में संलग्न रहता है, फिर भी उत्पादन देश की आवश्यकता से कम बना रहता है।
उद्योगइन देशों में उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।प्रति इकाई औसत उत्पादन लागत कम होती | प्रति श्रमिक उत्पादकता अधिक होती है।इन देशों में उत्पादन छोटे पैमाने पर होता है।प्रति प्रति इकाई औसत उत्पादन लागत अधिक होती ही | प्रति श्रमिक उत्पादकता कम होती है।
तकनीकी स्तरइन देशों में तकनीकी स्तर उच्च होता है और पूँजी-प्रधान तकनीक का प्रयोग किया जाताइन देशों में तकनीकी स्तर परंपरागत होता है और मुख्यतः श्रम-प्रधान तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
आर्थिक स्तरइन देशों में प्रति आय अधिक होती है।| राष्ट्रीय आय के अनुपात में बचत व निवेशका उच्च स्तर पाया जाता है।इन देशों में प्रति व्यक्ति आय कम होती है| राष्ट्रीय आय के अनुपात में बचत व निवेश का निम्न स्तर पाया जाता है।
5. प्राकृतिक संसाधनइन देशों में प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध होते हैं| और उनका पूर्ण दोहन किया जाता है।ई न देशों में प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त मात्रा में
उपलब्ध होते हैं, किंतु उनका पूर्ण दोहन संभव
नहीं होता।
जनसंख्याइन देशों में कम जनसंख्या पाई जाती है और |वह कार्यकुशल होती है।इन देशों में अधिक जनसंख्या पाई जाती है किंतु
वह कम कार्यकुशल होती है।
7. निर्यातइन देशों में अधिकांश निर्मित माल का निर्यात किया जाता है निर्भरता कम होती है।
इन देशों में अधिकांश कच्चे माल का निर्यात किया जाता है तथा आयात पर निर्भरता अधिक होती है।
पूँजी-निर्माणइन देशों में पूँजी-निर्माण की दर अधिक होती है।इन देशों में पूँजी-निर्माण की दर कम होती है।

आयात
इन देशों में आयात की मात्रा कम रहती है।कच्चे माल का अधिक आयात होता है।
इन देशों में आयात की मात्रा अधिक रहती है।तैयार माल का अधिक आयात होता है।
10. पूँजी एवं तकनीकीइन देशों में पूँजी एवं तकनीक का निर्यात होता है।इन देशों में पूँजी एवं तकनीक दूसरे देशों से मँगायी जाती है।
11. निर्भरताये राष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर होते हैं।राष्ट्र विभिन्न वस्तुओं के लिए दूसरे राष्ट्रों पर निर्भर होते हैं।
12. जीवन-स्तर

इन देशों में रहन-सहन का स्तर ऊँचा और नीचा और सुखदायी होता है।
इन देशों के निवासियों का जीवन-स्तर संघर्षमय होता है।

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