MP Board Solution For Class 12th Hindi Makrand Chapter 11 मेरे सपनों का भारत (निबन्ध, डॉ . ए . पी . जे . अब्दुल कलाम)

MP Board Solution For Class 12th Hindi Makrand Chapter 11 मेरे सपनों का भारत (निबन्ध, डॉ . ए . पी . जे . अब्दुल कलाम)

मेरे सपनों का भारत पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न
मेरे सपनों का भारत लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 .
बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया में किस-किसका योगदान था?
उत्तर:—
बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया में धार्मिक संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों का योगदान था ।।

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प्रश्न 2 .
शिक्षा के क्षेत्र में कौन-कौन से आचार्य प्रसिद्ध हुए हैं? (M . P . 2010)
उत्तर:—
शिक्षा के क्षेत्र में कौटिल्य, पाणिनि, जीवक, अभिनव गुप्त और पतंजलि आदि आचार्य प्रसिद्ध हुए हैं ।।

प्रश्न 3 .
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत के विकास के लिए किस प्रकार की योजनाएँ बनाई गईं?
उत्तर:—
स्वतंत्रता के पश्चात् भारत विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं ।।

प्रश्न 4 .
भारत विकसित देशों की श्रेणी में वैसे आ सकेगा?
उत्तर:—
भारत बौद्धिक समाज के रूप में बदलकर ही विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेगा ।।

प्रश्न 5 .
भारतीय सेना में कौन-कौन सी स्वदेशी मिसाइलें शामिल की गई हैं?
उत्तर:—
भारतीय सेना में ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ स्वदेशी मिसाइलें शामिल की गई हैं ।।

मेरे सपनों का भारत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 .
अतीत में शिक्षा के क्षेत्र में भारत को बहुत उन्नत क्यों कहा गया है?
उत्तर:—
अतीत में भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे महान् विश्वविद्यालय थे, जिनमें भारत के अतिरिक्त सुदूर देशों के विद्यार्थी भी भाषा, व्याकरण, दर्शनशास्त्र, औषधि, विज्ञान, सर्जरी, धनुर्विद्या, एकाउंट्स, वाणिज्य, भविष्य-विज्ञान, दस्तावेजीकरण, तंत्रविद्या, संगीत, नृत्य तथा छिपे खजानों की शिक्षा प्राप्त करने आते थे ।। इसीलिए अतीत में शिक्षा के क्षेत्र में भारत को बहुत उन्नत कहा गया है ।।

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प्रश्न 2 .
शून्य के आविष्कार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।। (M . P . 2011)
उत्तर:—
गणित के क्षेत्र में भारत ने शून्य का आविष्कार किया जिससे गणना करने की दोहरी प्रणाली विकसित हुई ।। इसी दोहरी प्रणाली पर आधुनिक कंप्यूटर निर्भर हैं ।। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने विश्व को गणना सिखाने का श्रेय भारतीयों को दिया ।। शून्य के आविष्कार से अनेक महत्त्वूपर्ण वैज्ञानिक खोज संभव हो सकीं ।।

प्रश्न 3 .
आर्यभट्ट की क्या देन है? (M . P . 2009, 2012)
उत्तर:—
आर्यभट्ट ने हमें बताया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है ।। उन्होंने रेखागणित के क्षेत्र में वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था और दशमलव के चार अंकों तक इसका शुद्ध मान बतलाया था ।। इस प्रकार रेखागणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट की महत्त्वपूर्ण देन है ।। दशमलव पद्धति भी उनकी देन है ।।

प्रश्न 4 .
भारत के आधारभूत ढाँचे के निर्माण के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए?
उत्तर:—
भारत ने आधारभूत ढाँचे के निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना की ।। अनुसंधान व विकास और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की ।। इनका नेतृत्व योग्य व्यक्तियों के हाथों में दिया गया ।।

प्रश्न 5 .
“स्वतंत्रता से पूर्व भी भारतीयों ने विश्वस्तरीय उपलब्धियाँ प्राप्त की थीं ।। ” इस कथन का तात्पर्य स्पष्ट कीजिए ।। (M . P . 2012)
उत्तर:—
इस कथन का तात्पर्य है कि स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भी भारत में प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े प्रतिभाशाली वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, चिकित्सक आदि थे ।। वैज्ञानिकों ने अपनी खोजों के द्वारा विदेशों में भारत का नाम रोशन किया ।। टैगोर ने साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार प्राप्त किया ।। सी . वी . रमन, के . एस . कृष्णन को उनकी वैज्ञानिक खोजों के लिए ‘सर’ उपाधि से सम्मानित किया गया ।। दार्शनिक क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद ने अपने व्याख्यानों से विश्व के लोगों को प्रभावित किया ।।

प्रश्न 6 .
अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक बाजार में भारतीय सॉफ़्टवेयर की अच्छी साखक्यों है?
उत्तर:—
अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक बाजार में भारतीय सॉफ्टवेयर की अच्छी साख है, क्योंकि इस क्षेत्र में सक्रिय भारतीय इंजीनियरों ने अपनी कुशलता का परिचय दिया है ।। हमारा कुशल- जन-संसाधन विश्व में सर्वोपरि है ।। इसमें युवा उद्यमियों का कुशल प्रबंधन प्रशंसनीय है ।।

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत भाव-विस्तार/पल्लवन

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प्रश्न 1 .
निम्नलिखित पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए- “विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है ।। ”
उत्तर:—
21वीं शताब्दी ज्ञान युग और बौद्धिक युग से सम्बन्धित है ।। जहाँ ज्ञान की प्राप्ति, उपलब्धि और प्रयोग को महत्त्वपूर्ण संसाधन माना जाता है ।। आज संसार में प्रत्येक व्यक्ति विविध विषयों का ज्ञान अर्जित करना चाहता है ।। ज्ञान बुद्धि का विषय है ।। इसीलिए समाज के लिए अपना बौद्धिक विकास करने में संलग्न है और विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है ।। जहाँ अज्ञान और अंधविश्वास के लिए कोई स्थान नहीं है ।।

मेरे सपनों का भारत भाषा-अनुशीलन

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 मेरे सपनों का भारत

प्रश्न 2 .
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए –

हम इसका श्रेय भारतीयों को देते हैं, जिन्होंने हमें गणना करना सिखाया ।। (सरल वाक्य में)
भारत ने महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना और आधारभूत ढाँचे के निर्माण को प्रेरित किया ।। (मिश्र वाक्य में)
बालक रो-रोकर चुप हो गया ।। (संयुक्तं वाक्य में)
उत्तर:—

हमें गणना करना सिखाने का श्रेय भारतीयों को देना चाहिए ।।
जब भारत ने महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना की, तब उसने आधारभूत ढाँचे का भी निर्माण किया ।।
बालकं रो रहा था और वह रोकर चुप हो गया ।।
प्रश्न 3 .
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध रूप में लिखिए –

खिड़की खुलने से प्रकाश आएगा ।।
तुम तुम्हारे घर जाओ ।।
हमारे को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए ।।
उत्तर:—

खिड़की खुलने से प्रकाश आता है ।।
तुम अपने घर जाओ ।।
हमें अपनी उपलब्धि पर गर्व करना चाहिए ।।
मेरे सपनों का भारत योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1 .
भारत ने शून्य का आविष्कार किया, ऐसे ही भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में और क्या-क्या उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं? सूची बनाइए ।।
उत्तर:—
छात्र स्वयं करें ।।

प्रश्न 2 .
भारतीय मिसाइल का मॉडल तैयार कर उसका प्रदर्शन कीजिए ।।
उत्तर:—
छात्र स्वयं करें ।।

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प्रश्न 3 .
आपके सपनों में भारत कैसा है, विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए ।।
उत्तर:—
छात्र स्वयं करें ।।

प्रश्न 4 .
गाँव/शहर का विकास ही भारत का विकास है, अतः आप अपने गाँव/शहर के विकास के लिए स्वयं क्या करना चाहते हैं, लेखबद्ध करें ।। ।।
उत्तर:—
छात्र स्वयं करें ।।

मेरे सपनों का भारत परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1 .
विश्व को शून्य की देन ……… . . है ।।
(क) इंग्लैंड की
(ख) अमेरिका की
(ग) जापान की
(घ) भारत की
उत्तर:—
(घ) भारत की ।।

प्रश्न 2 .
रामानुजम प्रसिद्ध ……… . . थे ।।
(क) वैज्ञानिक
(ख) गणितज्ञ
(ग) दार्शनिक
(घ) शिक्षा शास्त्री
उत्तर:—
(ख) गणितज्ञ ।।

प्रश्न 3 .
भारत ने ………… का आविष्कार किया ।।
(क) दशमलव प्रणाली
(ख) कंप्यूटर
(ग) शिक्षा प्रणाली
(घ) मिसाइल प्रणाली
उत्तर:—
(क) दशमलव प्रणाली ।।

प्रश्न 4 .
‘हम इसका श्रेय भारतीयों को देते हैं’ किसने कहा?
(क) अल्बर्ट आइंस्टाइन ने
(ख) अल्बर्ट डिसूजा ने
(ग) अल्बर्ट मारकोनी ने
(घ) सी . वी . रमन ने
उत्तर:—
(क) अल्बर्ट आइंस्टाइन ने ।।

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प्रश्न 5 .
वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में ……… . . परिभाषित किया ।।
(क) आर्यभट्ट ने
(ख) भास्कराचार्य ने
(ग) मिहिर वराह ने
घ) नागार्जुन ने
उत्तर:—
(क) आर्यभट्ट ने ।।

प्रश्न 6 .
भारतीय सेना में शामिल की जा चुकी मिसाइलें हैं –
(क) सूर्य और आकाश
(ख) पृथ्वी और अग्नि
(ग) क्रूज और नाग
(घ) गौरी और हल्फ
उत्तर:—
(ख) पृथ्वी और अग्नि ।।

प्रश्न 7 .
विश्व किस समाज में परिवर्तित हो रहा है –
(क) बौद्धिक
(ख) धार्मिक
(ग) वैज्ञानिक
(घ) आध्यात्मिक
उत्तर:—
(क) बौद्धिक ।।

प्रश्न 8 .
‘मेरे सपनों का भारत’ के लेखक हैं……… . ।। (M . P . 2012)
(क) अब्दुल कलाम आजाद
(ख) डॉ . अब्दुल कलाम
(ग) अब्दुल कादिर
(घ) अब्दुल रहमान
उत्तर:—
(ख) डॉ . अब्दुल कलाम ।।

प्रश्न 9 .
सुश्रुत ने कब जटिल शल्य क्रिया की थी?
(क) 15,000 वर्ष पहले
(ख) 1,000 वर्ष पहले
(ग) 2,500 वर्ष पहले
(घ) 2,000 वर्ष पहले
उत्तर:—
(ग) 2,500 वर्ष पहले ।।

II . निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

भारत पिछली शताब्दी में एक ……… . राष्ट्र था ।। (प्रबल उन्नत)
भारत ने ……… . का आविष्कार किया ।। (गुरुत्वाकर्षण/शून्य)
इक्कीसवीं सदी ……… . से संबंधित है ।। (बौद्धिक युग/धार्मिक युग)
स्वतंत्रता के बाद भारत ने ……… . शुरू की ।। (पंचवर्षीय योजना/राजनीतिक योजना)
70 के दशक में पहले ……… . क्रान्ति के परिणाम देखने को मिले ।। (समग्र/हरित)
उत्तर:—

उन्नत
शून्य
बौद्धिक युग
पंचवर्षीय योजना
हरित ।।
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III . निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

‘मेरे सपनों का भारत’ निबंध के लेखक पंडित नेहरू हैं ।।
हमें अपने उल्लेखनीय उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए ।।
भारतीय सेना में ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ को शामिल किया गया ।।
परमाणु ऊर्जा उत्पत्ति तथा अस्त्र विकास में हमारी उपलब्धियाँ विकसित विश्व के मुकाबले की नहीं हैं ।।
विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है ।।
उत्तर:—

असत्य
सत्य
सत्य
असत्य
सत्य ।।

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V . निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1 .
किस दशक में पहले हरित क्रांति के परिणाम देखने को मिले?
उत्तर:—— 70 के दशक में ।।

प्रश्न 2 .
भारत किस अवसर का लाभ एक विकसित देश बनने के लिए उठा सकता हैं ।।
उत्तर:—
दो दशकों के भीतर का ।।

प्रश्न 3 .
भास्कराचार्य ने किस सिद्धान्त की स्थापना की?
उत्तर:—
‘सूर्य-सिद्धान्त’ की ।।

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प्रश्न 4 .
‘सूर्य सिद्धान्त’ में भास्कराचार्य ने किसके नियम को पहचाना था?
उत्तर:—
गुरुत्वाकर्षण के नियम को ।।

प्रश्न 5 .
शिक्षकों के पैनल में कौन-कौन से प्रसिद्ध आचार्य थे?
उत्तर:—
कौटिल्य, पाणिनि, जीवक, अभिनव गुप्त और पतंजति ।।

मेरे सपनों का भारत लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 .
अतीत में भारत के दो महान् विश्वविद्यालय कौन-कौन से थे? (M . P . 2012)
उत्तर:—
अतीत में भारत में तक्षशिला . और नालंदा दो महान् विश्वविद्यालय थे ।।

प्रश्न 2 .
2500 वर्ष पहले किस चिकित्सक ने जटिलशल्य क्रियाएँ की थीं?
उत्तर:—
2500 वर्ष पहले सुश्रुत ने जटिलशल्य क्रियाएँ की थीं ।।

प्रश्न 3 .
आज़ादी से पूर्व के प्रसिद्ध कवि कौन थे?
उत्तर:—
आज़ादी से पूर्व रवींद्रनाथ टैगोर प्रसिद्ध कवि थे ।।

प्रश्न 4 .
ऑपरेशन फ्लड से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:—
ऑपरेशन फ्लड से तात्पर्य है-दूध उत्पादन में क्रांति होना ।।

प्रश्न 5 .
पी . एस . एल . वी . सी . -5 की सातवीं सफल उड़ान ने क्या प्रदर्शिताकिया?
उत्तर:—
उपग्रह को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने की स्वदेशी योग्यता को ।।

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प्रश्न 6 .
आर्यभट्ट कौन थे?
उत्तर:—
आर्यभट्ट एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे ।। उन्होंने किसी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपातको पाई के रूप में परिवर्तित किया था ।।

प्रश्न 7 .
लेखक ने शल्य-क्रिया के क्षेत्र में किसका नाम लिया है?
उत्तर:—
लेखक ने शल्य-क्रिया के क्षेत्र में सुश्रुत का नाम लिया है ।।

प्रश्न 8 .
स्वतंत्रता के बाद भारत ने क्या शुरू की?
उत्तर:—
पहली पंचवर्षीय योजना ।।

मेरे सपनों का भारत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 .
हरित क्रांति से क्या लाभ हुआ?
उत्तर:—
कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति के कारण भारत खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना ।। खाद्यान्नों के आयात पर उसकी निर्भरता समाप्त हो गई ।।

प्रश्न 2 .
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने क्या प्रगति की?
उत्तर:—
अंतरिक्ष-विज्ञान के क्षेत्र में हर प्रकार उपग्रह डिजाइन तथा विकसित करने और उन्हें अपने प्रक्षेपण यानों द्वारा अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के साथ ही स्वदेशी तकनीक विकसित करने की योग्यता प्राप्त कर ली है ।।

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प्रश्न 3 .
मिसाइल क्षेत्र में भारत की क्या उपलब्धि है?
उत्तर:—
मिसाइल के क्षेत्र में भारत ने किसी भी प्रकार की मिसाइल या मुखाग्र को डिजाइन करने, विकसित करने तथा उसे उत्पादित करने की स्वदेशी क्षमता प्राप्त कर ली है ।।

प्रश्न 4 .
आजादी से पहले हमारे पास विस-किस क्षेत्र के कौन-कौन-से लोग जुड़े हुए थे?
उत्तर:—
आजादी से पहले हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, चिकित्सक और लगभग हरेक क्षेत्र से लोग जुड़े हुए थे ।। हमारे पास एस . एन . बोस, मेघनाद साहा, जे . सी . बोस . , सर सी . वी . रमन, सर के . एस . कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई, वी . एस . राय जैसे वैज्ञानिक, रामानुजम् जैसे गणितज्ञ, रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि, विवेकानंद जैसे दार्शनिक जुड़े हुए थे ।।

प्रश्न 5 .
व्यावसायिक बाजार में भारत किस प्रकार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है?
उत्तर:—
हमारा कुशल जन-संसाधन संसार में सबसे इच्छित संसाधनों में से एक है ।। यह विकसित संसार के आर्थिक विकास में भारतीय वैज्ञानिकों और उद्यमियों के बड़े योगदान से स्पष्ट है ।। इसके अलावा अपनी जनसंख्या और शिक्षित जनशक्ति की उपलब्धता के कारण भारत तुरन्त बौद्धिक कर्मियों की विशाल संख्या कर सकने में सक्षम है ।। ऐसा कर सकने में बहुत कम विकसित देश सक्षम हैं ।।

मेरे सपनों का भारत लेखक-परिचय

प्रश्न 1 .
डॉ . ए . पी . जे . अब्दुल कलाम का संक्षिप्त जीवन-परिचय और साहित्यिक परिचय दीजिए ।।
उत्तर:—
जीवन-परिचय:—
भारतरत्न और भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ . अब्दुल कलाम का जन्म सन् 1931 में तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले के धनुष कोटि नगर के एक साधारण परिवार में हुआ ।। उनका पूरा नाम डॉ . चंबुल पाकिर जैनुल आवदीन अब्दुल कलाम था ।। उनका जीवन सादगी की अनूठी मिसाल था ।। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम में हुई ।। उच्चशिक्षा के लिए आप तिरुचिरापल्ली चले गए और वहाँ के सेंट जोसफल कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त की ।।

ईश्वर में आपकी पूर्ण आस्था थी ।। आप सच्चे धर्मनिरपेक्ष थे ।। आप जिस प्रकार कुरान का पाठ करते थे, उसी प्रकार गीता के दर्शन में भी आपकी आस्था थी ।। उनका कहना था कि जब में विज्ञान विपय से संबंधित अनेक सूक्ष्म कणों से मिलकर बने कणों का अध्ययन करता था, तो उससे प्रभु की सत्ता में मेरा विश्वास और भी दृढ़ हो जाता ।।

आपकी परिकल्पना थी कि सन् 2020 तक भारत विकसित राष्ट्र बने ।। इस कल्पना को साकार करने के लिए आपने विज्ञान के क्षेत्र में गहन अनुसंधान किया तथा देश को उपग्रह प्रणाली में आत्मनिर्भर बनाया ।। सर्वप्रथम मिसाइल कार्यक्रम को भारत में एक पहचान दी ।। इसी कारण उन्हें ‘मिसाइलमैन’ भी कहा जाता है ।। आपके प्रयासों से भारतीय सेना को पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइलों से सुसज्जित किया गया है तथा अनेक मिसाइलों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है ।। डॉ . कलाम ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।। इन्हीं विशिष्ट उपलब्धियों एवं वैज्ञानिक परिकल्पना के लिए उनको राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत-रत्न’ प्रदान किया गया ।। 28 जुलाई, 2015 को इनका निधन हो गया ।।

साहित्यिक उपलब्धियाँ:—
विज्ञान के अतिरिक्त साहित्य के क्षेत्र में डॉ . कलाम ने उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं ।। आपकी रचनात्मक प्रतिभा का लाभ साहित्य जगत् को भी मिलता रहा है ।। आपके बहुमूल्य विचार, कल्पना शक्ति एवं दूर-दृष्टि आपकी बहुमूल्य रचनाओं में भी झलकती हैं ।। आपमें देश के भावी कर्णधारों को सँवारने की अद्वितीय परिकल्पनाएँ थीं ।।

रचनाएँ:—
मेरे सपनों का भारत ।।

महत्त्व:—
आप बच्चों को राष्ट्र की धरोहर मानते थे ।। आप भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद पर आसीन थे ।। आप वैज्ञानिक क्षेत्र के साथ-साथ शिक्षण और साहित्य-सृजन में भी संलग्न थे ।।

मेरे सपनों का भारत पाठ का सारांश

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प्रश्न 1 .
डॉ . अब्दुल कलाम के द्वारा रचित ‘मेरे सपनों का भारत’ लेख का सार अपने शब्दों में लिखिए ।।
उत्तर:—
‘मेरे सपनों का भारत’ पाठ के रचयिता डॉ . अब्दुल कलाम हैं ।। इसमें लेखक ने भारत जैसे विकासशील देश के लिए एक बौद्धिक समाज के रूप में विकसित होने और स्वयं को एक बौद्धिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने के तरीकों व उपायों पर विचार किया है ।। लेखक का कहना है कि भारतीय सभ्यता की प्रभावशाली उपलब्धियों को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि विगत सहस्राब्दी में भारत एक उन्नत समाज था ।। यहाँ धार्मिक संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों के प्रेरक योगदानों से बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही है ।। उनके मौलिक विचारों, सिद्धांतों और व्यवहारों ने बौद्धिक समाजका ठोस आधारशिला रखी ।।

तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय जिनमें अन्य देशों के विद्यार्थी भी अनेक विषयों की शिक्षा ग्रहण करने आते थे ।। इस बात के प्रमाण हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में भारत बहुत उन्नत था ।। कौटिल्य, पाणिर्णाने, जीवक, अभिनव गुप्त तथा पतंजलि जैसे योग्य शिक्षाविद् थे ।। गणित के क्षेत्र में भारतीयों ने विश्व को शून्य और दशमलव पद्धति दी, जिसक कारण वर्तमान कम्प्यूटर और महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज संभव हो सकी ।। यूकलिड से बहुत पहले भारत में ज्यामिति’ के नाम से रेखागणित का प्रयोग किया जाता था ।। आर्यभट्ट ने किसी वृत्त की परिधि और अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था और दशमलव के चार अंकों तक शुद्ध मान बतलाया था ।।

इसी प्रकार भास्कराचार्य ने सूर्य सिद्धांत की स्थापना की ।। उन्होंने बताया था ।। कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है ।। भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण को पहचाना था ।। चरक ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को दिया, तो सुश्रुत ने जटिल शल्य क्रियाएँ की थीं ।। हमें अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों पर गर्व है ।। भारत में आजादी से पूर्व भी भारत में एस . एन . बोस, मेघनाथ साहा, जे . सी . बोस, सर सी . वी . रमन, सर के . एस . कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम सारा भाई जैसे वैज्ञानिक, रामानुजम जैसे गणितज्ञ, रवींद्रनाथ जैसे कवि, विवेकानंद जैसे दार्शनिक थे ।।

स्वतंत्रता के बाद भारत में पंचवर्षीय योजना प्रारंभ की गई ।। उद्योगों के लिए आधारभूत ढाँचा बना ।। 1970 में हरित क्रांति हुई ।। देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना ।। ऑपरेशन फ्लड के द्वारा देश विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना ।। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में काफी विकास हुआ ।। भारत ने उपग्रह डिजाइन तथा विकसित करने, अपनी धरती से प्रक्षेपण यानों द्वारा कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता प्राप्त की ।। इसी प्रकार मिसाइल या मुखाग्र को डिजाइन करने की क्षमता प्राप्त की है ।। भारतीय सेना में पृथ्वी और अग्नि को शामिल किया जाना स्वदेशी क्षमता का ही प्रमाण है ।।

परमाणु ऊर्जा उत्पत्ति तथा अस्त्र विकास में हम विश्व के समकक्ष हैं ।। भारतीय सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं ।। भारतीय वैज्ञानिकों व उद्यमियों ने विश्व आर्थिक व्यवस्था में बड़ा महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।। भारत तुरंत बौद्धिक कर्मियों की विशाल संख्या तैयार करने में सक्षम है ।। आज विश्व बौद्धिक समाज में बदल रहा है, जहाँ समन्वित ज्ञान-शक्ति तथा धन का स्रोत होगा ।। अतः भारत को विकसित देश बनने के लिए अवसर का लाभ उठाना चाहिए ।। इसके लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतिस्पर्धात्मकता के मामले में कहाँ हैं, जो यह एक बौद्धिक शक्ति बनने के लिए आवश्यक है ।।

मेरे सपनों का भारत संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1 .
भारतीय सभ्यता की प्रभावशाली उपलब्धियों को देखने पर यह विश्वास प्रबल हो जाता है कि भारत पिछली सहस्राब्दी में एक उन्नत समाज था ।। कई धर्मों के संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों के प्रेरक योगदानों के द्वारा बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही ।। उनके भए तथा मौलिक विचारोंसिद्धांतों और व्यवहारों ने हमारे अपने बौद्धिक समाज के लिए एक ठोस आधार प्रदान किया ।। (Page 49)

शब्दार्थ:—

प्रबल – दृढ़ ।।
सहस्राब्दी – हजारों वर्ष ।।
उपलब्धियों – प्राप्तियों ।।
बौद्धिक – बुद्धि से संबंधित ।।
पुनर्जागरण – फिर जागृत होने की प्रक्रिया ।।
प्रसंग:—
प्रस्तुत गद्यांश डॉ . ए . पी . जे . अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है ।। लेखक प्राचीन भारत की उपलब्धियों के आधार पर बौद्धिक पुनर्जागरण की प्रक्रिया के निरंतर चलते रहने की ओर ध्यान आकर्षित किया है ।।

व्याख्या:—
भारत विगत एक हजार वर्षों के दौरान एक उन्नत समाज था, यह बात प्राचीन भारतीय सभ्यता की विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावशाली देनों को देखने से प्रमाणित हो जाता है ।। यह विश्वास भी दृढ़ हो जाता है कि भारत एक प्रगतिशील देश था ।। भारत में प्रचलित विभिन्न धर्मों के साधु-सं, ऋषि-महर्षियों, दर्शन-शास्त्र के तत्त्ववेत्ताओं, कवियों, वैज्ञानिकों, आकाशमंडल के ग्रह-नक्षत्रों के जानकारों और गणित के विद्वानों के प्रेरित करने वाले योगदानों के द्वारा बुद्धि संबंधी पुनजागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती थी ।। इससे फिर जागृत होने की प्रक्रिया में कभी बाधा उत्पन्न नहीं होती थी ।। उनके नवीन और मौलिक विचारों, सिद्धांतों और व्यवहारों ने हमारे अधुिनिक बौद्धिक समाज के लिए ठोस आधार प्रदान किया है ।।

विशेष:—

लेखक ने प्राचीन भारत की उपलब्धियों को प्रेरक बताया है ।। यह भी बताया है कि उस काल में बौद्धिक पुनजांगरण की निरंतर चलने वाली प्रक्रिया ने समाज को ठोस आधार प्रदान किया है ।।
भाषा तत्सम शब्दावली युक्त है ।।
विचारात्मक शैली है ।।
गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत एक उन्नत समाज था, यह कैसे प्रमाणित होता है?
उत्तर:—
भारतीय सभ्यता की विगत एक हजार वर्षों की प्रभावशाली उपलब्धियों को देखने पर यह बात प्रमाणित हो जाती है कि भारत एक उन्नत समाज था ।।

प्रश्न (ii)
प्राचीन काल में समाज को ठोस आधार किसने प्रदान किया है?
उत्तर:—
प्राचीन काल में बौद्धिक पुनर्जागरण की निरंतर चलने वाली प्रक्रिया ने समाज को ठोस आधार प्रदान किया है ।।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने किस ओर ध्यान आकर्षित किया है?
उत्तर:—
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने प्राचीन भारत की उपलब्धियों और निरंतर चलने वाली बौद्धिक प्रक्रिया की ओर ध्यान आकर्षित किया है ।।

प्रश्न (ii)
किन लोगों के योगदान से पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही?
उत्तर:—
धार्मिक संतों, दार्शनिकों, कवियों, वैज्ञानिकों, खगोलविदों और गणितज्ञों के प्रेरक योगदानों से भारत में पुनर्जागरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रही ।।

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प्रश्न 2 .
भारत ने शून्य का आविष्कार किया, जिसने गणना की दोहरी प्रणाली की आधारशिला रखी, जिस पर वर्तमान कंप्यूटर निर्भर हैं ।। अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, “हम इसका श्रेय भारतीयों को देते हैं, जिन्होंने हमें गणना करना सिखाया, जिसके बिना कोई भी महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज नहीं की जा सकती थी ।। ” इसी प्रकार, भारत ने दशमलवे पद्धति (डेसिमल सिस्म) का आविष्कार किया ।। यूकलिड से काफी पहले भारत में ज्यामिति के नाम से रेखागणित का प्रयोग किया जाता था ।। आर्यभट्ट ने किसी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था और दशमलव के चार अंकों तक इसका शुद्ध मान बतलाया था ।। (Page 50)

शब्दार्थ:—

शून्य – जीरो ।।
आविष्कार-खोजगणना – गिनने की प्रक्रिया आधारशिलानींव का रह पत्थर, जिसके ऊपर मकान की दीवार बनाई जाती है ।।
प्रसंग:—
प्नत गद्यांश डॉ . अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों के भारत’ में लिया गया है ।। खक प्राचीन भारत के गणित के क्षेत्र में योगदान का उल्लेख किया है ।।

व्याख्या:—
लेखक कहता है कि गणित के क्षेत्र में भारत का महत्त्वपूर्ण योगदान है ।। इस क्षेत्र में भारत ने शून्य (जीरो) का आविष्कार किया, जिसने गिनती करने की दोहरी पद्धति की नींव रखी ।। गणना की इसी दोहरी पद्धति पर वर्तमान कंप्यूटर आश्रित है ।। आधुनिक कंप्यूटर दोहरी प्रणाली से ही संचालित है ।। सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने जीरो के आविष्कार का श्रेय भारतीयों को देते हुए कहा कि भारतीयों ने ही हमें गिनती करना सिखाया ।। विश्व के लिए उनका यह बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान है ।। समुचित गणना के अभाव में कोई भी महत्त्वपूर्ण खोज नहीं की जा सकती थी; अर्थात् गणित के क्षेत्र में भारतीयों द्वारा शून्य की विश्व को देन के पश्चात् ही महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज और आविष्कार संभव हो सके हैं ।।

दशमलव प्रणाली भी विश्व को भारतीयों की ही देन है ।। इतना ही नहीं यूकलिड से बहुत पहले भारत में ज्यामिति के नाम से रेखागणित का प्रयोग किया जाता था ।। दूसरे शब्दों में, यूकलिड से पहले ही भारतीयों ने रेखागणित का आविष्कार कर लिया था ।। आर्यभट्ट ने वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था ।। इसके साथ ही दशमलव के चार अंकों तक इसका शुद्ध मान निकालकर बताया था ।।

विशेष:—

गणित के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियों और विश्व में उनके – योगदान के महत्त्व को स्पष्ट किया गया है ।।
भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है ।।
गणित की पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग किया गया है ।।
शैली वर्णनात्मक है ।।
मयांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्राचीन भारत की गणित के क्षेत्र में विश्व को क्या देन है?
उत्तर:—
प्राचीन भारत की गणित के क्षेत्र में विश्व को महत्त्वपूर्ण देन है-शून्य (जीरो) ।। इस देन से गिनती करने की दोहरी पद्धति की नींव पड़ी, जिससे अनेक वैज्ञानिक आविष्कार संभव हो सके ।।

प्रश्न (ii)
भारत में यूकलिड से पूर्व किस नाम से रेखागणित का प्रयोग होता था ।।
उत्तर:—
यूकलिड से पूर्व ही भारत में ‘ज्यामिति’ के नाम से रेखागणित का प्रयोग होता था ।।

प्रश्न (iii)
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भारतीयों को किस बात का श्रेय दिया?
उत्तर:—
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भारतीयों को विश्व को गणना सिखाने का श्रेय दिया ।।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
गणित के क्षेत्र में जीरो के अतिरिक्त भारतीयों ने क्या आविष्कार किया?
उत्तर:—
गणित के क्षेत्र में जीरो के अतिरिक्त भारतीयों के दशमलव पद्धति का आविष्कार किया ।। आधुनिक दशमलव पद्धति विश्व को भारतीयों की ही देन है ।।

प्रश्न (ii)
आर्यभट्ट ने पाई के रूप में किसे परिभाषित किया था?
उत्तर:—
आर्यभट्ट ने किसी वृत्त की परिधि और व्यास के अनुपात को पाई के रूप में परिभाषित किया था ।।

प्रश्न 3 .
ऐसा नहीं है कि उल्लेखनीय उपलब्धियाँ केवल हमारे अतीत तक सीमित हैं ।। भारत की आजादी से पहले, हमारे पास विश्व स्तरीय वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, चिकित्सक और लगभग प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े लोग थे ।। हमारे पास एस . एन . बोस, मेघनाद साहा, जे . सी . बोस, सर सी . वी . रमन, सर के . एस . कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई, बी . सी . राय जैसे वैज्ञानिक, रामानुजम जैसे गणितज्ञ; रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि; विवेकानंद जैसे दार्शनिक संत रहे हैं ।। स्वतंत्रता के बाद के काल में भी उतनी ही महान् उपलब्धियाँ देखने को मिली हैं ।। (Page 50)

शब्दार्थ:—

आजादी – स्वतंत्रता ।।
प्रसंग:—
प्रस्तुत गद्यांश डॉ . अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है ।। इस गद्यांश में लेखक अतीत की उपलब्धियों की चर्चा करने के पश्चात् स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व के विद्वानों की चर्चा किया है ।।

व्याख्या:—
लेखक का कहना है कि ऐसा नहीं है कि भारत ने केवल अतीत (प्राचीनकाल) में ही विभिन्न क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की हों, अपितु भारत में स्वतत्रता प्राप्ति से पहले भी विश्व-स्तरीय अर्थात् उच्चकोटि के वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, डॉक्टर और लगभग प्रत्येक क्षेत्र के जुड़े लोग थे ।।

हमारे देश में एस . एन बोस, मेघनाद साहा, जे . सी . बोस, सर सी . वी . रमन, सर के . एस . कृष्णन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई और बी . सी . राय जैसे योग्य वैज्ञानिक, गणित के क्षेत्र में रामानुजम जैसे गणितज्ञ, साहित्य के क्षेत्र में रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान् कवि और आध्यात्मिक संसार में विवेकानंद जैसे संत रहे हैं ।। हमारे देश में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के समय में भी उतनी ही योग्य और उच्चकोटि की महान् प्राप्तियाँ देखने को मिली हैं ।। इस प्रकार हमारे देश ने अतीत में, स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले और बाद में वैज्ञानिक, दार्शनिक, साहित्यिक, इंजीनियरिंग, गणित आदि सभी क्षेत्रों में महान् उपलब्धियाँ अर्जित की हैं ।।

विशेष:—

स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महान् लोगों की गणना करवाई गई है ।।
भाषा सरल, सुबोध खड़ी बोली है ।।
वर्णनात्मक शैली है ।।
गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
आजादी से पहले भारत के पास कौन-सा विश्व स्तर कवि रहा है?
उत्तर:—
आज़ादी से पहले भारत के पास कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसा विश्वस्तरीय कवि रहा है ।।

प्रश्न (ii)
स्वतंत्रता से पहले भारत में कौन-कौन से क्षेत्रों से जुड़े उच्चकोटि के लोग रहे हैं?
उत्तर:—
स्वतत्रता प्राप्ति से पहले भारत में वैज्ञानिक, कवि, दार्शनिक, इंजीनियर, डॉक्टर आदि प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े विश्वस्तरीय लोग रहे हैं ।।

प्रश्न (iii)
लेखक ने गणित के क्षेत्र में किस गणितज्ञ का नाम लिया है?
उत्तर:—
लेखक ने गणित के क्षेत्र में सुप्रसिद्ध गणितज्ञ रामानुजम का नाम लिया है ।।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक ने प्रस्तुत गद्यांश में किस काल की चर्चा की है?
उत्तर:—
लेखक ने प्रस्तुत गद्यांश में स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व काल की चर्चा की है ।।

प्रश्न (ii)
लेखक ने किन वैज्ञानिकों के नाम गिनाए हैं, जिनका स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद महान् उपलब्धियों में योगदान रहा है?
उत्तर:—
होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम सारा भाई, और बी . सी . राय जैसे वैज्ञानिकों की स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भी महान वैज्ञानिक उपलब्धियों में योगदान रहा है ।।

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प्रश्न 4 .
स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपनी पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की ।। इसने महत्त्वपूर्ण उद्योगों की स्थापना और आधारभूत ढाँचे के निर्माण को प्रेरित किया ।। ’70 के दशक में पहले हरित क्रांति के परिणाम देखने को मिले, जिसने भारत को खाद्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया ।। ऑपरेशन फ्लड ने भारत को निश्चित समयावधि में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनाया ।। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में भी काफी विकास देखने को मिला और कई अनुसंधान व विकास और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना हुई, जिनका नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों के योग्य नेता कर रहे थे ।। इसने उच्च प्रौद्योगिकी मिशनों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया ।। (Page 50)

शब्दार्थ:—

पंचवर्षीय – पाँच वर्ष की ।।
निर्माण – बनाने की प्रक्रिया ।।
प्रेरित – प्रेरणा देना ।।
प्रौद्योगिकी – किसी विशेष क्षेत्र या व्यवसाय-संबंधी तकनीक ।।
अनुसंधान – अन्वेषण, जाँच-पड़ताल द्वारा वस्तुस्थिति का पता लगाना ।।
मिशन – लक्ष्य ।।
मजबूत – दृढ़ आधार-नींव ।।
प्रसंग:—
प्रस्तुत गद्यांश डॉ . अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है ।। लेखक स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अर्जित की गई उपलब्धियों का वर्णन किया है ।।

व्याख्या:—
लेखक का कहना है कि भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की ।। उसके बाद भारत ने अपने चहुंमुखी विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू की ।। भारत में स्वतंत्रता के बाद पहली पाँच साल की योजना आरंभ की गई ।। पहली पंचवर्षीय योजना में महत्त्वपूर्ण जनोपयोगी माल या सामान बनाने के लिए कल-कारखानों की स्थापना और उनके विकास के लिए मुख्य नींव के रूप में ढाँचा खड़ा करने के लिए प्रेरित किया गया ।। दूसरे शब्दों में, इस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत देश के औद्योगिक विकास के लिए आधारभूत ढाँचा तैयार किया गया ।।

1970 के दशक (दस वर्षों) में सबसे पहले कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति के परिणाम सामने आए ।। इस हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया ।। इसके बाद ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के अंतर्गत भारत एक निश्चित समय सीमा में विश्व का सबसे बड़ा उत्पादन करने वाला देश बना ।। विज्ञान और तकनीकी में भी इस अवधि में पर्याप्त बड़ा दूध उत्पादन करने वाला देश बना ।। विज्ञान और तकनीकी में भी इस अवधि में इसमें पर्याप्त विकास देखने को मिला उस समय अनुसंधान व विकास के लिए अनेक विज्ञान तथा तकनीकी संस्थानों की स्थापना की गई ।। इन संस्थानों का नेतृत्व विभिन्न क्षेत्रों के योग्य वैज्ञानिक, इंजीनियर आदि कर रहे थे ।। इसने उच्च तकनीक प्राप्त करने के लिए एक सुदृढ़ आधार भी तैयार किया ।।

विशेष:—

लेखक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हरित क्रांति और ऑपरेशन फ्लड की सफलता का उल्लेख किया है, जिससे देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना और दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश बना ।।
भाषा पारिभाषिक शब्दावली से युक्त खड़ी बोली है ।।
वर्णनात्मक शैली है ।।
गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के वाद विकास के लिए क्या तरीका अपनाया है?
उत्तर:—
भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाओं का तरीका अपनाया है ।।

प्रश्न (ii)
लेखक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की किन उपलब्धियों का वर्णन किया है?
उत्तर:—
लेखक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाढ़ की हरित क्रांति और ऑपरेशन फ्लड का वर्णन किया है ।। सन् 1970 के पहले दशक में हरित क्रांति हुई, जिसके कारण देश खाद्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना ।। ऑपरेशन फ्लड के अंतर्गत भारत एक निश्चित समय में विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना ।।

प्रश्न (iii)
भारत ने वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक क्षेत्र में क्या प्रगति की है?
उत्तर:—
भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिक के क्षेत्र में काफी प्रगति की है ।। यहाँ • कई अनुसंधान व विकास और विज्ञान प्रौद्योगिकी संस्थाओं की स्थापना हुई है ।। इससे उच्च प्रौद्योगिकी लक्ष्यों की प्राप्ति का आधार तैयार हुआ ।।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत गद्यांश में किन उपलब्धियों का वर्णन किया गया है?
उत्तर:—
प्रस्तुत गद्यांश में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की उपलब्धियों का वर्णन किया गया है ।।

प्रश्न (ii)
कृषि के क्षेत्र में कौन-सी क्रांति हुई? उसका क्या लाभ हुआ?
उत्तर:—
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति हुई ।। इस क्रांति के कारण देश खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना ।।

प्रश्न 5 .
भारत के उपग्रह तथा उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों द्वारा रखे गए ठोस आधार ने देश को किसी प्रकार का उपग्रह डिजाइन तथा विकसित करने और उसे अपनी ही धरती से अपने प्रक्षेपण यानों द्वारा कक्षा में प्रक्षेपित करने की क्षमता प्रदान की है ।। पी . एस . एल . वी . सी-5 की सातवीं सफल उड़ान ने, जिसमें रिसोर्स सेट-1 को सन सिंक्रोनस ऑरबिट में स्थापित किया गया, ने स्वदेशी योग्यता में भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया है ।। इसी प्रकार, भारत किसी भी प्रकार की मिसाइल या मुखाग्र को डिजाइन करने, विकसित करने तथा उत्पादित करने में सक्षम है ।। भारतीय सेना में ‘पृथ्वी’ तथा ‘अग्नि’ को शामिल किया जाना इस स्वदेशी क्षमता का प्रमाण है ।। परमाणु ऊर्जा उत्पत्ति तथा अस्त्र विकास में हमारी उपलब्धियाँ विकसित विश्व के मुकाबले की हैं ।। (Page 50)

शब्दार्थ:—

उपग्रह – कृत्रिम ग्रह, अंतरिक्ष में राकेट द्वारा भेजे गए कृत्रिम ग्रह ।।
प्रक्षेपण – दूर फेंकना ।।
ठोस – सुदृढ़ ।।
आधार – नींव ।।
डिजाइन – रूपांकन, आकृति ।।
क्षमता – शक्ति, योग्यता ।।
स्वदेशी – अपने देश में विकसित ।।
प्रदर्शित – दिखाना ।।
मुखाग्र – मुख का अगला भाग ।।
प्रसंग:—
प्रस्तुत गद्यांश डॉ . अब्दुल कलाम द्वारा रचित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है ।। लेखक भारत की आंतरिक तथा रक्षा के क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों का वर्णन किया है ।।

व्याख्या:—
भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आशातीत उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं ।। भारत के उपग्रह तथा उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों के द्वारा रखी गई सुदृढ़ नींव ने देश को किसी भी तरह के उपग्रह (कृत्रिम ग्रह) को आकार देने तथा उसे विकसित करने और अपने ही प्रक्षेपण यानों द्वारा अंतरिक्ष की किसी भी कक्षा में स्थापित करने अथवा फेंकने की योग्यता से संपन्न किया ।। भारत उपग्रह बनाने तथा उन्हें अपने प्रक्षेपण यानों के द्वारा अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है ।। पी . एस . एल . वी . सी-5 की सातवीं सफल उड़ान के द्वारा रिसोर्स सेट-1 को सन सिंक्रोनस ऑर बिट में स्थापित किया गया ।।

इसके द्वारा भारत ने अपनी स्वदेशी योग्यता तथा क्षमता को प्रदर्शित किया है ।। इसी प्रकार रक्षा-अनुसंधान के क्षेत्र में भारत किसी भी तरह की मिसाइल अथवा उसके अग्रभाग को डिजाइन करने, उसे विकसित करने के साथ ही साथ उसका उत्पादन करने में भी सक्षम है ।। भाव यह कि भारत किसी भी प्रकार की मिसाइल बनाने और उसका उत्पादन करने में सक्षम है ।। भारतीय सेना में सम्मिलित की गई पृथ्वी और अग्नि नामक मिसाइलें इस स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्षमता का जीवंत उदाहरण है ।। परमाणु ऊर्जा तथा परमाणु अस्त्र विकसित करने की भारतीय प्राप्तियाँ विकसित विश्व के स्तर की हैं ।। दूसरे शब्दों में भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण, मिसाइल निर्माण और परमाणु अस्त्र निर्माण की जो स्वदेशी तकनीक विकसित की है, वह विकसित राष्ट्रों की तकनीक के स्तर की है ।।

विशेष:—

लेखक ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत की आधुनिक उपलब्धियों से परिचित कराया है ।।
भाषा पारिभाषिक शब्दावली से युक्त खड़ी बोली है ।।
वर्णनात्मक शैली है ।।
गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत ने उपग्रह तथा उपग्रह प्रक्षेपण में कौन-सी क्षमता प्राप्त की है?
उत्तर:—
भारत ने उपग्रह के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का उपग्रह डिजाइन करने और उसे विकसित करने की स्वदेशी तकनीक विकसित की है ।। वह हर प्रकार के उपग्रह बनाने में समर्थ है ।। भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में भी आशातीत क्षमता प्राप्त की है ।। वह प्रक्षेपण यान बनाने और उनसे अपनी ही धरती से उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है ।।

प्रश्न (ii)
भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में अपनी स्वदेशी योग्यता कैसे प्रमाणित की है?
उत्तर:—
भारत ने पी . एस . एल . वी . , सी-5 प्रक्षेपण यान की सातवीं सफल उड़ान के द्वारा रिसोर्स सेट-1 को सन सिंक्रोनस ऑरबिट में स्थापित कर अपनी प्रक्षेपण की स्वदेशी योग्यता और क्षमता को प्रमाणित किया है ।।

प्रश्न (iii)
भारत की मिसाइल निर्माण की क्षमता का उल्लेख कीजिए ।।
उत्तर:—
भारत ने मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में पर्याप्त प्रगति की है ।। वह किसी भी प्रकार की मिसाइल अथवा उसका मुखाग्र डिजाइन करने, विकसित करने और उत्पादित करने की क्षमता रखता है ।।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
मिसाइल के क्षेत्र में भारत की स्वदेश क्षमता का प्रमाण क्या है?
उत्तर:—
भारतीय सेना में भारत द्वारा निर्मित ‘पृथ्वी’ और ‘अग्नि’ मिसाइलों का सम्मिलित किया जाना ही मिसाइल के क्षेत्र में उसकी स्वदेशी क्षमता का प्रमाण है ।।

प्रश्न (ii)
भारत की कौन-सी उपलब्धियाँ विश्वस्तर की हैं?
उत्तर:—
भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता तथा परमाणु अस्त्र निर्माण की क्षमता विकसित विश्व के स्तर की हैं ।।

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प्रश्न 6 .
भारत के पास कुछ ऐसी संपदाएँ तथा लाभ हैं, जिनके बारे में विश्व के कुछ देश गर्व से दावा कर सकते हैं ।। हमें अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान योगदानों तथा अपने भविष्य की रूपरेखा बनाने के लिए प्राप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को पहचानना चाहिए ।। विश्व एक बौद्धिक समाज में परिवर्तित हो रहा है, जहाँ समन्वित ज्ञानशक्ति तथा धन का स्रोत होगा ।। यही समय है, जब भारत खुद को एक बौद्धिक शक्ति में बदलने और फिर अगले दो दशकों के भीतर एक विकसित देश बनने के लिए इस अवसर का लाभ उठा सकता है ।। इस रूपांतरण के लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतिस्पर्धात्मकता के मामले में कहाँ हैं, जो एक बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर होने के लिए वास्तविक इंजन है ।। (Page 51) (M . P . 2009)

शब्दार्थ:—

संपदाएँ – संपत्तियाँ, कोश, खजाना ।।
गर्व – घमंड, अभिमान ।।
दावा – किसी वस्तु को अपनी बताने का अधिकार प्रतिस्पर्धात्मक-होड़, प्रतियोगिता ।।
समन्वित – संतुलित ।।
रूपांतरण – रूप में परिवर्तन ।।
प्रसंग:—
प्रस्तुत गद्यांश डॉ . अब्दुल कलाम द्वारा लिखित लेख ‘मेरे सपनों का भारत’ से लिया गया है ।। लेखक कहता है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनने के लिए स्वयं को एक बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदलने की आवश्यकता है ।। इसके लिए उसे तरीकों और उपायों को जानना होगा ।।

व्याख्या:—
लेखक का मत है कि भारत के पास कुछ ऐसी खनिज संपदाएँ और प्राकृतिक लाभ हैं, जिनके संबंध में संसार के कुछ देश अभिमान के साथ अधिकार जता सकते हैं ।। दूसरे शब्दों में भारत खनिज संपदाओं से संपन्न देश है और इससे वह लाभ उठा सकता है ।। इन संपदाओं के होने का दावा वह गर्व के साथ कर सकता है ।। लेखक का मत है कि हमें अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान के विविध क्षेत्रों में योगदान तथा भविष्य की योजना बनाने के लिए प्राप्त उपलब्धियों के प्रतियोगितात्मक लाभ को पहचानकर लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए ।। वर्तमान में विश्व बौद्धिक समाज में बदल रहा है, जहाँ संतुलित ज्ञान शक्ति तथा धन का स्रोत होगा ।।

आज संसार बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदल रहा है ।। धन का स्रोत वहीं होगा, जहाँ बौद्धिक ज्ञान का संतुलित रूप से उपयोग किया जाएगा ।। इसलिए भारत जैसे विकासशील देश के लिए स्वयं का एक बौद्धिक समाज के रूप में विकसित होना है, तो उसे एक बौद्धिक अर्थ-व्यवस्था में बदलना होगा ।। अतः भारत को स्वयं को एक बौद्धिक शक्ति में बदलने और फिर आगामी बीस वर्षों में एक विकसित देश बनने के अवसर का लाभ उठाना चाहिए ।।

किंतु स्वयं को विकसित देश में परिवर्तित करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि हम प्रतियोगितात्मक के दृष्टिकोण से कहाँ हैं? इसके लिए हमें बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदलने के तरीकों और उपायों की जाँच-पड़ताल करनी पड़ेगी ।। उसी के आधार पर हम एक बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और विकसित देशों में सम्मिलित हो सकते हैं ।।

विशेष:—

लेखक ने भारत के विकसित देश बनने की रूपरेखा प्रस्तुत की है ।।
भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है ।।
विचारत्मक तार्किक शैली है ।।
गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए क्या किया जाना आवश्यक है?
उत्तर:—
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए स्वयं को एक द्धिक अर्थव्यवस्था में बदलना आवश्यक है ।। इसके लिए उसे तरीकों और उपायों को जानना आवश्यक है ।।

प्रश्न (ii)
लेखक के अनुसार हमें कौन-सा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए?
उत्तर:—
लेखक के अनुसार हमें अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान के विविध क्षेत्रों में योगदान और भविष्य की योजना बनाने के लिए प्राप्त उपलब्धियों के प्रतियोगितात्मक लाभ को पहचानकर अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए ।।

गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
विश्व किस प्रकार की अर्थव्यवस्था में बदल रहा है?
उत्तर:—
विश्व आज बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदल रहा है ।।

प्रश्न (ii)
हम किस आधार पर बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं?
उत्तर:—
हम बौद्धिक अर्थव्यवस्था में बदलने के तरीकों और उपायों की जाँच-पड़ताल के आधार पर ही एक बौद्धिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते है ।।

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MP Board Results 2022 : म. प्र. बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 20 अप्रैल को जारी होने की संभावना, परीक्षा में पूछे गलत सवालों के मिलेंगे बोनस अंक i


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