Up Board Class 10 Hindi Full Solution Chapter 9 Sanskrit Khand जीवन सूत्राणि

Up Board Class 10 Hindi Full Solution Chapter 9 Sanskrit Khand
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पाठ-9 जीवन सूत्राणि लघु उत्तरीय प्रश्न


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए
(1) पिता कस्मात् उच्चतरः अस्ति ?
पिता खात् उच्चतरः अस्ति |
(2) तृणात् बहुतरं किम् अस्ति ?
तृणात् बहुतरं चिंता अस्ति |
(3) प्रवसतो किं मित्रम् अस्ति ?
प्रवसतो मित्रम् धनं अस्ति |


(4) भिषक: कस्य मित्रम् अस्ति ?
भिषक: आतुस्य मित्रम् अस्ति |
(5) सुखानां किमुत्तमं स्यात् ?
सुखानां तुष्टिरुत्तमा स्यात् |
(6) नरः किम् हित्वा न शोचति?
नरः क्रोधं हित्वा न शोचति ।
(7) मनुष्यः किम् नु हित्वा सुखी भवेत् ?
मनुष्यः लोभं हित्वा सुखी भवेत् |
(8) भूमेः गुरुतरा किम् अस्ति ?
भूमेः गुरुतरा माता अस्ति |
(9) सर्वेषु उत्तमं धनं किम् अस्ति ?
सर्वेषु उत्तमं धनं श्रुतम् अस्ति |

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(10) गृहे सतः मित्रम् किम् अस्ति ?
गृहे सतः मित्रम् भार्या अस्ति |
(11) वातात् शीघ्रतरं किम् अस्ति ?
वातात् शीघ्रतरं मन: अस्ति
(12) लाभानाम् उत्तमं किम् अस्ति ?
लाभानाम् उत्तमं आरोग्यम् अस्ति |
(13) मरिष्यतः मित्रं किम् अस्ति ?
मरिष्यतः मित्रं दानम् अस्ति |

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(14) दानं कस्य मित्रं भवति ?
दानं मरिष्यतः मित्रं भवति |
(15) आतुरस्य मित्रं किम् अस्ति ?
आतुरस्य मित्रं भिषकम् अस्ति |

(16) खात उच्चतरं किम् अस्ति ?
खात उच्चतरं पिता अस्ति |

अनुवादात्मक प्रश्न

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1-निम्नलिखित श्लोकों का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए
(क) किंस्विद गुरुतरं …………….’ बहुतरं तृणात्?
(ख) माता गुरुतरा ………………… बहुतरी तृणात्।
सन्दर्भ –

अनुवाद – भूमि से अधिक भारी क्या है आकाश से अधिक ऊंचा स्थान किसका है वायु से तेज चलने वाला क्या है और तिनके से बढ़कर क्या है
माता भूमि से अधिक भारी है पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा है मन वायु से तेज चलने वाला है चिंता तिनके बढकर है |

(ग) किंस्वित् प्रवसतो……………………. मरिष्यतः।
(घ) सार्थः प्रवसतो…………………. मित्रं मरिष्यतः।

अनुवाद – परदेश में रहने वाले का मित्र कौन हैं घर में रहने वाले का मित्र कौन हैं रोगी का मित्र कौन है और मरने वाले का मित्र कौन हैं
परदेश में रहने वाले का मित्र सार्थ अर्थात धन होता है घर में रहने वाले का मित्र स्वयं की पत्नी होती है रोगी का मित्र वैध होता है मरने वाले का मित्र दान होता है ||
(ङ) किंस्विदेकपदं……………………………..सुखम्।

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अनुवाद – एक पद वाला धर्म क्या है एक पद वाला यश क्या है एक पद वाला स्वर्ग दिलाने योग्य क्या है और एक पद वाला सुख क्या है
(च) दाक्ष्यमेकपदं………………………………….सुखम्।
अनुवाद – एक पद वाला धर्म दाक्षता है एक पद वाला दान यश है,एक पद वाला स्वर्ग दिलाने योग्य सत्य है और एक पद वाला सुख सदाचार है
(छ) धान्यानामुत्तमं किंस्विद् …………… किमुत्तमम्?
अनुवाद – अन्नों में उत्तम क्या है धनों में उत्तम क्या है लाभों में उत्तम क्या है और सुखों में उत्तम क्या है|


(ज) धान्यानामुत्तमं दाक्ष्यं………. सुखानां तुष्टिरुत्तमा।
अनुवाद– अन्नों में उत्तम दक्षता है धनों में उत्तम शास्त्र ज्ञान है लाभों में उत्तम आरोग्यता है और सुखों में उत्तम संतोष है |
(झ) किं नु हित्वा…………………. सुखी भवेत्।
अनुवाद = क्या छोड़कर मनुष्य प्रिय हो जाता है क्या छोड़कर शौक नहीं करता है क्या छोड़कर धनवान हो जाता है और क्या छोड़ करके सुखी हो जाता है
(ञ) मानं हित्वा……………………… सुखी भवेत्।
अनुवाद – मनुष्य अभिमान को छोड़कर प्रिय हो जाता है मनुष्य कोध को छोड़कर शोक नहीं करता है, कामना(इच्छा) को छोड़कर धनवान हो जाता है और लोभ को छोड़कर सुखी हो जाता है |

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  1. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए

(क) मरनेवाले के साथ दान ही जाता है।
मरिष्यत: सह दानम एव |


(ख) विद्या सब धनों में प्रधान है।
विद्या धनं सर्वेषु धनेषु प्रधानं अस्ति |


(ग) इच्छारहित व्यक्ति ही धनी होता है।
इच्छारहित व्यक्ति एव धनवान भवति |


(घ) मनुष्य को निर्लोभी होना चाहिए।
मनुष्यं निर्लोभी भवेत् |


(ङ) जन्मभूमि स्वर्ग से भी बड़ी है।
जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसे |


(च) विदेश में धन मित्र होता है।
विदेशेषु धनं मित्रं भवति |


(छ) घर में पत्नी ही मित्र होती है।
गृहे भार्या एव मित्रं भवति |

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व्याकरणात्मक प्रश्न
(1) खात्, प्रवसतः, गृहे, दाक्ष्यम्, यशः में विभक्ति व वचन बताइए।
खात् = पंचमी बिभक्ति एक बचन
प्रवसतः = प्रथमा बिभक्ति एक बचन
गृहे = सप्तमी बिभक्ति एक बचन
दाक्ष्यम् = द्वितीया बिभक्ति एक बचन
यशः == प्रथम बिभक्ति एक बचन


(2) “हित्वा’ और ‘हत्वा’ का अर्थ बतायें तथा प्रयुक्त प्रत्यय का उल्लेख करें।
हित्वा = छोड़कर
हत्वा = मारकर
(3) सन्धि-विच्छेद कीजिये—किमुत्तमम्, धनानामुत्तमम्, हित्वार्थवान्।
किमुत्तमम् = किम्+उत्तमम्
धनानामुत्तमम् = धनानाम् +उत्तमम्
हित्वार्थवान् = हित्वा + अर्थवान्

पर्यायवाची शब्द
खः – आकाश, गगन ।
वातः – वायुः, अनिलः, पवनः ।
शीलम् – आचरणं ।
कामं – इच्छा, वासना ।

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