वसुधैव कुटुम्बकम् पर संस्कृत निबंध || Essay on Vasudhaiva Kutumbakam in Sanskrit language

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वसुधैव कुटुम्बकम् पर संस्कृत निबंध || Essay on Vasudhaiva Kutumbakam in Sanskrit language

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वसुधैव कुटुम्बकम् पर संस्कृत निबंध

वसुधैव कुटुम्बकम् पर संस्कृत निबंध || Essay on Vasudhaiva Kutumbakam in Sanskrit language

Vasudhaiva Kutumbakam Essay In Hindi: आज विश्व को ग्लोवल विलेज कहा जाने लगा है क्योंकि दूरियाँ मिट रही है। वसुधैव कुटुम्बकम का तात्पर्य है कि पूरा विश्व एक परिवार है। हम यहां पर वसुधैव कुटुम्बकम पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में

वसुधैव कुटुम्बकम् पर निबंध [वसुधैव कुटुम्बकम्]

1- विश्वस्य स्रष्टा ईश्वरः एकः एव अस्ति ।

2- सर्वे प्राणिनः च तस्य तनयाः सन्ति ।

3- अतः विश्वस्य सर्वेषु भागेषु स्थितीः जनाः रूप-वर्ण-भाषा-संस्कृति भेदान् धारयन्तः अपि अभिन्नाः एव ।

4- यतोहि सर्वेषां मूलप्रवृत्तयः समाना: एव; यथा-एकः जनः सम्माने सुखम् अपमाने च दुःखम् अनुभवति तथैव अन्येऽपि ।

5- अतः श्रेष्ठः जनः सः एव यः सर्वेषु प्राणिषु समानं व्यवहारं करोति, सर्वेषु स्निह्यति न कमपि पीडयति ।

6- अद्य तु विज्ञानस्य प्रभावेण देशकालयोः अन्तरं प्रायः समाप्ति गतम्।

7- भारत स्थितः जनः विदेशेषु स्थितानां जनानां समाचार प्रतिदिनं प्राप्नोति दूरभाषेण च वार्ती करोति ।

8- दूरदर्शनेन तु सर्व विश्वं करतलस्थितमेव जातम्।

9- एतस्य सहयोगेन कुत्रचिदपि घटितां घटनां क्षणादेव वयं ज्ञातुं समर्थाः भवामः।

10- अत: उपर्युक्तस्थितौ विश्वबन्धुत्वस्य भावनायाः महती आवश्यकता अस्ति ।

11- अत: महर्षिभिः उक्तम्- उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।

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