MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 हिमालय और हम

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 हिमालय और हम (कविता, गोपाल सिंह ‘नेपाली’)


हिमालय और हम पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न
हिमालय और हम लघु उत्तरीय प्रश्न

हिमालय और हम कविता का प्रश्न उत्तर MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 1 .
हिमालय को धरती का ताज क्यों कहा है?
उत्तर:
क्योंकि हिमालय की संसार में सबसे ऊँची चोटी है ।। उसकी चोटी धरती पर ताज की तरह सुशोभित है ।।

Himalaya Aur Hum Question Answer MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 2 .
कवि ने गंगाजल की क्या विशेषता बताई है?
उत्तर:
गंगाजल बचपन की भाँति पवित्र और निर्मल है ।।

हिमालय और हम कविता का सारांश MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 3 .
“इसका पद-सल छूनेवाला वेदों की गाथा गाता है” इस पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
आशय-हिमालय पर्वत की तलहटी में वेदों की ऋचाएँ रची गईं और उच्चरित हुईं ।।

हिमालय और हम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Himalaya Aur Hum Question Answers MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 1 .
कवि ने हिमालय से हमारे कई संबंध बताए हैं, उनमें से किन्हीं तीन का उल्लेख कीजिए ।।
उत्तर:

हिमालय पर्वत पर जिस प्रकार प्रभात और संध्या की लालिमा समान होती, दूसरे शब्दों में, हिमालय का सौंदर्य दोनों समय एक समान होता है, उसी प्रकार भारतीय सुख-दुख हो समान भाव से ग्रहण करते हैं ।।
हिमालय पर्वत की भाँसि भारतवासी भी अटल, अडिग और अविचल हैं ।।
हिमालय तूफानों से लड़ने में समर्थ है, तो लड़ने की यह शक्ति प्रत्येक भारतीय के पास है ।।

Himalaya Aur Hum Poem Question Answer MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 2 .
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए –
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गाँधी
तलवारों-सी टूटी आँधी ।।
उत्तर:
जब भी किसी शासन-व्यवस्था ने भारत की जनता पर अन्याय और अत्याचार कर उसे संकट में डाला और उसे दुःख दिए, तब-तब ही जनता की विपत्तियों को दूर करने के लिए और दुःखों से मुक्ति दिलाने के लिए लाखों सत्याग्रही घर-बार की चिंता छोड़कर निकल पड़े ।।

हिमालय और हम भाव-पल्लवन

Himalaya Aur Hum Summary MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 1 .
निम्नलिखित पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए”है अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी” ।। (M .P . 2010)
उत्तर:
जिस प्रकार पृथ्वी पर हिमालय पर्वत अमर है, उसी प्रकार भारत में रहने वाले भारतीय भी अमर हैं, शाश्वत हैं ।। हिमालय पर्वत कभी नष्ट होने वाला नहीं है, इस तरह भारतीयों का भी कभी नाश नहीं हो सकता ।। जब तक हिमालय पर्वत का अस्तित्व है, तब तक भारतीयों का भी अस्तित्व बना रहेगा ।।

हिमालय और हम भाषा-अनुशीलन

Himalaya Aur Hum Poem Summary In Hindi MP Board Class 12th

प्रश्न 1 .
‘बच्चा’ मूल शब्द में ‘पन’ प्रत्यय लगाकर ‘बचपन’ शब्द बना है ।। इसी प्रकार ‘पन’ प्रत्यय लगाकर तीन शब्द बनाइए –
उत्तर:
हिमालय और हम कविता का प्रश्न उत्तर MP Board Class 12th Hindi

Himalaya Aur Hum Ka Bhavarth MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 2 .
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग छाँटकर लिखिए –
परदेश, संदेश, अविनाशी, अविचल, प्रभात ।।
उत्तर:
पर, सम्, अ, अ, प्र ।।

Himalaya Aur Hum Kavita MP Board Class 12th Hindi

प्रश्न 3 .
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –
पर्वत, सागर, बांदल, पानी ।।
उत्तर:

पर्वत – पहाड़, भूधर ।।
सागर – समुद्र, जलधि ।।
बादल – मेघ, नीरद ।।
पानी – जल, नीर ।।


हिमालय और हम योग्यता-विस्तार

Himalay Aur Hum MP Board Class 12th Hindi प्रश्न 1 .
हिमालय के संदर्भ में अन्य जानकारी एकत्रित कीजिए ।।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें ।।

प्रश्न 2 .
गोपालसिंह नेपाली की अन्य रचनाएँ खोजकर पढ़िए ।।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें ।।

प्रश्न 3 .
हिमालय और भारतवासियों के गौरव गाथा से संबंधित अन्य कवियों की ओजस्वी कविताओं का संकलन कीजिए ।।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें ।।

प्रश्न 4 .
आप अपने गाँव/शहर अथवा जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जानकारी एकत्रित कीजिए तथा सूचीबद्ध कीजिए ।।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें ।।

हिमालय और हम परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
I . वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1 .
‘हिमालय और हम’ कविता के कवि हैं – (M .P .2009; 2010)
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) माखन लाल चतुर्वेदी
उत्तर:
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’ ।।

प्रश्न 2 .
‘पर्वतराज’ किसे बताया गया है? (M .P . 2012)
(क) हिमालय पर्वत को
(ख) अरावली पर्वत को
(ग) आबू पर्वत को
(घ) विंध्याचल पर्वत को
उत्तर:
(क) हिमालय पर्वत को ।।

प्रश्न 3 .
‘इस धरती का हर लाल खुशी से उदय-अस्त अपनाता है’ इस पंक्ति में उदय-अस्त का अर्थ है –
(क) दुखों का आना-जाना
(ख) खुशियों का आना-जाना
(ग) धन का आना-जाना
(घ) मित्रों का आना-जाना
उत्तर:
(ख) खुशियों का आना-जाना ।।

प्रश्न 4 .
‘हिमालय और हम’ कविता में कवि की भावना व्यक्त हुई है –
(क) राष्ट्रीय चेतना
(ख) सामाजिक चेतना
(ग) आर्थिक चेतना
(घ) सांस्कृतिक चेतना
उत्तर:
(क) राष्ट्रीय चेतना ।।

प्रश्न 5 .
हिमालय पर्वत को पर्वतराज कहने का कारण है –
(क) यह विश्व का सबसे नया पर्वत है ।।
(ख) यह विश्व का सबसे विशाल पर्वत है ।।
(ग) यह विश्व का सबसे ऊंचीपर्वत है ।।
(घ) यह विश्व का सबसे सुंदर पर्वत है ।।
उत्तर:
(ग) यह विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत है ।।

प्रश्न 6 .
‘हिमालय और हम’ कविता के कवि हैं – (M .P . 2009)
(क) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
उत्तर:
(ख) गोपालसिंह ‘नेपाली’ ।।

II . निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर कीजिए –

गोपालसिंह ‘नेपाली’ …… . . कवि हैं ।। (राष्ट्रीय/आंचलिक)
गोपालसिंह ‘नेपाली’ ……… . युग के हैं ।। (द्विवेदी/छायावाद)
‘हिमालय और हम’ कविता में हिमालय का ……… . किया गया है ।। (मूर्तिकरण/मानवीकरण)
हिमालय के आँगन में ……… . की परम्परा ने जन्म लिया था ।। (ज्ञान/धर्म)
हिमालय ……… है ।। (दीर्घजीवी/मृत्युंजयी)
उत्तर:

राष्ट्रीय
छायावाद
मानवीकरण
ज्ञान
मृत्युंजयी ।।

III . निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

‘हिमालय का पदतल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है ।।
हिमालय भारतीयों की तपस्या भूमि और आध्यात्मिक केन्द्र है ।।
हिमालय के आँगन में धर्म की परम्परा ने जन्म लिया ।।
हिमालय की तलहटी में ही वेदों की ऋचाएँ गूंजी ।।
हिमालय भारत का ही ताज है ।।
उत्तर:

सत्य
असत्य
असत्य
सत्य
असत्य ।।
IV . निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1 .
Himalaya Aur Hum Question Answer MP Board Class 12th Hindi
उत्तर:

(i) (ग)
(ii) (घ)
(iii) (ङ)
(iv) (ख)
(v) (क) ।।

V . निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1 .
हिमालय की प्राकृतिक छटा की क्या विशेषता है?
उत्तर:
हिमालय की प्राकृतिक छटा भारत के बाहरी और आंतरिक सौन्दर्य को व्यक्त करने में समर्थ है ।।

प्रश्न 2 .
भारतीय चिंतन की क्या विशेषता है?
उत्तर:
“भारतीय चिंतन में सुख और दुख धोनों ही समान भाव से ग्रहण किया जाता है ।।

प्रश्न 3 .
हिमालय के पद-तल छूने वाला क्या करता है?
उत्तर:
हिमालय के पद-तल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है ।।

प्रश्न 4 .
हिमालय से किसकी तुलना की गयी?
उत्तर:
हिमालय से भारतीयों की तुलना की गयी है ।।

प्रश्न 5 .
हिमालय से बादल टकराकर क्या करते हैं?
उत्तर:
हिमालय से बादल टकराकर पानी बरसाते हैं ।।

हिमालय और हम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 .
हिमालय की तीन विशेषताएँ लिखिए ।।
उत्तर:
हिमालय अटल, अडिग और अविचल है ।।

प्रश्न 2 .
हिमालय पर्वत से कौन-सी पवित्र नदी निकलती है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत से पवित्र गंगा नदी निकलती है ।।

प्रश्न 3 .
टकराते हैं बादल इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं इस पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
बादल हिमालय पर्वत से टकराकर भारत में वर्षा करते हैं ।।

प्रश्न 4 .
‘हिमालय और हम’ कविता में ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर:
‘हम’ शब्द भारतवासियों के लिए प्रयुक्त हुआ है ।।

प्रश्न 5 .
भारत की मनीषा कहाँ प्रसारित हुई?
उत्तर:
भारत की मनीषा हिमालय की छाया में प्रसारित हुई ।।

प्रश्न 6 .
हिमालय अविनाशी क्यों है?
उत्तर:
हिमालय अविनाशी है; क्योंकि वह तूफानों से लड़ते अपना अस्तित्व बनाए हुए है ।।

प्रश्न 7 .
हिमालय के माध्यम से किसको प्रकट किया गया है?
उत्तर:
हिमालय के माध्यम से भारतीय जीवनी शक्ति को प्रकट किया गया है ।।

हिमालय और हम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 .
‘इसका पदतल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है ।।’ इस पंक्ति से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
हिमालय ऋषि-मुनियों की तपस्या भूमि और अध्यात्म का केंद्र है ।। हिमालय के आँगन में ही ज्ञान की परंपरा ने जन्म लिया और वेदों की ऋचाएँ तलहटी में हीगूंजी ।।

प्रश्न 2 .
हिमालय की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।। (M .P . 2012)
उत्तर:

हिमालय पर्वत पर्वतों का राजा है; क्योंकि हिमालय संसार भर में सबसे ऊँचा पर्वत है ।।
हिमालय पर सूर्योदय और सूर्यास्त का प्राकृतिक सौंदर्य एक समान होता है ।।
यह अटल, अडिग, अविचल है ।।
यह बादलों को रोककर भारत में वर्षा करता है ।।
प्रश्न 3 .
हिमालय पर सुबह-शाम का क्या प्रभाव पाता है?
उत्तर:
हिमालय पर सुबह-शाम का आकर्षक प्रभाव पड़ता है ।। सुबह-सुबह सूर्य की किरणें जब हिमालय पर पड़ती हैं, तो वे इसे छुकर और चूमकर और अधिक सुन्दर हो जाती हैं ।। इसी प्रकार जब शाम को सूर्य की किरणें हिमालय पर पड़ती हैं, तो वे झोंका खाते हुए बिखर जाती हैं ।।

प्रश्न 4 .
गंगाजल की क्या विशेषता है?
उत्तर:
गंगाजल की बहुत बड़ी विशेषता है कि वह बहुत ही पवित्र है ।। उसको पीने वाला दुख में भी मुस्कराता रहता है ।। यही नहीं इसे पीने वाला तो हर प्रकार के दुखों को हँसते-हँसते सहन कर जाता है ।।

हिमालय और हम कवि-परिचय

प्रश्न 1 .
गोपालसिंह ‘नेपाली’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
गोपालसिंह ‘नेपाली का जन्म सैन् 1902 ई० में हआ ।। उन्होंने एक पत्रकार के रूप में जीवन प्रारंभ किया ।। उन्होंने मालवा से प्रकाशित होने वाले ‘रतलाम टाइम्स’, दिल्ली से प्रकाशित ‘चित्रपट’, लखनऊ से प्रकाशित होने वाली ‘सुधा’ और पटना से प्रकाशित होने वाली साप्ताहिक पत्रिका ‘योगी’ के संपादन विभाग में कार्य किया ।। सन् 1929 में आपने साहित्य काव्य-जगत् में प्रवेश किया ।।

आपके काव्य स्वर राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत हैं और संस्कृति के प्रति गौरव-भाव हैं ।। आप मानवता को स्वर देने वाले कवि हैं ।। प्रकृति और मानवीय अनुभूतियों का अंतःसंबंध आपके गीतों में लोकचेतना का संस्पर्श पाकर सहज हो गया है ।। राष्ट्रीय भावों के जागरण में उनके काव्य का महत्त्वपूर्ण योगदान है ।। सन् 1963 में आपका देहांत हो गया ।।

साहित्यिक विशेषताएँ:
‘नेपाली’ जी राष्ट्रीय भावना और भारतीय संस्कृति के कवि हैं ।। उनकी राष्ट्रीय भावपरक रचनाएँ उनकी अद्वितीय प्रतिभा की परिचायक हैं ।। अनुभूति की सहजतम अभिव्यक्ति इनके गीतों की अन्यतम विशेषता है ।। उन्होंने फिल्मों के गीत भी लिखे हैं और फिल्मी गीतकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की ।।

रचनाएँ:
काव्य-संग्रह-पंछी, रागिनी, टुकही विद्रोही, नीलिमा आदि आपके प्रभावी काव्य-संग्रह हैं ।।

भाषा-शैली:
इनकी भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है ।। इनकी काव्य-शैली गीत-शैली है ।। इनके गीतों में लय, संगीतमय छंद, सहज कोमल प्रतीक एवं सुकुमार, भाव भंगिमा इनके काव्य को वैशिष्ट्य प्रदान करता है ।। आंतरिक भावोन्मेप, कल्पना प्रवणता और सांस्कृतिक भावों के रचनाकार के रूप आप सदैव स्मरणीय रहेंगे ।।

हिमालय और हम पाठ का सारांश

प्रश्न 1 .
‘हिमालय और हम’ कविता का सार लिखिए ।।
उत्तर:
‘हिमालय और हम’ कविता के रचयिता गोपालसिंह ‘नेपाली’ हैं ।। इस कविता में उन्होंने हिमालय के साथ भारतीयों के संबंधों को स्वर दिया है ।। भारतीय अस्मिता का प्रतीक हिमालय भारत के गौरव का चिह्न है ।। हिमालय पर्वत इस पृथ्वी पर सबसे ऊँचा पर्वत है ।। यह धरती का ताज है ।। यह भारतीयों के स्वाभिमान का प्रतीक है ।। यह जितना उच्च स्वाभिमान का परिचायक है, उतना ही सांस्कृतिक चेतना का भी है ।।

हिमालय की प्राकृतिक छटा भारत के बाह्य व आंतरिक सौंदर्य को व्यक्त करने में भी समर्थ है ।। प्रभात और संध्या की लालिमा हिमालय के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ भारतीय चिंतन के उस पक्ष को भी व्यक्त करती है, जिसमें सुख-दुख को समान भाव से ग्रहण किया जाता है ।।

हिमालय के आँगन में ही सबसे पहले बान का उदय हुआ और यहीं वेदों की ऋचाएँ गूंजी ।। भारत की मनीषा हिमालय की छाया में प्रसारित होती है ।। हिमालय की अडिगता और हिमालय का निश्चय ही प्रत्येक भारतवासी के स्वभाव में निहित है इसलिए, वह मृत्युंजयी है ।। हिमालय तूफानों से लड़ने में समर्थ है ।। यह कविता हिमालय के माध्यम से भारतीय जीवन-शक्ति को प्रकट करती है ।।

हिमालय और हम संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1 .
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है
इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धुरती का ताज यही
पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही
अंबर में सर, पाताल चरन
मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन-वरन मुख निरावरन
इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है ।।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है ।। (Pages 53-54)

शब्दार्थ:

गिरिराज – पर्वतों का राजा हिमालय ।।
नाता – रिश्ता, संबंध ।।
संकल – समस्त, सारे ।।
धरती – पृथ्वी ।।
ताज – मुकुट ।।
अंबर – आकाश ।।
मस्तक – सर, माथा ।।
प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यखण्ड गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है ।। कवि ने इस कविता में हिमालय और भारतवासियों की समान विशेषताओं पर प्रकाश डाला है ।। इस काव्यखण्ड में पर्वतराज हिमालय और भारतवासियों के अटूट संबंधों की अभिव्यक्ति दी गई है ।।

व्याख्या:
हिमालय पर्वत और भारतीयों के संबंधों का वर्णन करते हुए कवि कहता है कि पर्वतों के राजा हिमालय का भारतीयों के साथ कुछ ऐसा ही संबंध है, हिमालय और भारतीयों का परस्पर अटूट रिश्ता है ।। इसकी ऊँची चोटी एवरेस्ट सारी पृथ्वी पर सबसे ऊँची है ।। यह संसार की सबसे ऊँची चोटी है इसीलिए जिस प्रकार व्यक्ति के सर पर ताज (मुकुट) सुशोभित होता है, उसी प्रकार धरती पर हिमालय की चोटी . मुकुट की भाँति शोभायमान है ।। पर्वत और पहाड़ों से भरी इस पृथ्वी पर केवल हिमालय ही पर्वतों का राजा है ।।

हिमालय पर्वत की ऊँचाई बहुत अधिक होने के कारण ऐसा लगता है मानो उसका सर आसमान को छू रहा है और उसके चरण पाताल की गहराई में समाए हुए हैं ।। भाव यह है कि हिमालय पर्वत आकाश-पाताल दोनों की सीमाओं को अपने में समेटे हुए है ।। हिमालय पर्वत का मन गंगा के बचपन की भाँति पवित्र और निर्मल है ।। पवित्र गंगा का उद्गम ही हिमालय से हुआ है ।।

हिमालय पर्वत का तन विभिन्न रंग और आकार वाली वनस्पतियों से ढका हुआ है ।। मुख अत्यधिक ऊँचाई पर होने के कारण वनस्पतियों से रहित है और केवल बर्फ से ढका हुआ है ।। जो भी हिमालय के आश्रय में आता है उसमें भी हिमालय की भाँति दृढ़ता – और विशालता आ जाती है ।। इसी कारण वह भी अपना मस्तक किसी के सामने नहीं झुकाता ।। ऐसे पर्वतराज हिमालय से हम भारतीयों का रिश्ता भी कुछ ऐसी ही है ।।

विशेष:

हिमालय को पर्वतराज और धरती का ताज कहकर उसकी महानता का वर्णन किया गया है ।।
हिमालय से ही गंगा का उद्गम हुआ है और हिमालय के समान ही भारतवासी भी अडिग और अटल हैं ।।
‘वरन-वरन’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है ।।
काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने ‘हिमालय और हम’ कविता में किसका वर्णन किया है?
उत्तर:
कवि ने इस कविता में हिमालय की प्राकृतिक छटा का वर्णन करते हुए हिमालय और भारतीयों की एक जैसी विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके अटूट संबंधों का वर्णन किया है ।।

प्रश्न (ii)
हिमालय को सबल धरती का ताज कहने का कारण क्या है?
उत्तर:
हिमालय को सबल धरती का ताज कहने का कारण यह है कि हिमालय पर्वत की चोटी एवरेस्ट, विश्व के सभी पर्वतों की चोटियों से ऊँची है ।।

प्रश्न (iii)
‘मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन-वरन मुख निरावन’
का आशय स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
आशय:
हिमालय पर्वत से परम पवित्र गंगा नदी का उद्गम होता है तथा हिमालय पर्वत विभिन्न रंग और आकार वाली हरी-भरी वनस्पतियों से ढका हुआ है ।। इसका मुँह निरावरण है अर्थात् वहाँ वनस्पतियाँ नहीं हैं ।।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
हिमालय पर्वत संसार का सबसे ऊँचा पर्वत होने के कारण पर्वतराज है ।। यह अत्यधिक ऊँचा होने के कारण आसमान को छूता हुआ प्रतीत होता है ।। इसके चरण पाताल की गहराई में समाए हुए हैं ।। इससे पवित्र गंगा निकलती है ।। इस पर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ उत्पन्न होती हैं ।। यह सदा बर्फ से ढक रहता है ।। यह दृढ़, विशाल है ।। यह किसी के आगे नहीं झुकता ।। इसी प्रकार भारतीय भी दृढ़ता में हिमालय की तरह हैं ।। वे भी किसी के आगे नतमस्तक नहीं होते हैं ।।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
हिमालय को पर्वतराज और धरती का ताज कहकर उसकी महानता का वर्णन किया गया है ।। हिमालय की तरह भारतवासी भी अडिग, अष्टल, दृढ़ हैं ।। (पर्वत-पहाड़) में अनुप्रास अलंकार है ।। वरन-वरन में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार तथा काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है विशेषणों का सटीक प्रयोग हुआ है ।। तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है ।। लय और तुक का समावेश है ।।

प्रश्न 2 .
अरुणोदय की पहली लाली इसको ही चूम निखर जाती,
फिर संध्या की अंतिम लाली इस पर ही झूम बिखर जाती ।।
इन शिखरों की माया ऐसी
जैसा प्रभात, संध्या वैसी
अमरों को फिर चिंता कैसी
इस धरती का हर लाल खुशी से ‘उदय-अस्त अपनाता है ।।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है॥ (Page 54)

शब्दार्थ:

अरुणोदय – सूर्य का उदय होना ।।
निखर जाना – सुंदर हो जाना ।।
उदय-अस्त – उदय होना और अस्त होना अर्थात् सुख-दुख ।।
प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से लिया गया है ।। इस काव्यांश में कवि ने बताया है कि हिमालय पर जिस प्रकार उदय और संध्या की लालिमा समान रूप से दिखाई देती है, उसी प्रकार हम भारतीय भी दुख और सुख को समान भाव से ग्रहण करते हैं ।।

व्याख्या:
हिमालय की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवि कहता है कि उदयकाल अर्थात् प्रातःकाल में जब सूर्य की किरणें हिमालय पर्वत की हिम-सतह पर पड़ती हैं तो वे इसका स्पर्श पाकर, इसको चूमकर और भी अधिक सुंदरता में प्रकट होती हैं ।। इसी प्रकार सायंकाल में सूर्यास्त के समय की अंतिम किरणों की लालिमा भी हिमालय की सतह पर झोंका खाते हुए मंद गति से बिखर जाती हैं ।।

हिमालय की चोटियों में ऐसी विलक्षण अलौकिक शक्ति है कि यहाँ पर जैसा प्रातःकाल का दृश्य दिखाई देता है, वैसा ही सायंकाल का भी ।। दूसरे शब्दों में, जिस प्रकार हिमालय पर्वत का प्राकृतिक सौंदर्य प्रातःकाल और सायंकाल दोनों में समान होता है उसी प्रकार भारतीय भी समान भाव से सुख और दुख को ग्रहण करते हैं ।। भारतवर्ष की धरती का हर जवान भी जीवन व मृत्यु को समान भाव से अपनाता है ।।

देश की रक्षा में तत्पर हर जवान मृत्यु का वरण कर अमर हो जाता है ।। हिमालय की तरह भारतीय जवान भी अमर है क्योंकि वह जीवन-मृत्यु पर सोच-विचार या चिंतन नहीं करते ।। भारत का प्रत्येक निवासी सुख-दुख और उत्थान-पतन को समरसता से अपनाता है ।। पर्वतों के राजा हिमालय से भारतीयों का ऐसा ही अटूट संबंध और रिश्ता है ।।

विशेष:

हमें जीवन के उत्थान-पतन, सुख-दुख दोनों स्थितियों को समान भाव से भोग करना चाहिए ।।
भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का गुणगान किया गया है ।।
‘लाल’ में श्लेष अलंकार है ।।
भाषा अत्यंत मधुर, सरस एवं कोमल है ।।
संगीतात्मकता एवं तुकांतात्मकता है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
हिमालय पर प्रातः और संध्या की क्या विशेषता है?
उत्तर:
हिमालय पर जैसा प्रातःकाल होता है, वैसा ही सायंकाल होता है ।। यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य प्रातः और संध्या में एक समान होता है?

प्रश्न (ii)
इस धरती के लाल की क्या विशेषता है?
उत्तर:
इस धरती के लाल (सुपुत्र) उत्थान-पतन और सुख-दुख दोनों को समान भाव से अपनाते हैं ।। ।।

प्रश्न (iii)
हिमालय पर्वत और भारतीय जवान में क्या समानता बताई गई है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत अमर है और भारतीय जवान भी अमर है ।। दोनों में अमर होने की समानता है ।।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
हिमालय पर्वत का प्राकृति सौंदर्य सुबह-शाम एक जैसा होता है ।। हिमालय सदा बर्फ से ढका रहता है ।। इसके शिखरों में अलौकिक शक्ति है ।। हिमालय पर्वत की भाँति प्रत्येक भारतीय भी सुख-दुख, जीवन-मृत्यु के समान भाव से ग्रहण करते हैं ।। हिमालय और भारतीय दोनों ही अमर हैं ।। इस प्रकार हिमालय के साथ भारतीयों के अटूट संबंधों का वर्णन किया गया है ।।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का गुणगान किया गया है ।। “लाल’ में श्लेष अलंकार है ।। ‘उदय-अस्त’ और उत्थान-पतन, सुख-दुख के प्रतीक हैं ।। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है ।। संगीतात्मकता एवं तुकांतात्मता है ।। शब्द चयन सटीक है ।।

प्रश्न 3 .
हर संध्या को इसकी छाया सागर-सी लंबी होती है
हर सुबह वही फिर गंगा की चादर-सी लंबी होती है ।।
इसकी छाया में रंग गहरा
है देश हरा, परदेश हरा
हर मौसम है, संदेश-भरा
इसका पद-तल छूनेवाला वेदों की गाथा गाता है ।।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है ।। (Page 54)

शब्दार्थ’:

सागर-सी – समुद्र के समान ।।
चादर-सी – चादर की भाँति ।।
पद-तल – तलहटी ।।
संदेश-भरा – सूचना से भरपूर ।।
प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से उद्धृत है ।। कवि हिमालय और भारतीयों के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहता है ।।

व्याख्या:
हिमालय पर्वत की संध्या के समय छाया सागर के समान लंबी होती है और वह हर सुबह गंगा की चादर की तरह लंबी होती है; अर्थात् हिमालय पर्वत अत्यंत विशाल और विस्तृत है ।। इसके मैदान अत्यंत विशाल और विस्तृत हैं जिनमें से हिमालय से निकलने वाली गंगा नदी बहती है ।। गंगा के मैदान अत्यंत उपजाऊ हैं ।। गंगा नदी के मैदानों के खेत हरे-भरे हैं ।। फसलें लहलहाती हैं ।।

हिमालय की गोद में बसा भारत और दूसरे देश भी इससे निकलने वाली नदियों के कारण हरे-भरे हैं ।। इस देश का प्रत्येक मौसम (ऋतु) संदेश से भरा होता है; अर्थात् प्रत्येक ऋतु में भारतीयों को कोई-न-कोई संदेश मिलता है ।। वेदों की रचना भी इसकी गोद में हुई थी और आज भी लोग ज्ञान की साधना के लिए हिमालय की ओर जाते हैं ।। दूसरे शब्दों में, वेदों की रचना हिमालय के चरणों में बैठकर ही हुई थी ।। पर्वतराज हिमालय से हम भारतीयों का कुछ ऐसा संबंध है ।।

विशेष:

सागर-सी लंबी, चादर-सी लंबी में उपमा अलंकार है ।।
हिमालय की इस विशेषतां को प्रकट किया गया है कि इसी की गोद में भारतीय ग्रंथ वेदों की रचना हुई है ।। हिमालय पर्वत अत्यंत विस्तृत और विशाल है ।।
भाषा सरल, सरस खड़ी बोली है ।।
काव्यांश में संगीतात्मकता और तुकांतात्मकता है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
‘हर संध्या…लंबी होती’ का भाव स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
हिमालय पर्वत अत्यंत विशाल और विस्तृत है ।। इसके मैदान अत्यंत विशाल और विस्तृत हैं ।। उन मैदानों में हिमालय से निकलने वाली गंगा नदी बहती है ।। गंगा के मैदानों के खेत हरे-भरे हैं ।। जिनमें फसलें लहलहाती हैं ।।

प्रश्न (ii)
‘इसका पद-तल छूने वाला वेदों की गाथा गाता है’-से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
इसका आशय है कि वेदों की रचना हिमालय की गोद में हुई थी और आज भी लोग ज्ञान की साधना के लिए हिमालय की ओर जाते हैं ।।

काठ्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
काव्य-सौंदर्य:
हिमालय की विशेषताओं को व्यक्त किया गया है ।। यह अत्यंत विस्तृत और विशाल है ।। वेदों की रचना भी यहीं हुई थी ।। ‘सागर-सी’, ‘चादर-सी’ में उपमा अलंकार है ।। ‘गाथा-गाता’ में अनुप्रास अलंकार है ।। भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है ।। काव्यांश में संगीतात्मकता और एकांतात्मकता है ।।

प्रश्न 4 .
जैसा यह अटल, अडिग-अविचल, वैसे ही हैं भारतवासी (M .P . 2009)
है अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी
कोई क्या हमको ललकारे
हम कभी न हिंसा से हारे
दुःख देकर हमको क्या मारे
गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुःख में भी मुसकाता है ।।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है ।। (Page 54)

शब्दार्थ:

अटल – न टलने वाला ।।
अडिग – न डिगने वाला ।।
अविचल – स्थिर ।।
अविनाशी – जिसका नाश न हो, जो नष्ट न हो ।।
प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश में ‘नेपाली’ जी ने बताया है कि हिमालय की तरह हम भी अविचल और अमर हैं ।। उन्होंने हिमालय और भारतवासियों के संबंध का वर्णन करते हुए हिमालय और भारतीयों के समान गुणों का भी वर्णन किया है ।। अतिपावन गंगाजल का महत्त्व भी कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में स्पष्ट किया है ।।

व्याख्या:
जिस प्रकार हिमालय पर्वत अटल, अडिग और निश्चल है उसी प्रकार भारतवासी भी अपने प्रण व अपने निश्चय पर अडिग रहते हैं ।। भारतीय एक बार जिस बात को करने की ठान लेते हैं, तो फिर जान देकर भी उस प्रतिज्ञा को पूर्ण करते हैं ।। उनका तो मूल मंत्र है-‘प्राण जाइ पर वचन न जाई ।।’ जिस प्रकार धरती पर हिमालय अमर है, उसी प्रकार भारत में रहने वाले भारतीय भी अमर हैं, शाश्वत हैं ।। भारतीयों की इसी विशेषता के कारण कवि इकबाल ने भी कहा है, कि –

“कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी,
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा ।।”

अनेक हिंसक आक्रमणकारियों (मुसलमानों और अंग्रेजों) ने हम पर हमले किए किंतु दुख-यातनाएँ देकर, हमारे तन को लहूलुहान करके भी वे हमारे मन को मार न सके; अर्थात् भारतीय कभी भी हिंसा के दम पर पराजित नहीं हुए ।। तन पर अत्याचार सहने के बावजूद मन से नहीं हारे ।। कवि कहता है कि इसका मुख्य कारण हमारी अति पावनी नदी गंगा है, जिसका गंगाजल पीकर भारतीय हर दुख-दर्द को हँसकर झेल लेते हैं ।। हिमालय पर्वत से निकलने वाली गंगा नदी का जल जो भी पी लेता है, वह दुख में भी हँसता है ।। इस प्रकार गंगा नदी के कारण हिमालय के साथ हमारा अटूट संबंध है, जो अपने अमृत तुल्य जल का पान करा भारतवासियों को भी अमर बना देती है ।।

विशेष:

भारतीय संस्कृति संसार की प्राचीनतम संस्कृति है, जो प्राचीनकाल से लेकर आज तक शाश्वत है, अविनाशी है ।। कवि ने इस लक्ष्य की ओर भी संकेत किया है ।।
हिमालय के लिए अटल, अडिग, अविचल विशेषणों का सार्थक प्रयोग किया है ।।
अटल, अडिग, अविचल, अमर-अविनाशी में अनुप्रास अलंकार की छटा द्रष्टव्य है ।।
‘दुःख में भी मुसकाता है’-पंक्ति में विरोधाभास है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
हिमालय की किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
हिमालय की अटल, अडिग, अविचल तथा अविनाशी होने की विशेषताओं का वर्णन किया गया है ।।

प्रश्न (ii)
गंगा के जल के प्रभाव का काव्यांश के आधार पर वर्णन कीजिए ।।
उत्तर:
हिमालय से निकलने वाली गंगा अत्यंत पवित्र है ।। इसका जल जो भी पी लेता है ।। वह दुख में भी मुस्कराता रहता है ।। गंगा का जल पीने वाला प्रत्येक दुख को हँसते-हँसते सहन कर जाता है ।।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का वर्णन किया है ।। वह प्राचीनकाल से लेकर अब तक शाश्वत है, अविनाशी है ।। जिस प्रकार हिमालय अटल, अडिग, अविचल और अविनाशी है उसी प्रकार भारतीय भी ।। गंगा नदी भारत की परम पवित्र नदी है ।। हिमालय और भारतीयों का परस्पर अटूट संबंध है ।।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
हिमालय और भारतीयों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है ।। अटल, अडिग, अविचल, कोई क्या, दुःख देकर में अनुप्रास अलंकार है ।। हिमालय के लिए अटल, अडिग, अविचल, अविनाशी विशेषणों का सार्थक प्रयोग किया है ।। ‘दुःख में भी मुस्काता है, में विरोधाभास अलंकार है ।। भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है ।। काव्यांश में संगीतात्मकता और तुकांतात्मकता है ।। शब्द चयन सटीक है ।।

प्रश्न 5 .
टकराते हैं, इससे बादल, तो खुद पानी हो जाते हैं ।।
तूफ़ान चले आते हैं, तो ठोकर खाकर सो जाते हैं ।।
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गाँधी
तलवारों-सी टूटी आँधी
इसकी छाया में तूफान, चिरागों से शरमाता है ।।
गिरिराज, हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है ।। (Page 54)

शब्दार्थ:

तूफान – आँधी, संकट ।।
ठोकर खाना – इधर-उधर भटकना ।।
विपदा – संकटा ।।
प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश गोपालसिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ से उद्धृत है ।। हिमालय और भारतीयों के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए ‘नेपाली’ जी हिमालय और भारतीयों की सामाजिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं –

व्याख्या:
हिमालय पर्वत अत्यंत ऊँचा है ।। इसकी चोटियों से मानसून के बादल टकराते हैं और स्वयं ही वर्षा के रूप में बरस पड़ते हैं ।। भाव यह कि हिमालय बादलों को रोककर भारतवर्ष में वर्षा करता है ।। इसी प्रकार जो हमसे टकराता है चूर-चूर हो जाता है ।। हिमालय से टकराकर तूफान भी शाब हो जाते हैं ।। उनमें इतनी शक्ति भी नहीं रहती कि वे दीपक को भी बुझा पाएँ ।। दूसरे शब्दों में, हिमालय की छत्र-छाया में रहने वालों का कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता ।। यह हिमालय सदैव आक्रमणकारियों से हमारी रक्षा करता है ।।

जब-जब भी शासन ने भारत की जनता को विपत्ति में डाला और दुख दिए, तब-तब ही जनता की विपत्तियों को दूर करने के लिए और दुःखों से छुटकारा दिलाने के लिए लाखों सत्याग्रही घर-बार की चिंता छोड़कर निकल पड़े ।। हिमालय पर्वत की छाया में आकर बड़े से बड़े तूफान भी कमजोर पड़ जाते हैं ।। उनमें – चिरागों अर्थात् दीपकों को भी बुझाने की शक्ति नहीं रहती ।। हम भारतवासियों का हिमालय पर्वत से ऐसा ही कुछ संबंध है ।।

विशेष:

कवि ने हिमालय के लाभों का वर्णन किया है ।।
‘तलवारों-सी’ में उपमा अलंकार है ।।
‘जब-जब, तब-तब’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है ।।
‘पानी हो जाना, ठोकर खाना’ मुहावरों से पद अलंकृत है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
हिमालय के दो लाभ बताइए ।।
उत्तर:

हिमालय पर्वत बादलों को रोककर भारत में वर्षा कराता है ।।
हिमालय पर्वत से टकराकर तूफान भी शांत हो जाते हैं ।।
प्रश्न (ii)
जब-जब जनता को विपदा दी
तब-तब निकले लाखों गाँधी
– उपर्युक्त पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:
आशय:
जब-जब भी शासन ने भारतीय जनता को विपत्ति में डाला, उस पर अन्याय, अत्याचार किए तब-तब जनता को दुखों, अन्याय, अत्याचार से छुटकारा दिलाने में लाखों सत्याग्रही हर प्रकार की चिंता त्यागकर निकल पड़ते हैं ।।

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