MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 अधिकार

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 अधिकार

अभ्यास प्रश्नोत्तर :

Q1 . अधिकार क्या हैं और वे महत्त्वपूर्ण क्यों हैं? अधिकारों का दावा करने के लिए उपयुक्त आधार क्या हो सकते हैं?

उत्तर: अधिकार का अर्थ यह है कि मनुष्य के सामाजिक जीवन की वे परिस्थितिया है जिनके द्वारा मनुष्य अपना विकास कर सकता है तथा अधिकारों के बिना मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता है ।। जिस देश में नागरिकों को अधिकार प्राप्त नहीं होते, वहाँ के नागरिक अपना विकास नहीं कर सकते है ।। राज्य के द्वारा दिए गए अधिकारों को देखकर ही उस राज्य को अच्छा या बुरा कहा जा सकता है ।।

लास्की के अनुसार, के

“अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ है जिनके बिना साधारणत: कोई मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता ।। “

हालैंड के अनुसार,

“अधिकार एक व्यक्ति के द्वारा दुसरे व्यक्ति के कर्त्तव्यों को समाज के मन और शान्ति द्वारा प्रभावित करने की क्षमता है ।। “

अधिकार उन बातों का प्रतिक है, जिन्हें समाज के सभी लोगों के सम्मान और गरिमा का जीवन बसर करने के लिए महत्त्वपूर्ण और आवश्यक समझते हैं ।।

उदाहरण के लिए, आजीविका का अधिकार सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ज़रूरी है ।। लाभकर रोजगार में नियोजित होना व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है, इसीलिए यह उसकी गरिमा के लिए प्रमुख है ।। लाभकर रोजगार में नियोजित होना व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है, इसीलिए यह उसकी गरिमा के लिए प्रमुख है ।। अपनी बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति हमें अपनी प्रतिभा और रुचियों की ओर प्रवृत्त होने की स्वतंत्रता प्रदान करती है ।।

अधिकार का महत्व –

1 . अधिकार से व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है |

2 . अधिकार से व्यक्ति के अंदर पाई जाने वाली शक्तियों का विकास होता है |

3 . इससे व्यक्ति और समाज की उन्नति होती है ।।

4 . अधिकार सरकार को निरंकुश बनाने से रोकते है |

5 . अधिकार सामाजिक कल्याण का एक साधन है ।। 6 . अधिकार व्यक्ति के जीवन की सुखमय बनता है ।।

अधिकार के मांग के आधार

1 . मनुष्यं अपनी अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति करना चाहता है इसी से उसके जीवन का विकास होता है उसकी सबसे पहली मांग यही होती है की उसे ऐसे अवसर मिले जिनसे वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके | अधिकारों का निर्माण इन्ही मांगों के आधार पर होता है ।।

2 . मांग अधिकार तभी बन सकते है जबकि उनकी प्राप्ति उन्हें जिएँ के लिए आवश्यक दिखाई दे |

3 . समाज उस मांग को उचित समझकर स्वीकार करें |

Q2 . किन आधारों पर यह अधिकार अपनी प्रकृति में सार्वभौमिक माने जाते हैं?

उत्तर : अधिकार जीवन की परिस्थियों के रूप में महत्त्वपूर्ण और आवश्यक अहि परन्तु अधिकारों को सार्वभौमिक खा जा सकता है क्योकी उनकी सभी कालों में सभी लोगों द्वारा मागं रही है ।। वे अपने व्यवहार और सभ्यता के कारण महत्त्वपूर्ण हैं ।। ये अधिकार मानव अस्तित्व के लिए मौलिक अधिकार है वस्तुत: अधिकार मौलिक शर्ते हैं जो मानव जाति के लिए आत्म सम्मान और महत्वपूर्ण है

निन्मलिखित अधिकारों को सार्वभौमिक अधिकार कहा जा सकता है –

1 . जीविका का अधिकार जीविका का अधिकार एक व्यक्ति के जीवन का आधार है जिससे उसका जीवन चलता है इसलिए यह अति महत्त्वपूर्ण आवश्यक और सार्वभौमिक है यदि एक व्यक्ति को अच्छा रोजगार प्राप्त है तो इससे उसको आर्थिक दृष्टि से स्वालंबी बनाने का अवसर मिलेगा और इससे उसका महत्व और स्तर बढ़ जायेगा | जब एक व्यक्ति की आवश्यकताएं, विशेष रूप से आर्थिक आवश्यकताएं पूरी हो जताई है तो उसके प्रतिभा और कौशल में विकास होता है और उसका शोषण समाप्त हो जाता है ।।

2 . अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमें विभिन्न प्रकार से अपने को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है इस अधिकार के द्वारा लोग अपने को लिखित, बोलकर या कलात्मक रूप से व्यक्त कर सकते हैं |

3 . शिक्षा का अधिकार शिक्षा का अधिकार व्यक्ति को मानसिक, नैतिक और मनौवैज्ञानिक विकास में सहायता करता है ।। इससे हमें उपयोगी कौशल प्राप्त होते है जिससे हम जीवन के विविध पक्षों के चुनाव में सक्षम हो जाते हैं | इसलिए शिक्षा के अधिकार के सार्वभौमिक अधिकार स्वीकार किया जा सकता है ।।

Q3 . संक्षेप में उन नए अधिकारों की चर्चा कीजिए, जो हमारे देश में सामने रखे रहे हैं ।। उदाहरण के लिए आदिवासियों के अपने रहवास और जीने के तरीके को संरक्षित रखने तथा बच्चों के बँधुआ मजदूरी के खिलाफ अधिकार जैसे नए अधिकारों को लिया जा सकता है ।।

उत्तर: आज का विश्व लोकतान्त्रिक सरकार का विश्व है जिसमे संस्कृति, जाति, रंग, क्षेत्र, धार्मिक, और व्यवसाय के प्रति जागरूकता और चेतनता बढ़ रही है ।। व्यक्ति का सर्वागिण विकास शिक्षा, संस्कृति और धर्म के अधिकार से जुड़ा हुआ है इसलिए लोगों को उनके नए क्षेत्रों जैसे शिक्षा, संस्कृति, बाल अधिकार, महिला अधिकार, बुजुर्गों के अधिकार, मानवाधिकार, श्रमिक अधिकार कृषक अधिकार पर्यावरण अधिकार आदि अधिकार दिए जा रहे है|

आज के समाज सामान्य रूप से बहु समाज है जिसमे नागरिकों को विकास करने का और लोगों के सामाजिक सांस्कृतिक आवास की सुरक्षा के अधिकार दिए गए है ।। भारतीय संविधान में शिक्षा और संस्कृति का अधिकार दिया गया है, जिसमे विभिन्न क्षेत्र के लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान को कायम रखने और उनको विकसित करने का अधिकार दिया गया है ।। वे लोग विभिन्न प्रकार के रहन सहन से सम्बंधित होते हैं व विभिन्न प्रकार के वेश भूषा व्यवहार, त्यौहार और अन्य सभ्यताओं में संबद्द होते है | वे शिक्षा से अपनी संस्कृति की प्रगति कर सकते है ।।

बच्चों को शोषण के विरुद्ध कार्यवाही करने का अधिकार दिया गया है ।। जिससे वे पुरानी प्रथाओं की बुरैयोंन जैसे बंधुवा मजदूरी को दूर कर सकते है | उनकी सम्मान की रक्षा के लिए मौलिक अधिकार भी दिए गए है ।।

Q4 . राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों में अंतर बताइये ।। हर प्रकार के अधिकार के उदाहरण भी दीजिए ।।

उत्तर : समाज के लोगों को विभिन्न प्रकार की दशाओं और सुविधाओं की आवश्यकता होती है जिनको वे अधिकार के रूप में प्राप्त करना चाहते है तथा अपना विकास करना चाहते है ।।

राजनीतिक अधिकार राजनीतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा

राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं ।। इनमें वोट देने और प्रतिनिधि चुनने, चुनाव

लड़ने, राजनीतिक पार्टियाँ बनाने या उनमें शामिल होने जैसे अधिकार शामिल हैं ।।

राजनीतिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े होते हैं ।।

कुछ राजनितिक अधिकार निम्र प्रकार से है :

(i) कानून के समक्ष समानता
(ii) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
(iii) मतदान का अधिकार
(iv) निर्वाचित होने का अधिकार
(v) संघ बनाने का अधिकार
(vi) प्रतिनिधि चुनने का अधिकार
(vii) राजनैतिक दल बनाने का अधिकार

आर्थिक अधिकार आर्थिक अधिकार वे अधिकार होते हैं जो मनुष्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है जैसे- भोजन, कपडा, माकन, विश्राम और रोजगार आदि | राजनैतिक और आर्थिक अधिकार एक दुसरे से जुड़े हुए है मुख्य आर्थिक अधिकार निम्नलिखित हैं :

(i) कार्य करने का अधिकार

(ii) आवास एवं कार्य करने की उचित दशाये

(iii) रोजगार का अधिकार

(iv) पर्याप्त मजदूरी का अधिकार

(v) विश्राम का अधिकार

(vi) न्यूनतम आवश्यकता जैसे आवास, भोजन, वस्त्र, आदि का अधिकार

(vii) सम्पति का अधिकार

(viii) चिकित्सा सुविधा का अधिकार

सांस्कृतिक अधिकार सांस्कृतिक अधिकार वे अधिकार होते है जो मानव के विकास, – सुव्यवस्थित जीवन के लिए, उत्तेजनात्मक, मनोविज्ञानिक और नैतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है ।। मुख्य सांस्कृतिक अधिकार निम्नलिखित हैं :

(i) प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार

(ii) स्थानीय वेशभूषा, त्यौहार, पूजा, और उत्सव मनाने का अधिकार

(iii) शैक्षित संस्थाओं की स्थापना का अधिकार

Q5 . अधिकार राज्य की सत्ता पर कुछ सीमाएँ लगाते हैं ।। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए ।।

उत्तर : अधिकार राज्य की सत्ता पर कुछ सीमाएँ लगाते हैं क्योंकि अधिकार राज्य से प्राप्त मागं एवं दावे है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि राज्य की यह जिम्मेदारी है कि वह लोगों को सुनिश्चित सुविधाये उनके कल्याण और रोजगार के लिए प्रबंध करे | ऐसा करने में राज्य के कार्य के कुछ कमियाँ आ जाती है | नागरिकों के अधिकार सुनिश्चित करते हुए राज्य के प्राधिकरण को लोगों के जीवन और स्वतंत्रता को अक्षुण रखते हुए अपना कार्य करना चाहिए | इसमें कोई संदेह नहीं है की राज्य अपनी प्रभुता के कारण शक्तिशाली है परन्तु नागरिकों के साथ संबंध राज्य की प्रभुता की प्रकृति पर निर्भर है ।। राज्य अपनी रक्षा से ही अस्तित्व में नहीं होता है बल्कि लोगों की सुरक्षा से ही टिक सकता है | यह नागरिक ही होता है जिसका महत्व अधिक होता है ।।

राज्य के कानून लोगों के लिए उनके कार्य के लिए उत्तरदायी और संतुलित है | कानून राज्य और लोगों के मध्य सबंध को नियंत्रित करता है ।। यह राज्य का कर्तव्य है कि वह आवश्यक दशाये उपलब्ध कर्वे जिनकी नागरिकों द्वारा अपने कल्याण एवं विकास मांग और दावे किये जाते हैं ।। राज्य को इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहिए ।।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर :

Q1 . अधिकार क्या है ? उदाहरण के द्वारा समझाये |

उत्तर : अधिकार उन बातों का प्रतिक है, जिन्हें समाज के सभी लोगों के सम्मान और गरिमा का जीवन बसर करने के लिए महत्त्वपूर्ण और आवश्यक समझते हैं ।।

उदाहरण के लिए, आजीविका का अधिकार सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ज़रूरी है ।।

लाभकर रोजगार में नियोजित होना व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है, इसीलिए यह उसकी गरिमा के लिए प्रमुख है ।। लाभकर रोशगार में नियोजित होना व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है, इसीलिए यह उसकी गरिमा के लिए प्रमुख है ।। अपनी बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति हमें अपनी प्रतिभा और रुचियों की ओर प्रवृत्त होने की स्वतंत्रता प्रदान करती

अधिकार का अर्थ यह है कि मनुष्य के सामाजिक जीवन की वे परिस्थितिया है जिनके द्वारा मनुष्य अपना विकास कर सकता है तथा अधिकारों के बिना मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता है ।। जिस देश में नागरिकों को अधिकार प्राप्त नहीं होते, वहाँ के नागरिक अपना विकास नहीं कर सकते है ।। राज्य के द्वारा दिए गए अधिकारों को देखकर ही उस राज्य को अच्छा या बुरा कहा जा सकता है ।।

लास्की के अनुसार,

“अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ है जिनके बिना साधारणत: कोई मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता ।। “

हालैंड के अनुसार,

“अधिकार एक व्यक्ति के द्वारा दुसरे व्यक्ति के कर्त्तव्यों को समाज के मन और शान्ति द्वारा प्रभावित करने की क्षमता है ।। “

Q2 . अधिकारों की दावेदारी से आप क्या समझाते है ?

उत्तर : अधिकारों की दावेदारी से अभिप्राय यह है कि वे हमारी बेहतरी के लिए आवश्यक हैं ।। ये लोगों को उनकी दक्षता और प्रतिभा विकसित करने में सहयोग देते हैं ।।

उदाहरणार्थ, शिक्षा का अधिकार हमारी तर्क-शक्ति विकसित करने में मदद करता है, हमें उपयोगी कौशल प्रदान करता है और जीवन में सूझ-बूझ के साथ चयन करने में सक्षम बनाता है ।। व्यक्ति के कल्याण के लिए इस हद तक शिक्षा को अनिवार्य समझा जाता है कि उसे सार्वभौम अधिकार माना गया है ।।

Q3 . नागरिक स्वतंत्रता का क्या अर्थ है ?

उत्तर : नागरिक स्वतंत्रता का अर्थ है- स्वतंत्रता और निष्पक्ष न्यायिक जाँच का अधिकार, विचारों की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति का अधिकार प्रतिवाद करने तथा असहमति प्रकट करने का अधिकार नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली की बुनियाद का निर्माण करते हैं ।।

Q4 . भारतीय संविधान में नागरिकों को कौन से मुलभुत अधिकार दिए गए है ?

उत्तर : भारतीय संविधान में नागरिकों को निम्नलिखित मुलभुत अधिकार दिए गए है:

(i) समानता का अधिकार

(ii) स्वतंत्रता का अधिकार

(iii) शोषण के विरुद्ध अधिकार

(iv) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

(v) शिक्षा और सांस्कृतिक का अधिकार

(vi) संवैधानिक उपचार का अधिकार

Q5 . मौलिक अधिकार से आप क्या समझते है?

उत्तर : मौलिक अधिकार वे अधिकार होते है जिनके बिना किसी देश के लोकतान्त्रिक व्यवस्था के नागरिक अपना विकास और उन्नति नहीं कर सकते है |

जैसे – जीवन का अधिकार, समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा व संस्कृति का अधिकार आदि

जिन कारणों से इसे मौलिक अधिकार कहा जाता है वे निम्न है :

(i) ये अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास लिए अति आवश्यक है

(ii) ये अधिकार इसलिए भी मौलिक कहे जाते है क्योकि देश के संविधान में इनका उल्लेख कर दिया गया है और दिन प्रति दिन बदलने वाली सरकारें अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए इनमे स्वेच्छा से परिवर्तन नहीं कर सकते है

(iii) ये अधिकार न्याय योग्य होते है

Q6 . अधिकार किस प्रकार राज्य को प्रभावित करते है ?

उत्तर : अधिकार निम्न प्रकार से राज्य को प्रभावित करते है:

(i) राजनितिक एवं अन्य सभी प्रकार के अधिकार राज्य से प्राप्त किये जाने वाले मांग और दावे है इसलिए अधिकार मांग एवं दावों के रूप में राज्य की प्रभुता को सिमित करते है और रकते है ।।

(ii) अधिकार राज्य को किसी कार्य को करने या न करने की ओर निर्देश करते है |

(iii) अधिकार राज्य को कुछ करने या कुछ मांगे मनवाने के भी विवश करते हैं |

(iv) अधिकार राज्य की लोगों के लिए सुधार करने या कार्य करने की प्रेरणा देते है ।।

Q7 . भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के नाम बताइए ।।

उत्तर : भारतीय संविधान में सात मौलिक अधिकार थे, परन्तु सन 1979 में 44 वें संशोधन के द्वारा सम्पति के अधिकार को हटा दिया गया है अब छ: मौलिक अधिकार रह गए है जो निम्नलिखित है :

1 . समानता का अधिकार

2 . स्वतंत्रता का अधिकार

3 . शोषण के विरुद्ध अधिकार

4 . धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

5 . शिक्षा और संस्कृति का अधिकार

6 . संवैधानिक उपचार का अधिकार

Q8 . राजनितिक अधिकार से आप क्या समझाते है ?

उत्तर : राजनीतिक अधिकार से अभिप्राय यह है कि राजनीतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं ।। इनमें वोट देने और प्रतिनिधि चुनने, चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टियाँ बनाने या उनमें शामिल होने जैसे अधिकार शामिल हैं ।। राजनीतिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े होते हैं ।। नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली की बुनियाद का निर्माण करते हैं ।।

कुछ राजनितिक अधिकार निम्न प्रकार से है :

(i) कानून के समक्ष समानता

(ii) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

(iii) मतदान का अधिकार

(iv) निर्वाचित होने का अधिकार

(v) संघ बनाने का अधिकार

(vi) प्रतिनिधि चुनने का अधिकार

(vii) राजनैतिक दल बनाने का अधिकार

Q9 . जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के अनुसार मानवीय गरिमा की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए |

उत्तर : जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के अनुसार लोगों के साथ गरिमामय बर्ताव करने का अर्थ था उनके साथ नैतिकता से पेश आना ।।

18 वीं सदी के जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के लिए इस साधारण विचार का गहरा अर्थ था ।। उनके लिए इसका मतलब था कि हर मनुष्य की गरिमा है और मनुष्य होने के नाते उसके साथ इसी के अनुकुल बर्ताव किया जाना चाहिए ।। मनुष्य अशिक्षित हो सकता है, गरीब या शक्तिहीन हो सकता है ।। वह बेईमान अथवा अनैतिक भी हो सकता है ।। फिर भी वह एक मनुष्य है और वह प्रतिष्ठा पाने का हकदार है ।। कांट के विचार ने अधिकार की एक नैतिक अवधारणा प्रस्तुत की ।।

पहला, हमें दूसरों के साथ वैसा ही आचरण करना चाहिए, जैसा हम अपने लिए दूसरों से अपेक्षा करते हैं ।।

दूसरे, हमें यह निश्चित करना चाहिए कि हम दूसरों को अपनी स्वार्थ सिद्धि का साधन नहीं बनायेंगे ।।

Q10 . प्राकृतिक अधिकार से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर : 17 वीं और 18 वीं शताब्दी में राजनीतिक सिद्धान्तकर तर्क देते थे कि हमारे लिए अधिकार प्रकृति या ईश्वर प्रदत्त हैं ।। हमें जन्म से वे अधिकार प्राप्त हैं ।। अत: कोई व्यक्ति या शासक उन्हें हमसे छीन नहीं सकता ।।

उन्होंने मनुष्य के लिए तीन प्राकृतिक अधिकार चिन्हित किये थे- (i) जीवन का अधिकार, (ii) स्वतंत्रता का अधिकार और (iii) संपत्ति का अधिकार ।।

अन्य तमाम अधिकार इन बुनियादी अधिकारों से निकले हैं ।। हम इन अधिकारों का दावा करें या न करें, व्यक्ति होने के नाते हमें ये प्राप्त हैं ।। क्योंकि ये ईश्वर प्रदत्त है और उन्हें कोई मानव शासक या राज्य हमसे छीन नहीं सकता ।। प्राकृतिक अधिकारों के विचार का इस्तेमाल राज्यों अथवा सरकारों के द्वारा स्वेच्छाचारी शक्ति के प्रयोग का विरोध करने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए किया जाता था ।।

मुख्य बिंदु

अधिकार उन बातों का प्रतिक है, जिन्हें समाज के सभी लोगों को सम्मान और गरिमा

का जीवन बसर करने के लिए महत्त्वपूर्ण और आवश्यक समझते हैं ।। 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने मानवाधिकारों की

सार्वभौमिक घोषणा को स्वीकारा और लागू किया ।। 17 वीं और 18 वीं शताब्दी में राजनीतिक सिद्धान्तकर तर्क देते थे कि हमारे लिए

अधिकार प्रकृति या ईश्वर प्रदत्त हैं ।। हमें जन्म से वे अधिकार प्राप्त हैं ।। अतः कोई व्यक्ति

या शासक उन्हें हमसे छीन नहीं सकता ।।

• मनुष्य के लिए तीन प्राकृतिक अधिकार चिन्हित किये गए थे- (i) जीवन का अधिकार, (ii) स्वतंत्रता का अधिकार और (iii) संपत्ति का अधिकार ।। नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक

प्रणाली की बुनियाद का निर्माण करते हैं ।।

• राजनीतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं ।। अधिकारों का उद्देश्य लोगों के कल्याण की हिफाजत करना होता है ।।

जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के अनुसार लोगों के साथ गरिमामय बर्ताव करने का

अर्थ था उनके साथ नैतिकता से पेश आना ।।

• कांट के विचार ने अधिकार की एक नैतिक अवधारणा प्रस्तुत की ।। पहला, हमें दूसरों के साथ वैसा ही आचरण करना चाहिए, जैसा हम अपने लिए दूसरों से अपेक्षा करते हैं ।। दूसरे, हमें यह निश्चित करना चाहिए कि हम दूसरों को अपनी स्वार्थ सिद्धि का साधन नहीं बनायेंगे ।।

भारतीय संविधान में सात मौलिक अधिकार थे, परन्तु सन 1979 में 44 वें संशोधन के द्वारा सम्पति के अधिकार को हटा दिया गया है ।। अब मुख्यत: छ: मौलिक अधिकार रह गए है ।। ।।

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 रहिमन विलास (कविता, रहीम)
रहिमन विलास पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न
रहिमन विलास लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आँखों से बहने वाले आँसू क्या व्यक्त कर देते हैं? (M.P. 2010)
उत्तर:
आँखों से बहने वाले आँसू मनुष्य के मन का दुख व्यक्त कर देते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
बिन पानी के कौन महत्त्वहीन हो जाते हैं? (M.P. 2009)
उत्तर:
बिन पानी के मोती, मनुष्य और चून महत्त्वहीन हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
कवि ने सच्चा मित्र किसे कहा है? (M.P. 2011)
उत्तर:
कवि में सच्चा मित्र उसे कहा है, जो संकटकाल या विषम परिस्थिति में भी मित्र के साथ रहता है।

प्रश्न 4.
छोटों के प्रति बड़ों का क्या कर्तव्य है?
उत्तर:
छोटों के प्रति बड़ों का कर्तव्य है कि वे छोटों के उपद्रव (गलतियों) को क्षमा कर दें।

प्रश्न 5.
कवि ने जीवन की सार्थकता के संबंध में क्या कहा है?
उत्तर:
कवि ने कहा है कि जीवन की सार्थकता देने के भाव में ही है।

रहिमन विलास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समुद्र के जल की अपेक्षा कुएँ के जल की प्रशंसा क्यों की है? (M.P. 2010; 2012)
उत्तर:
कुएँ के जल को पीकर प्यासे की प्यास बुझती है। उसके हृदय को संतोष का अनुभव होता है जबकि समुद्र के जल से प्यासा प्यास नहीं बुझा पाता है। वह प्यासा ही रह जाता है। अतः कुएँ का जल संतोषदायक है इसीलिए उसकी प्रशंसा की है।

प्रश्न 2.
कुशलता की कामना कब निष्फल हो जाती है?
उत्तर:
कुशलता की कामना उस समय निष्फल हो जाती है, जब मनुष्य कुसंगति में पड़ जाता है। कुसंगति के कारण मनुष्य की कुशलता में बाधा उत्पन्न होती है। कुसंगत और कुशलता दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते।

प्रश्न 3.
कवि रहीम ने किसे समझाना उचित नहीं माना है?
उत्तर:
कवि रहीम ने ऐसे व्यक्ति को समझाना उचित नहीं माना है, जो रात-दिन, सोते-जागते अनकही अर्थात् बिना सर-पैर की निरर्थक बातें करता रहता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
कवि मोतियों के हार के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है? (M.P. 2009)
उत्तर:
कवि मोतियों के हार के माध्यम से संदेश देना चाहता है कि श्रेष्ठ लोगों अथवा अपने लोगों के रूठ जाने पर उन्हें बार-बार मना लेना चाहिए। प्रेम से साथ रहने पर ही शोभा होती है।

प्रश्न 5.
रहीम ने धन को महत्त्व क्यों दिया है?
उत्तर:
रहीम ने धन को इसलिए महत्त्व दिया है क्योंकि धन से मित्र बनते हैं। धन में ही मित्र बनाने की शक्ति होती है। निर्धन के कम मित्र बनते हैं।

प्रश्न 6.
“लोग भरम हम पै.धरें, याते नीचे नैन”क्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पंक्ति का आशय है-लोग भ्रमवश रहीम को दाता मानकर उनकी जय-जयकार करते हैं। इसी कारण कवि के मन में संकोच उत्पन्न होता है। उसे लज्जा आती है कि देने वाला तो ईश्वर है। मैं तो एक साधारण व्यक्ति हूँ। यह सोचकर ही दान देने वाले कवि रहीम सदा अपनी आँखें नीची किए रहते हैं।

रहिमन विलास भाव-पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव-पल्लवन कीजिए।

प्रश्न 1.
“जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देई।”
उत्तर:
जब किसी को घर से निकाला जाएगा, तो वह घर का भेद दूसरों से क्यों नहीं कहेगा। इस प्रकार घर के सारे भेद दूसरों तक पहुँच जाएँगे। घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता। जब तक वह घर में रहता है तो सारे भेद घर तक सीमित रहते हैं, लेकिन उसको घर से निकालते ही सारे भेद दूसरों तक पहुँच जाते हैं। रामायण में रावण अपने छोटे भाई विभीषण को लंका से निकाल देता है। विभीषण घर से निकाले जाने के बाद राम से आ मिलता है। उसी ने राम को लंका के सारे भेद तथा रावण की मृत्यु का रहस्य भी बता दिया, इसी से जनता में कहावत भी प्रचलित है-घर का भेदी लंका ढावै।

प्रश्न 2.
“खग मृग बसत आरोग्य वन, हरि अनाथ के नाथ।” (M.P. 2011)
उत्तर:
समस्त पशु और पक्षी वन में प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। वन में उन्हें शुद्ध जल और वायु मिलती है। वे साफ पानी पीते हैं और शुद्ध साँस लेते हैं। वन के ही फल-फूल और पत्तियाँ खाकर अपना पेट भरते हैं। वे कभी रोगग्रसित नहीं होते। सदा निरोग रहते हैं। उन्हें औषधियों की आवश्यकता नहीं होती। प्राकृतिक जीवन स्वास्थ्यवर्धक होता है। वन में कोई चिकित्सक नहीं होता। उनके स्वास्थ्य की रक्षा तो ईश्वर ही करता है। अतः स्वस्थ व निरोग रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण से ज्यादा से ज्यादा जुड़े रहना चाहिए।

रहिमन विलास भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के हिंदी मानक रूप लिखिएछिमा, गेह, माखन, मीत, रावन।
उत्तर:
क्षमा, गृह, मक्खन, मित्र, रावण।

प्रश्न 2.
समानार्थी शब्दों की सही जोड़ियाँ बनाइए –

खग – कमल
उदधि – जल
अंबु – समुद्र
अंबुज – पक्षी
उत्तर :

खग – पक्षी
उदधि – समुद्र
अंबु – जल
अंबुज – कमल
प्रश्न 3.
उदाहरण के अनुसार दिए गए शब्द युग्मों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
दिन-दीन:
आज का दिन सुहावना है।
दीन व्यक्ति दया का पात्र है।
कुल-कूल, अंक-अंक, हंस-हँस, वात-बात, खल-खाल।
उत्तर:

कुल – ऊँचे कुल में जन्म लेने से ही मनुष्य उच्च नहीं बन जाता।
कूल – यमुना कूल पर मेला लगा हुआ है।
अंक – प्रसन्नता से उसने मुझो अंक में भर लिया।
अंक – अंक से अंक मिलाकर एक बड़ी विषम संख्या बनाओ।
हंस – पक्षियों का राजा होता है।
हँस – उसने मेरी बात हँस कर उड़ा दी।
वात – वह वात रोग से पीड़ित है।
बात – वह बात करने योग्य नहीं है।
खल – खल के साथ न मित्रता अच्छी होती है और न शत्रुता।
खाल – पशुओं की तो खाल भी काम में आ जाती है।
रहिमन विलास योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
नीति से संबंधित काव्य लिखने वाले कवियों के चित्रों को संकलन कर उनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
अन्य कवियों के नीति सम्बन्धी दोहों का संकलन कीजिए।
उत्तर:
छात्र अपने विद्यालय के पुस्तकालय से पुस्तकें लेकर स्वयं संकलन करें।

प्रश्न 3.
यदि आपके पड़ोस में कोई कवि हिंदी में काव्य रचना करता हो तो उससे रचना प्राप्त कर पढ़िए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4.
यदि आपके कुटुम्बीजन आपसे रूठ गए हों तो आप क्या करेंगे? लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

रहिमन विलास परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
आरोग्य बनाने की शक्ति होती है –
(क) नगरीय जीवन में
(ख) प्राकृतिक जीवन में
(ग) ग्रामीण जीवन में
(घ) कृत्रिम जीवन में
उत्तर:
(ख) प्राकृतिक जीवन में।

प्रश्न 2.
कुसंग से कौन-सी अभिलाषा पूरी नहीं होती –
(क) धन-संपत्ति प्राप्ति की
(ख) सुख-शांति प्राप्ति की
(ग) कुशलता प्राप्ति की
(घ) ईश्वर प्राप्ति की
उत्तर:
(ग) कुशलता प्राप्ति की।

प्रश्न 3.
‘देनहार कोउ और है’ के द्वारा संकेत किया गया है – (M.P. 2009)
(क) ईश्वर की ओर
(ख) सम्राट अकबर की ओर
(ग) जनता की ओर
(घ) संसार की ओर
उत्तर:
(क) ईश्वर की ओर।

प्रश्न 4.
रहीम ने किसके जल को धन्य कहा है –
(क) समुद्र के
(ख) तालाब के
(ग) नदी के
(घ) कुएँ के
उत्तर:
(घ) कुएँ के।

प्रश्न 5.
घर की बात घर में ही रखने का संकेत निम्नलिखित दोहे में किया है –
(क) रहिमन अँसुआ नैन गरि
(ख) देनहार कोउ और है
(ग) तौ ही लो जीवो भलो
(घ) छिमा बड़ेन को चाहिए
उत्तर:
(क) रहिमन अँसुआ नैन ढरि।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
खग मृग बसत आरोग बन, हरि अनाथ के नाथ में अलंकार है –
(क) अनुप्रास अलंकार
(ख) उत्प्रेक्षा अलंकार
(ग) उपमा अलंकार
(घ) दृष्टांत अलंकार
उत्तर:
(घ) दृष्टांत अलंकार।

प्रश्न 7.
रहिमन अंबुज अंबु बिनु में प्रयुक्त अलंकार कौन-सा है?
(क) रूपक अलंकार
(ख) वक्रोक्ति अलंकार
(ग) उदाहरण अलंकार
(घ) अनुप्रास अलंकार
उत्तर:
(घ) अनुप्रास अलंकार।

प्रश्न 8.
सूर्य भी रक्षा नहीं कर सकता किसकी?
(क) जलहीन कमल की
(ख) कर्महीन व्यक्ति की
(ग) कुसंगी व्यक्ति की
(घ) धोखेबाज मित्र की
उत्तर:
(क) जलहीन कमल की।

प्रश्न 9.
श्रेष्ठ मनुष्यों की समानता की गई है –
(क) मोतियों से
(ख) फूलों से
(ग) सीपियों से
(घ) रत्नों से
उत्तर:
(क) मोतियों से।

प्रश्न 10.
बड़े लोगों के व्यक्तित्व शोभा होती है –
(क) दया
(ख) क्षमा
(ग) उत्पात
(घ) अभिमान
उत्तर:
(ख) क्षमा।

प्रश्न 11.
‘देनहार कोउ और है’ के द्वारा रहीमदास ने संकेत किया है – (M.P. 2009)
(क) ईश्वर की ओर
(ख) सम्राट की ओर
(ग) जनता की ओर
(घ) संसार की ओर
उत्तर:
(क) ईश्वर की ओर।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर करें –

खग-मृग बसत ……… हरि अनाथ के नाथ। (नंदनवन, आरोग्यवन)
महिमा घटी समुद्र की ………. वस्यो पड़ोस। (राक्षस, रावन)
रहीम का पूरा नाम ………. था। (अर्द्धरहीम खानखाना, रहीमदास)
रहीम का जन्म सन् ………. में हुआ था। (1556 ई, 1456 ई.)
रहीम की मृत्यु सन् ………. में हुई। (1620 ई०, 1626 ई०)
उत्तर:

आरोग्य वन
रावन
अर्दुरहीम खानखाना
1556 ई.
1626 ई०
MP Board Solutions

III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए – (M.P.2009)

आँखों से बहने वाले आँसू सुख व्यक्त कर देते हैं।
मथते-मथते दही और मठा एक हो जाते हैं।
समुद्र के जल से कुएँ का जल श्रेष्ठ है।
धन में मित्र बनाने की शक्ति नहीं होती है।
भगवान अनाथ के नाथ हैं।
उत्तर:

असत्य
असत्य
सत्य
असत्य
सत्य।
IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 रहिमन विलास img-1
उत्तर:

(i) (ङ)
(ii) (ग)
(iii) (घ)
(iv) (ख)
(v) (क)

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
कौन निरोग रहते हैं?
उत्तर:
पशु-पक्षी निरोग रहते हैं।

प्रश्न 2.
समुद्र और कुएँ में से किसका जल धन्य है?
उत्तर:
कुएँ का।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
समुद्र की महिमा क्यों घटी?
उत्तर:
समुद्र की महिमा पड़ोस में रावण के होने से घटी।

प्रश्न 4.
बिनु पानी के कौन महत्त्वहीन हो जाते हैं? (M.P.2009)
उत्तर:
मोती, मनुष्य और चूना।

प्रश्न 5.
कवि ने सच्चा मित्र किसे कहा है?
उत्तर:
संकट के समय सहायता करने वाले को।

रहिमन विलास लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनेक इलाज करने पर भी व्याधि साथ क्यों नहीं छोड़ती?
उत्तर:
क्योंकि आज के युग में मनुष्य प्राकृतिक वातावरण को छोड़कर कृत्रिम वातावरण में रहना ज्यादा पसंद करता है। इसलिए अनेक इलाज करते हुए भी व्याधि मनुष्य का साथ नहीं छोड़ती।

प्रश्न 2.
मन के दुख को कौन व्यक्त कर देते हैं?
उत्तर:
आँख से निकले आँसू मन के दुख को व्यक्त कर देते हैं।

प्रश्न 3.
‘टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटें सौ बार’ में कवि ने किस बात पर बल दिया है?
उत्तर:
इसमें कवि ने इस बात पर बल दिया है कि सज्जनों (श्रेष्ठ व्यक्तियों) तथा अपने आत्मीयजनों के रूठ जाने पर उन्हें बार-बार मनाना चाहिए।

प्रश्न 4.
समुद्र की महिमा किसके कारण घटी?
उत्तर:
समुद्र की महिमा कुसंग के कारण घटी। उसके पड़ोस में अन्यायी और अहंकारी रावण के बसने (रहने) के कारण ही समुद्र को बँधना पड़ा।

प्रश्न 5.
पशु-पक्षी क्यों निरोग रहते हैं?
उत्तर:
पशु-पक्षी निरोग रहते हैं, क्योंकि उनके स्वामी स्वयं ईश्वर हैं तथा वे प्राकृतिक वातावरण के बीच रहते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
अपने लोगों के नाराज होने पर हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर:
अपने लोगों के नाराज होने पर हमें उन्हें मना लेना चाहिए।

प्रश्न 7.
इस संसार में जीवित रहना कब अनुचित है?
उत्तर:
इस संसार में जीवित रहना तब अनुचित है, जब देने का भाव धीमा पड़ने लगता है या समाप्त होने लगता है।

रहिमन विलास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आत्मसम्मान की रक्षा क्यों की जानी चाहिए?
उत्तर:
मनुष्य को अपने आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि सम्मान के बिना समाज में व्यक्ति का कोई महत्त्व नहीं रहता। सम्मानहीन होने पर मनुष्य का महत्त्व समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 2.
अच्छे मित्र की क्या पहचान है?
उत्तर:
अच्छे मित्र की पहचान यह है कि विपत्ति के समय भी अपने मित्र का साथ नहीं छोड़ता। वह विपत्ति में अपने मित्र का साथ देता है। जबकि अन्य उसका साथ छोड़कर चले जाते हैं।

प्रश्न 3.
रहीम ने कुएँ और समुद्र में से किसके जल को धन्य कहा है और क्यों? (M.P. 2010, 2012)
उत्तर:
रहीम ने कुएँ और समुद्र में से कुएँ के जल को धन्य कहा है क्योंकि यद्यपि कुआँ आकार में छोटा होता है लेकिन प्यासा व्यक्ति उसके जल को पीकर हृदय में तृप्ति का अनुभव करता है जबकि सेमुद्र आकार में विशाल होता है, परंतु व्यक्ति उसका जल पीकर प्यास नहीं बुझा पाता। वह प्यासा ही रह जाता है।

प्रश्न 4.
कवि मोतियों के हार के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर:
कवि मोतियों के हार के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि जिस प्रकार कीमती मोतियों का हार टूट जाता है, तो उसे फिर दूसरे धागे में गूंथकर पहनने योग्य बना लिया जाता है, ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्रों से, सज्जनों से सम्बन्ध-विच्छेद हो जाने पर उन्हें मनाने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 5.
कवि की दृष्टि में धन का महत्त्व क्यों है?
उत्तर:
कवि की दृष्टि में धन का महत्त्व इसलिए है कि धन में बड़ी शक्ति होती है। उससे मित्र बनते हैं। इस प्रकार धन के बिना मित्र भी नहीं बनते हैं। इसलिए धन ही बहुत उपयोगी है।

रहिमन विलास कवि-परिचय

प्रश्न 1.
कवि रहीम का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
कवि रहीम का जन्म लाहौर (वर्तमान पाकिस्तान) में सन् 1556 ई० में हुआ था। पाँच वर्ष की आयु में इनके पिता की मृत्यु हो गई। इनका पालन-पोषण सम्राट अकबर की देख-रेख में हुआ। इनकी कार्यक्षमता से प्रभावित होकर अकबर ने 1572 ई० इन्हें पाटननगर की जागीर और सन् 1576 ई० में गुजरात विजय के बाद गुजरात की सूबेदारी प्रदान की। सन् 1579 ई० में इन्हें ‘मीरअर्ज’ का पद दिया गया। सन् 1583 ई० में इन्होंने जब गुजरात के उपद्रव का दमन किया, तब सम्राट अकबर ने प्रसन्न होकर इन्हें ‘खानखाना’ की उपाधि से नवाजा और पाँच हज़ारी का मनसब बना दिया। सन् 1589 ई० में इन्हें ‘वकील’ की पदवी से सम्मानित किया गया। सन् 1626 ई० में इनका निधन हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ;
रहीम, सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे। वे अरबी, तुर्की, फारसी, संस्कृत और हिंदी के अच्छे ज्ञाता थे, हिन्दुओं के परिचित थे। शास्त्र, लोक संस्कृति और लोक व्यवहार में उन्हें दक्षता प्राप्त थी। वे.कलम के साथ-साथ तलवार के धनी भी थे। वे कवि, योद्धा और दानवीर थे। उनके व्यक्तित्व और काव्य में उदारता, सच्चरित्रता, सहजता और विनम्रता के गुण थे। उनके काव्य का मुख्य विषय श्रृंगार, नीति और भक्ति है। उनकी नीति और शृंगार परक रचनाएँ दरबारी वातावरण के अनुकूल थीं। उन्होंने अपने जीवन के उतार-चढ़ावों से प्राप्त भावों और विचारों को बड़ी सहजता से अपने काव्य में प्रस्तुत किया है।

रचनाएँ:
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘दोहावली’, ‘नगर शोभा’, ‘बरवै नायिका भेद’ और ‘शृंगार सोरण’।

भाषा-शैली:
रहीम ने अरबी, फारसी के विद्वान होते हुए भी ब्रज और अवधी में काव्य रचना की। अवधी भाषा में लिखा गया ‘बरवै नायिका भेद’ उनका सर्वोत्तम ग्रंथ है। उन्होंने दोहा, सोरठा शैली को अपनाया। इनके नीति पर लिखे दोहे बहुत प्रसिद्ध हैं।

महत्त्व:
मुसलमान होते हुए ब्रज और अवधी भाषा में काव्य-रचना करने के कारण हिंदी साहित्य में इन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

रहिमन विलासपाठ का सारांश

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
रहीम के दोहों का सार संक्षेप में अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
रहीम द्वारा रचित नीतिगत दोहे व्यावहारिक पक्ष से संबंधित हैं। पहले दोहे में बताया गया है कि प्राकृतिक जीवन आरोग्यवर्द्धक है। दूसरे दोहे में संदेश दिया गया है कि तृप्ति प्रदान करने वाली वस्तु ही महत्त्वपूर्ण होती है। तीसरे दोहे में संदेश दिया गया है कि कुसंग से बदनामी होती। चौथे दोहे के अनुसार घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता। पाँचवें दोहे में कहा गया है कि संपत्ति में मित्र बनाने की क्षमता होती है।

छठे दोहे में अनुचित बातें करने वाले व्यक्ति को ठीक नहीं बताया गया है। सातवें दोहे में ईश्वर को दानी कहा गया है। आठवें दोहे में बड़े लोगों के व्यक्तित्व की शोभा को क्षमा कहा गया है। नौवें दोहे में सज्जनों के प्रेम व्यवहार की महिमा का वर्णन किया गया है। दसवें दोहे में आत्मसम्मान के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। ग्यारहवें दोहे में सच्चे मित्र की पहचान बताई गई है। सच्चा मित्र वही है, जो विपत्ति में भी सहयोग देता है। इस प्रकार कवि ने अपने दोहों में सत्संगति, मित्रता, सज्जनता आदि के महत्त्व को दर्शाया है।

रहिमन विलास संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
रहिमन बह भेषज करत, व्याधि न छाँड़त साथ।
खग मृग बसत आरोग्य बन, हरि अनाथ के नाथ॥ (M.P. 2011)

शब्दार्थ:

बहु – विभिन्न प्रकार की।
भेषज – औषधि, दवाई।
व्याधि – रोग।
खग – पक्षी।
मृगं – हिरण।
बसत – रहते हैं।
आरोग्य – निरोग।
हरि – ईश्वर।
नाथ – स्वामी।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा कवि रहीम द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम प्राकृतिक वातावरण में रहने के महत्त्व को बताते हुए कहते हैं –

व्याख्या:
रहीमजी जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि मनुष्य अनेक प्रकार की दवाइयों का प्रयोग स्वस्थ रहने के लिए करता है; फिर भी वह अस्वस्थ ही रहता है। रोग साथ नहीं छोड़ते हैं। पक्षी, हिरण आदि पशु-पक्षी वन में रहते हैं। वे सदा निरोग रहते हैं। रोग उनके निकट नहीं आते; क्योंकि उन अनाथों के स्वामी स्वयं ईश्वर हैं। कहने का अभिप्राय यह है कि प्राकृतिक वातावरण में रहने से स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। अतः मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण में रहना चाहिए।

विशेष:

कवि ने मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण में रहने का परामर्श दिया है।
अवधी भाषा का प्रयोग हुआ है।
बहु भेषज, व्याधि, खग, मृग, हीर आदि तत्सम शब्द हैं।
दोहा, छंद का प्रयोग हुआ है।
दृष्टांत अलंकार है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस दोहे में कवि ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर:
इस दोहे में कवि ने प्राकृतिक वातावरण में रहने का संदेश दिया है; क्योंकि ऐसा करने से स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। अतः मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए प्रकृति के निकट रहना चाहिए।

प्रश्न (ii)
पशु-पक्षी बीमार क्यों नहीं पड़ते हैं?
उत्तर:
पशु-पक्षी बीमार इसलिए नहीं पड़ते हैं कि वे प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। इससे वे सदा निरोग रहते हैं।

प्रश्न (iii)
मनुष्य इतनी दवाइयों के सेवन के बाद भी रोगी क्यों बना रहता है?
उत्तर:
मनुष्य इतनी अधिक दवाइयों के सेवने के बाद भी रोगी बना रहता है; क्योंकि वह प्राकृतिक वातावरण से दूर रहता है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
इस दोहे का भाव-सौंदर्य यह है कि प्राकृतिक वातावरण में रहने से आरोग्य में वृद्धि होती है। इसलिए मनुष्य को प्राकृतिक वातावरण में रहना चाहिए। पशु-पक्षी प्राकृतिक वातावरण में रहने के कारण स्वस्थ रहते हैं, जबकि मनुष्य कृत्रिम वातावरण में रहता है और बीमार रहता है। बहुत अधिक दवाइयों के सेवन पर भी बीमारियाँ उसका पीछा नहीं छोड़तीं।

प्रश्न (ii)
इस दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने मनुष्य को निरोग रहने के लिए प्राकृतिक वातावरण में रहने का परामर्श दिया है। यह दोहा अवधी भाषा और तत्सम शब्दों से युक्त है। दृष्टांत अलंकार का प्रयोग हुआ है। गेयता का गुण है। दोहा छंद है।

प्रश्न 2.
धन रहीम जल कूप को, लघु जिय पियत अपाय।
उदधि बड़ाई कौन है, जगत् पिआसो जाय॥ (Page 2)

शब्दार्थ:

धन – धन्य।
कूप – कुआँ।
लघु – छोटा।
पियत – पीकर।
अपाय – तृप्त।
उदधि – समुद्र।
जगत् – संसार, दुनिया।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी कहते हैं कि छोटा होने से किसी का महत्त्व कम नहीं हो जाता। मनुष्य को तृप्ति प्रदान करने वाली वस्तु ही महत्त्वपूर्ण होती है।

व्याख्या:
रहीमजी कह रहे हैं कि एक छोटे-से कुएँ का जल धन्य है क्योंकि उस छोटे आकार के कुएँ का जल पीने से प्राणी अपनी प्यास बुझाकर संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए उसका अपना महत्त्व है। इसके विपरीत सागर चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, वह संसार की प्यास नहीं बुझा पाता है। इसलिए उसका कोई महत्त्व नहीं है। इस प्रकार जो दूसरों के काम आता है, वही बड़ा होता है। संतुष्ट करने वाली वस्तु ही महत्त्वपूर्ण होती है। अतः बड़े समुद्र की अपेक्षा छोटे कुएँ के जल का अधिक महत्त्व है।

विशेष:

प्यासे को तृप्ति प्रदान करने वाले कुएँ का महत्त्व समुद्र से अधिक है।
उदधि बड़ाई कौन में कथन की भंगिमा दर्शनीय है।
अवधी भाषा है। दोहा, छंद है।
वक्रोति और दृष्टांत अलंकार है।
नीतिं संबंधी बातों को अत्यंत सहजता से कहां गया है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने कुएँ के जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तर:
कवि ने कुएँ के जल को धन्य कहा है, क्योंकि उसके जल को पीने से प्यासा तृप्त हो जाता है।

प्रश्न (ii)
सागर और कुएँ में से बड़ा कौन है?
उत्तर:
सागर और कुएँ में आकार की दृष्टि से सागर बड़ा है किंतु महत्त्व और उपयोगिता की दृष्टिं से कुआँ बड़ा है। जो दूसरों के काम आता है, वही बड़ा होता है। कुएँ का जल पीने से प्यासा संतोष का अनुभव करता है इसलिए कुआँ बना है।

प्रश्न (iii)
सागर बड़ा होने पर भी व्यक्ति की प्यास क्यों नहीं बुझा पाता?
उत्तर:
सागर बड़ा होता है। उसमें अथाह जल होता है, किंतु उसका जल खारा होता है और उस खारे जल से प्यास नहीं वुझाई जा सकती।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने इसमें बताया है कि छोटा होने से कोई कम महत्त्वपूर्ण नहीं हो जाता। कुआँ छोटे आकार का होता है, किंतु उसका जल पीने से प्यासे को संतोष का अनुभव होता है। अतः सागर की तुलना में कुएँ का महत्त्व अधिक है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्यासे को संतोष का अनुभव करने वाले कुएँ का महत्त्व सागर से अधिक है। ‘उदधि-बड़ाई कौन’ में कथन की भंगिमा देखने योग्य है। वक्रोति और दृष्टांत अलंकार है। अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। नीति संबंधी बात को अत्यंत सहजता से व्यक्त किया गया है। पद में गेयता का गुण है।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
बसि कुसंग चाहत कुसल, यह रहीम जिय सोस।
महिमा घटी समुद्र की, रावन बस्यो परोस॥ (Page 16) (M.P. 2010)

शब्दार्थ:

बसि – बसना, रहना।
कुसंग – बुरी संगति।
कुसल – हित चाहना, कुशलता चाहना।
जिय – हृदय।
सोस – अफसोस।
महिमा – गर्व।
रावन – रावण।
परोस – पड़ोस में।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इसमें कवि ने कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया है। उनका कहना है कि कुसंग से यश में वृद्धि नहीं होती।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि मनुष्य, दुर्जन लोगों की संगति करता है। वह बुरे लोगों के साथ रहने पर भी हृदय से अपनी कुशलता चाहता है, यह बड़े अफसोस अर्थात् दुख की बात है। लंका में रावण के रहने के कारण ही समुद्र की महिमा कम हुई; अर्थात् दुराचारी रावण के पास बसने पर ही समुद्र का बड़प्पन घटा। लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र में पुल बनाया गया। कहने का भाव यह है कि कुसंग से यश में वृद्धि नहीं होती, अपितु यश कम होता है। अतः कुसंगति से बचना चाहिए।

विशेष:

कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया गया है।
दोहा, छंद है और अवधी भाषा है।
दृष्टांत अलंकार का प्रयोग किया गया है।
नीति-रीति की बात को अत्यंत सहजता से व्यक्त करने की क्षमता देखने योग्य है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे में किसके प्रभाव का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
प्रस्तुत दोहे में कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया गया है। कुसंग के प्रभाव से यश में वृद्धि नहीं होती है।

प्रश्न (ii)
कवि ने किस बात पर दुख व्यक्त किया है?
उत्तर:
कवि इस बात पर दुख व्यक्त किया है कि मनुष्य बुरे लोगों की संगति करता है और हृदय से अपनी कुशलता चाहता है, जो असंभव है।

प्रश्न (iii)
रावण के पड़ोस में बसने का दंड किसे भोगना पड़ा था?
उत्तर:
रावण के पड़ोस में लसने का दंड समुद्र को भोगना पड़ा था। श्रीराम ने लंका पर आक्रमण के लिए समुद्र में पुल बनाया था।

प्रश्न (iv)
कवि ने किससे बचने का परामर्श दिया है?
उत्तर:
कवि ने कुसंगति से बचने का परामर्श दिया है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए, क्योंकि कुसंग में रहने से व्यक्ति के यश में कमी आती है। बुरे लोगों के साथ रहने वाले का कल्याण नहीं हो सकता। रावण के पड़ोस में रहने से समुद्र को दंड भुगतना पड़ा।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने कुसंगति के प्रभाव का वर्णन किया है। दृष्टांत अलंकार है। नीति-रीति की बात को अत्यंत सहज ढंग से व्यक्त किया है। गेयता का गुण है। अवधी भापाहै।

प्रश्न 4.
रहिमन अँसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।
जाहि निकारो गेह ते, कस न भेद कहि देइ॥ (Page 16)

शब्दार्थ:

अँसुआ – आँसू।
नैन – नेत्र, आँखें।
ढर – दुलकंकर।
जिय – हृदय।
गेह – गृह, घर।
कस – क्यों।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी ने इस दोहे में आँसुओं के द्वारा मन का दुख प्रकट होने की बात से घर की बात घर के अंदर ही रखने का संदेश दिया है। घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जिस प्रकार आँखों से आँसू निकलकर व्यक्ति के हृदय की पीड़ा को (दुख को) व्यक्त कर देते हैं। उसी प्रकार जब किसी को घर से निकाला जाता है, तो वह अपने घर के भेद को दूसरों को बता देता है।

विशेष:

रामकथा में रावण द्वारा अपने छोटे भाई विभीषण को लंका से निकाल देने के प्रसंग की ओर संकेत किया गया है। विभीपण ने ही राम को लंका के सारे भेद और राटण की मृत्यु का भेद बताया था। इसी कारण यह कहावत प्रचलित हो गई-घर का भेदी लंका ढाए।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
नीति संबंधी बात को अत्यंत सहजता से व्यक्त करने की क्षमता दर्शनीय है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे में कवि ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर:
प्रस्तुत दोहे में कवि ने आँसुओं को आँखों में रोकने का संदेश देकर घर की बात घर में ही रखने का संदेश दिया है। घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता।

प्रश्न (ii)
इस दोहे में किस प्रसंग की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर:
इस दोहे में कवि ने रावण द्वारा विभीषण को घर से निकाल देने के प्रसंग की ओर संकेत किया है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने आँसुओं को आँखों में ही रोकने का परामर्श दिया है; क्योंकि जिस प्रकार आँखों के आँसू हृदय की वेदना को प्रदर्शित करते हैं उसी प्रकार घर से निकाला हुआ व्यक्ति घर की गोपनीय बातें दूसरों के समक्ष प्रकट कर देता है, इसलिए घर का भेदी कभी अच्छा नहीं होता।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
‘घर का भेदी लंका ढाए’ कहावत को चरितार्थ किया गया है। नीति संबंधी बातों को अत्यंत सहजता,से व्यक्त करने की क्षमता दर्शनीय है। गेयता का गुण है। दोहा, छंद है और अवधी भाषा है। रामायण के प्रसंग का सदुपयोग किया गया है।

प्रश्न 5.
जब लगि वित्त न आपने, तब लगि मित्र न कोय।
रहिमन अंबुज अंबु बिनु, रवि नाहिन हित होय॥ (Page 16)

शब्दार्थ:

लगि – तक।
वित्त – धन।
कोय – कोई भी।
अंबुज – कमल।
अंबु – पानी।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में कवि ने कहा है कि धन में ही मित्र बनाने की शक्ति होती है, किंतु क्या सभी मित्र, मित्रता की कसौटी पर खरे उतरते हैं ऐसा संभव नहीं।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जब तक व्यक्ति के पास न नहीं होता, तब तक कोई मित्र नहीं होता। अर्थात् जब व्यक्ति के पास धन आता है, तो अनेक लोग उसके मित्र बन जाते हैं, परंतु सभी मित्र, मित्रता पर खरे नहीं उतरते। जिस. प्रकार कमल पानी में उत्पन्न होता है किंतु पानी के बिना कमल उत्पन्न नहीं होता। पानी के बिना सूर्य भी उसकी भलाई नहीं कर सकता; अर्थात् जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर पाता। उसी प्रकार धनहीन का कोई मित्र नहीं होता।

विशेष:

कवि ने धन के महत्त्व को प्रतिपादित किया है। उसे मित्र बनाने में सहायक बताया है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
अंबुज अंबु, हित होय में अनुप्रास अलंकार है।
दृष्टांत अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है।
नीति संबंधी बातों को अत्यंत सहजता से कह देने की क्षमता देखने योग्य है।
साम्यभाव पंक्तियाँ:
रहिमन संपति के सगे, बनत बहत बहरीत।
विपत कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत॥
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने मित्र बनाने की शक्ति किसमें बताई है?
उत्तर:
कवि ने मित्र बनाने की शक्ति धन में बताई है क्योंकि धन आने पर मित्र बन जाते हैं। धन की महत्ता को प्रतिपादित किया गया है।

प्रश्न (ii)
जलहीन कमल की रक्षा कौन और क्यों नहीं कर पाता?
उत्तर:
कमल जल में उत्पन्न होता है, किंतु पानी के बिना कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर पाता। ऐसा इसलिए कि जल ही कमल का जीवन है। वह तो पानी के बिना कमल मुरझाकर समाप्त हो जाएगा।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोतर

प्रश्न (i)
दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने धन के महत्त्व को स्पष्ट किया है। व्यक्ति के पास धन आने पर अनेक मित्र बन जाते हैं, किंतु हर मित्र मित्रता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। धनविहीन व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता। जलहीन कमल की तो सूर्य भी रक्षा नहीं कर सकता।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने धन के महत्त्व को प्रतिपादित किया है। अंवुज, अंबु, हित होय में अनुप्रास अलंकार है। दृष्टांत अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है। अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। नीति संबंधी बातों को अत्यंत सहजता से प्रकट किया गया है।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
अन कीन्ही बातें करै, सोवंत जागै जोय।
ताहि सिखाय जगायबो, रहिमन उचित न होय ॥ (Page 16)

शब्दार्थ:

अन कीन्ही – बिना कही हुई, बिना मतलब की, निरर्थक बातें।
सोवत-जागै – सोते-जागते हुए।
जोय – देखता है (जानता है)।
सिखाय – सिखाना।
जगायबो – सोते से उठाना, जागने को प्रेरित करना।
होय – होता है।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी कहते हैं कि सोते-जागते हुए निरर्थक बातें करने वाला व्यक्ति को समझाना उचित नहीं है। यही नीति सम्मत बात उन्होंने इस दोहे में व्यक्त की है।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जो व्यक्ति सोते और जागते हुए अनकही अर्थात् निरर्थक बातें करता है, उस व्यक्ति को समझाना उचित नहीं होता है; क्योंकि ऐसे व्यक्ति को किसी भी प्रकार से समझाया नहीं जा सकता है।

विशेष:

निरर्थक बातें करने वाले व्यक्ति को समझाना मुश्किल है। यह बात कवि ने इस दोहे में व्यक्त की है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
‘जागे-जोय’ में अनुप्रास अलंकार है।
नीति सम्मत बात को अत्यंत सहजता से अभिव्यक्ति दी गई है।
काव्यांश पर आधा विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि कैसे व्यक्ति को समझाना उचित नहीं समझता?
उत्तर:
कवि सोते-जागते, बिना सर-पैर की निरर्थक बातें करने वाले व्यक्ति को समझाना उचित नहीं मानता; क्योंकि ऐसे व्यक्ति को समझाना बड़ा कठिन होता है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
कवि ने नीति संबंधी विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि सोते-जागते हुए निरर्थक बातें करने वाले व्यक्ति को समझाना सच में ही कठिन है।

प्रश्न (ii)
दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
नीति संबंधी गंभीर बातों को सहजता से व्यक्त किया गया है। ‘जागे-जोय’ में अनुप्रास अलंकार है। अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। गेयता है।

प्रश्न 7.
देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन-रैन।
लोग भरम हम पै धरै, याते नीचे नैन॥ (Page 16) (M.P. 2012)

शब्दार्थ:

देनहार – देने वाला।
कोउ – कोई।
और है – दूसरा है।
भेजत – भेजता है।
दिन-रैन – दिन-रात।
भरम – संदेह।
याते – इसी कारण।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। रहीमजी बड़े दानी थे। वे गरीबों को दान देते रहते थे। लोग भ्रमवश यह समझते थे कि रहीमजी ही देते हैं। इसी कारण उनकी आँखें सदा झुकी रहती थीं।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि धन-संपत्ति देने वाला कोई दूसरा है; अर्थात् ईश्वर ही धन-संपत्ति देने वाले हैं और वह रात-दिन देते ही रहते हैं। रहीम उस धन-संपत्ति को दान में बाँटते रहते हैं। दान प्राप्त करने वाले भ्रमवश यह समझते हैं कि रहीमजी ही हमें देने वाले हैं। इसी कारण उनके नेत्र सदा नीचे झुके रहते हैं अर्थात् उनको ही अपना सब कुछ मानते थे।

विशेष:

कवि ने अपनी आँखें झुके रहने का कारण स्पष्ट किया है। वह ईश्वर को ही देने वाला मानता है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
‘नीचे. नैन’ में अनुप्रास अलंकार है।
दोहे में गेयता का गुण विद्यमान है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
रहीमजी ने ‘देनहार कोउ और है’ के द्वारा किसकी ओर संकेत किया है?
उत्तर:
रहीमजी ने इसके द्वारा ईश्वर की ओर संकेत किया है। उनके अनुसार धन-सम्पत्ति देने वाले ईश्वर हैं, जो दिन-रात देते रहते हैं।

प्रश्न (ii)
रहीमजी के नेत्र नीचे क्यों झुके रहते थे?
उत्तर:
रहीमजी गरीबों को दान देते रहते थे। दान प्राप्त करने वाले भ्रमवश यह समझते थे कि रहीम ही हमें देने वाले हैं इसीलिए उनके नेत्र झुके रहते थे।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
रहीमजी दानी थे। वे गरीबों को दान देते रहते थे। उनका मानना था कि ईश्वर ही देने वाले हैं, जबकि दान लेने वाले यह समझते थे कि रहीमजी ही दे रहे हैं। इस शर्म से उनके नेत्र झके रहते हैं।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने आँखें झुके रहने का कारण स्पष्ट किया है। ‘नीचे नैन’ में अनुप्रास अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। सरल भाषा में कवि ने गंभीर भावों को व्यक्त किया है।

प्रश्न 8.
छिमा बड़ेन को चाहिए, छोटन को उत्पात।
का रहीम हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

छिमा – क्षमा करना।
बड़ेन – बड़े लोग।
छोटन – छोटे लोगों।
उत्पात – उपद्रव, ऊधम।
का – क्या।
घट्यो – कम हो गया।
हरि – भगवान विष्णु।
भृगु – एक षि जो ब्रह्मा के पुत्र माने जाते हैं।
लात – पैर।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। कवि ने बड़े लोगों की क्षमा करने की प्रवृत्ति को ही उनके व्यक्तित्व की शोभा बताया –

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि बड़े लोगों के व्यक्तित्व की शोभा क्षमा से होती है, और छोटों अर्थात् बच्चों की ऊधम (उपद्रव) करने में होती है। बड़े लोगों को छोटों के उपद्रव को क्षमा कर देना चाहिए। इसमें उनका बड़प्पन है। इसमें उनकी शोभा है। रहीमजी कहते हैं कि भगवान विष्णु की कौन-सी कीर्ति कम हो गई जब भृगु ऋषि ने उन पर पैर से आघात किया। भृगु ऋषि भगवान विष्णु से छोटे थे, उनके ऊधम (गलती) भगवान ने उन्हें क्षमा कर दिया क्योंकि बड़े लोगों को क्षमा ही शोभा देती है।

विशेष:

बड़े लोगों को छोटों को क्षमा करना ही शोभा देता है। यही भाव व्यक्त किया गया है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
नीति संबंधी बातों को सहजता से कहने की क्षमता दर्शनीय है।
उदाहरण अलंकार है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बड़े, लोगों के व्यक्तित्व की शोभा किससे होती है?
उत्तर:
बड़े लोगों के व्यक्तित्व की शोभा छोटे के उपद्रव को क्षमा करने से ही होती है।

प्रश्न (ii)
छोटों के प्रति बड़ों का क्या कर्तव्य है?
उत्तर:
छोटों के प्रति बड़ों का कर्तव्य है कि वे उनके ऊधम (गलती) को क्षमा कर दें। उनकी बातों को गंभीरता से न लें।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
बड़े लोगों को छोटों को क्षमा करना ही शोभा देता है। यही उनके व्यक्तित्व की शोभा है और यही उनका कर्तव्य है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने बड़े सहज ढंग से बड़ों के प्रति कर्तव्य को समझाया है। उदाहरण अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है।

MP Board Solutions

प्रश्न 9.
टूटे सुजन मनाइए, जौ टूटे सौ बार।
रहिमन फिरि-फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

सुजन – स्वजन (अच्छे लोग)।
पोइए – पिरोइए (पिरोते हैं)।
मुक्ताहार – मोतियों का हार।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम ने सज्जनों तथा अपने लोगों के रूठ जाने पर बार-बार मनाने पखल दिया है।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जिस प्रकार मोतियों के हार के टूट जाने पर मोतियों को फेंका नहीं जाता, बल्कि उन्हें बार-बार धागे में पिरोकर फिर से हार बना लिया जाता है, उसी प्रकारं श्रेष्ठ लोगों तथा अपने लोगों (कुटुम्बी, संबंधी, मित्र आदि) के रूठने या नाराज होने पर उन्हें हर बार मना लेना चाहिए। क्योंकि वे ही हमारे मार्गदर्शक तथा सुख-दुख के साथी होते हैं।

विशेष:

बहुत सादा और सरल तरीके से लोक-व्यवहार की नीति को व्यक्त किया गया है।
‘सुजन’ में श्लेष अलंकार है।
श्रेष्ठ मनुष्यों की मोतियों से उपमां सुंदर है। यहाँ उपमा अलंकार है। ‘फिरि-फिरि’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने सज्जनों के प्रेम की क्या विशेषता बताई है?
उत्तर:
कवि ने सज्जनों के प्रेम की यह विशेषता बताई है कि उनका प्रेम टूटकर भी जुड़ जाता है।

प्रश्न (ii)
रहीमजी ने मनुष्य को क्या सलाह दी है?
उत्तर:
रहीमजी ने मनुष्य को सलाह दी है कि सज्जनों तथा अपने लोगों के रूट जाने पर उन्हें बार-बार मना लेना चाहिए।

प्रश्न (iii)
कवि ने सज्जनों के प्रेम की तुलना किससे और क्यों की है?
उत्तर:
कवि ने सज्जनों के प्रेम की तुलना मोतियों के हार से की है। जिस प्रकार मोतियों के हार के टूटने पर मोती फेंके नहीं जाते, उन्हें बार-बार धागे में पिरोकर फिर से हार बना लिया जाता है, उसी प्रकार श्रेष्ठ तथा अपने लोगों को नाराज होने पर मना लेना चाहिए।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
रहीम ने सज्जनों तथा अपने कुटुंबी, संवंधी, मित्र आदि के नाराज होने पर उन्हें बार-बार मना लेने की सलाह दी है; क्योंकि सज्जनों का प्रेम टूटकर भी जुड़ जाता है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर:
‘सुजन’ में श्लेष अलंकार है। श्रेष्ट व्यक्तियों का मोतियों से उपमा सुंदर है। उपमा अलंकार है। ‘फिरि-फिरि’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है।

प्रश्न 10.
रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

पानी – चमक, सम्मान, जल।
सून – सूना।
मानुष – मनुष्य।
चून – चूना।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम ने कहा है कि व्यक्ति को अपना आत्मसम्मान सदैव बनाए रखना चाहिए।

व्याख्या:
रहीमजी ने यहाँ पानी की तुलना चभक, सम्मान तथा जल से की है। पानी के बिना सब सूना है। पानी के बिना मोती, मनुष्य तथा चूना किसी काम के नहीं हैं। बिना चमक के मोती की कोई कीमत नहीं। चमकहीन माती को कोई नहीं पूछता। बिना सम्मान के मनुष्य जीवन का कोई महत्त्व नहीं है तथा बिना पानी के चूने का उपयोग नहीं किया जा सकता। अतः मनुष्य को सदा अपना आत्मसम्मान बनाए रखना चाहिए। सम्मानरहित मनुष्य का समाज में कोई महत्त्व नहीं होता।

विशेष:

बहुत सहज ढंग से कवि ने आत्मसम्मान के महत्त्व को व्यक्त किया है।
‘पानी’ में श्लेष अलंकार है।
‘सब सून, मोती मानुष’ में अनुप्रास अलंकार है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे में कवि ने मनुष्य को क्या संदेश दिया?
उत्तर:
प्रस्तुत दोहे में कवि ने मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान बनाए रखने का संदेश दिया है; क्योंकि आत्मसम्मान रहित मनुष्य का समाज में कोई महत्त्व नहीं रह जाता। बिना आत्मसम्मान के मुनष्य समाज में नहीं जी सकता है।

प्रश्न (ii)
मोती, मनुष्य और चून के संबंध में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पानी का प्रयोग तीन अर्थों में प्रयोग किया गया है। मोती के संबंध में, आत्मसम्मान और चूने के संबंध में जल, मोती चमक के अभाव में, मनुष्य आत्मसम्मान के बिना तथा जल के बिना चूना अपना महत्त्व खो देते हैं। तीनों के लिए पानी का बड़ा महत्त्व है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
मनुष्य को अपना आत्मसम्मान सदैव बनाए रखना चाहिए। आत्मसम्मान के बिना मनुष्य का समाज में वैसे ही महत्त्व घट जाता है, जिस प्रकार चमक के अभाव में मोती का और पानी के बिना चूने का। ये तीनों पानी के बिना व्यर्थ हैं।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने अत्यंत सहज ढंग से आत्मसम्मान के महत्त्व को स्पष्ट किया है। ‘पानी’ में श्लेष अलंकार है। ‘सव सून, मोती मानुष’ में अनुप्रास अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है। मुक्तक शैली है।

प्रश्न 11.
मथत-मथत माखन रहै, दही मही बिलगाय।
रहिमान सोई मीत है, भीर परे ठहराय॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

मथत-मथत – मथ-मथकर।
मही – छाछ, मट्ठा, गोरस।
बिलगाय – अलग करना।
सोई – वही।
मीत – मित्र।
भीर – संकटकाल में।
ठहराय – ठहरता है।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में रहीम सच्चे मित्र की पहचान बता रहे हैं।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि जिस प्रकार दही को मथ-मथकर छाछ या मट्ठे में से मक्खन निकालकर अलग कर लिया जाता है, उसी प्रकार अनेक मित्रों के मध्य सच्चे मित्र की अलग पहचान हो जाती है। जो मित्र संकट के समय मित्र के साथ खड़ा रहता है, उसका साथ नहीं छोड़ता, वही सच्चा मित्र होता है।

विशेष:

कवि ने अत्यंत सहज ढंग से सच्चे मित्र की पहचान बताई है।
मथत-मथत में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
‘मथत-मथत माखन’ में अनुप्रास अलंकार है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
कवि ने सच्चे मित्र की क्या पहचान बताई है?
उत्तर:
कवि ने सच्चे मित्र की यह पहचान बताई है कि सच्चा मित्र संकट के समय में भी मित्र के साथ खड़ा रहता है। संकट में मित्र को छोड़कर नहीं जाता है।

प्रश्न (ii)
सच्चे मित्र की तलना किससे की गई है?
उत्तर:
सच्चे मित्र की तुलना मक्खन से की गई है। जिस प्रकार दही को मथकर उसके बीच से मक्खन निकाल लिया जाता है, उसी प्रकार मित्रों के मध्य से सच्चे मित्र की भी अलग पहचान हो जाती है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
प्रस्तुत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य-दोहे में सच्चे मित्र की पहचान बताई गई है। सच्चा मित्र वही होता है जो संकट के समय में भी मित्र को नहीं छोड़ता, मित्र के साथ खड़ा रहता है।

प्रश्न (ii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कवि ने अत्यंत सहज ढंग से सच्चे मित्र की पहचान बताई है। ‘मथत-मथत’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। ‘मथत-मथत माखन’ में अनुप्रास अलंकार है। दोहा, छंद है। अवधी भाषा है। गेयता का गुण है।

MP Board Solutions

प्रश्न 12.
तौ ही लौ जीबोभलौ, दीबो होय न धीम।
जग में रहिबो कुचित गति, उचित न होय रहीम॥ (Page 17)

शब्दार्थ:

तों ही – जब तक ही।
जीबो -ज ीवित रहना।
भलौ – अच्छा है।
दीबो – देने की क्रिया या भाव।
धीम – धीमा, लुप्त।
जग – दुनिया, संसार।
कुचित – अनुचित।
होय – होता है।
प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा रहीमजी द्वारा रचित ‘रहिमन-विलास’ से लिया गया है। इस दोहे में कवि ने जीवन की सार्थकता के संबंध में उचित-अनुचित को स्पष्ट किया है।

व्याख्या:
रहीमजी कहते हैं कि इस संसार में जीवित रहना तभी तक सार्थक रहता है जब तक देने का भाव बना रहता है। देने का भाव धीमा पड़ने या लुप्त हो जाने पर जीवित रहना अनुचित है। क्योंकि देने के भाव में ही जीवन की सार्थकता छिपी रहती है।

विशेष:

कवि ने अपने जीवन अनुभव को बड़ी सरलता से व्यक्त किया है।
जीवन की सार्थकता देते रहने में ही है।
दोहा, छंद है। अवधी भाषा है।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
इस संसार में जीवित रहना कब तक उचित है?
उत्तर:
इस संसार में जीवित रहना तभी तक सार्थक रहता है जब तक व्यक्ति में देने का भाव बना रहता है। देने का भाव धीमा पड़ने या लुप्त हो जाने पर जीवित रहना अनुचित है। क्योंकि बिना इसके जीवन जीना पशु के जीवन जीने के समान है।

प्रश्न (ii)
जीवन की सार्थकता किसमें है?
उत्तर:
जीवन की सार्थकता देने के भाव में है, लेने के भाव में नहीं है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (iii)
प्रस्तत दोहे का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
इस दोहे में कवि ने जीवित रहने की सार्थकता तभी तक बताई है जब तक व्यक्ति में देने का भाव बना रहे। देने का भाव समाप्त होने पर जीवित रहना अनुचित है।

प्रश्न (iii)
प्रस्तुत दोहे का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
कवि ने अपने जीवन के अनुभव को बड़ी सरलता से व्यक्त किया है। सरल अवधी भाषा है। दोहा, छंद है। गेयता का गुण है। मुक्तक शैली है।

WWW.MPBOARDINFO.IN

MP Board Results 2022 : म. प्र. बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 20 अप्रैल को जारी होने की संभावना, परीक्षा में पूछे गलत सवालों के मिलेंगे बोनस अंक i


MP Board Class 12th Hindi Book Full Solutions Makrand

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top