MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 सूर के बालकृष्ण (कविता, सूरदास)

सूर के बालकृष्ण पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न
सूर के बालकृष्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

Sur Ke Balkrishna Class 12 Mp Board

प्रश्न 1 . बालक कृष्ण वृंदावन जाने को लालायित क्यों हैं?
उत्तर:-बालक कृष्ण वृंदावन जाने के लिए इसलिए लालायित हैं क्योंकि वह वृंदावन में अनेक प्रकार के फलों को अपने हाथों से तोड़कर खाना चाहते हैं ।।

Sur Ke Balkrishna Summary In Hindi MP Board

प्रश्न 2 . गोचारण हेतु जाने के लिए कृष्ण क्या तर्क देते हैं?
उत्तर:-गोचारण हेतु जाने के लिए कृष्ण तर्क देते हैं कि माँ मुझे तेरी सौगंध कि मुझे न तो गर्मी लगती है, न ही भूख-प्यास सताती है ।। मैं तो गोचारण के लिए अवश्य जाऊँगा ।।

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प्रश्न 3 . यशोदा अपने आपको कृष्ण की धाय क्यों कहती हैं?
उत्तर:-यशोदा ने कृष्ण को जन्म नहीं दिया था ।। उन्होंने केवल उनका पालन-पोषण किया था इसलिए वह स्वयं को कृष्ण की धारा कहती हैं ।।

सूर के बालकृष्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

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प्रश्न 1 . यशोदा ने कृष्ण को वन की क्या-क्या कठिनाइयाँ बताईं? (M . P . 2010)
उत्तर:-यशोदा ने कृष्ण को वन की निम्नलिखित कठिनाइयाँ बताईं –

वन बहुत दूर है ।। तुम छोटे-छोटे पाँवों से चलकर कैसे जाओगे ।।
वन से घर लौटते हुए रात हो जाती है ।।
अतः घर से जाओगे और रात को घर लौटोगे ।। भूख-प्यास से व्याकुल्हो जाओगे ।।
धूप में गायों के पीछे-पीछे घूमते रहने के कारण तुम्हारा कमल के समान कोमल शरीर मुरझा जाएगा ।।

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प्रश्न 2 . बालकृष्ण को देखकर माता यशोदा के हृदय में कौन-कौन-सी अभिलाषाएँ जागती हैं?
उत्तर:-बालकृष्ण को देखकर माता यशोदा के हृदय में कई अभिलाषाएँ जगती हैं, जैसे-कृष्ण घुटनों के बल चलें, उनके दूध के दो दाँत निकलें, तोतली बोली में वे नंद को बाबा और उन्हें माता कहकर पुकारें, आँचल पकड़कर बालहठ करें, अपने हाथों से थोड़ा-थोड़ा खाकर अपना मुख भरें, सभी दुखों को दूर करने वाली अपनी मधुर हँसी बिखेरें ।।

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प्रश्न 3 . यशोदा ने देवकी को क्या संदेश भेजा? (M . P . 2009, 2012)
उत्तर:-यशोदा ने देवकी से संदेश में कहा कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय हूँ ।। मैं तमसे विनती करती हैं कि तुम बालक कृष्ण पर ममता, दया करती रहना ।। उसके प्रति कठोरता का व्यवहार मत करना ।। श्रीकृष्ण को प्रातःकाल माखन-रोटी अच्छी लगती है इसलिए उसे प्रातःकाल माखन रोटी ही देना ।। वह बड़ी मुश्किल से स्नान करता है ।। तुम उसकी सभी फरमाइशों को पूरा करके उसे स्नान के लिए मनाना, तभी वह तेल, उबटन और गर्म पानी से स्नान करेगा अर्थात् उसकी रुचियों और आदतों का ध्यान रखना ।। कृष्ण संकोची स्वभाव का है, अतः वह अपने मुख से कुछ नहीं कहेगा ।। देवकी तुम्हें ही उसकी रुचियों और आदतों का ध्यान रखना पड़ेगा ।।

सूर के बालकृष्ण भाव-विस्तार/पल्लवन

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प्रश्न 1 . निम्नलिखित हाव्य-पंक्तियों की व्याख्या कीजिए –

संदेसौ देवकी सौं कहियौ ।।
हौं तो धाइ तिहारे सुत की, मया करत ही रहियौ॥
जदपि टेव तुम जानति उनकी, तऊ मोहिं कहि आवै ।।
प्रात होत मेरे लाड़ लडैते, माखन रोटी भावै॥

प्रसंग:-
प्रस्तुत पद्यांश भक्तिकालीन सगुण कृष्णभक्ति धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ के मथुरागमन प्रसंग से लिया गया है ।। उद्धव जब वृंदावन से मथुरा वापस जाते समय यशोदा से मिलने जाते हैं तो यशोदा उन्हें देवकी के नाम संदेश भेजती हैं ।। यशोदा उद्धव से कहती हैं –

Mp Board 12th Hindi Book Pdf Download व्याख्या:-
हे राहगीर ! कृष्ण की जननी देवकी को मेरा यह संदेश देना कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय मात्र हूँ, कृष्ण की माता तो तुम ही हो ।। धाय, बच्चे के संबंध में उसकी माँ से कुछ कहे यह उचित नहीं लगता ।। परंतु फिर भी मैं यह विनती करती हूँ कि तुम बालक पर ममता, दया करती रहना ।। अर्थात् उसके प्रति कठोरता का व्यवहार मत करना ।। यद्यपि मैं जानती हूँ कि तुम कृष्ण की सभी रुचियों-आदतों से भली-भाँति परिचित हो, परंतु फिर भी मुझसे रहा नहीं जाता, इसलिए कह रही हूँ कि प्रातःकाल मेरे लाड़ले बालक कृष्ण को माखन-रोटी का नाश्ता ही अच्छा लगता है ।। अतः प्रातःकाल नाश्ते में उसे माखन-रोटी ही देना ।।

विशेष:-

यशोदा मातृ हृदय का अत्यंत मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है ।।
लाड़ लडैतें में अनुप्रास अलंकार है ।।
पद्यांश में ब्रजभाषा तथा गेयता है ।।
सूर के बालकृष्ण भाषा-अनुशीलन

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प्रश्न 1 . निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन समानार्थी शब्द लिखिए –

पग, कमल, जननी, गगन ।।
उत्तर:-

पग – पैर, पाद, चरण ।।
कमल – राजीव, जलज, पंकज ।।
जननी – माता, माँ, अम्बा ।।
गगन – आकाश, नभ, अम्बर ।।

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प्रश्न 2 . दिए गए मुहावरों के अर्थ लिखते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

बाल-बाल बचना, सर धुनना, कान का कच्चा, नाक में दम करना, मुँह की . खाना, पेट में चूहे दौड़ना, पाँचों अंगुली घी में होना ।। (M . P . 2011)
उत्तर:-
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प्रश्न 3 . निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों को छाँटिए –
मुख, दाँत, दूध, घर, जननी, साँझ, जनि, तनक, कमल, पथिक, गैया, टेव ।।
उत्तर:-
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सूर के बालकृष्ण योग्यता-विस्तार

स्वाति (हिन्दी विशिष्ट) कक्षा-12 Pdf Download MP Board
प्रश्न 1 . गाय चराते हुए कृष्ण का एक सुन्दर चित्र बनाने का प्रयास कीजिए तथा उसे चित्र प्रदर्शनी में प्रदर्शित कीजिए ।।
उत्तर:-
छात्र स्वयं करें ।।

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प्रश्न 2 . वात्सल्य विषयक अन्य कवियों की रचनाओं का संकलन कीजिए ।।
उत्तर:-
छात्र तुलसीदास, सुभद्रा कुमारी चौहान आदि की कविताओं का संकलन कर सकते हैं ।।

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प्रश्न 3 . कृष्ण की बाल लीलाओं से संबंधित चित्रों का संकलन कर एलबम बनाइए ।।
उत्तर:-
कृष्ण की बाल लीलाओं के चित्र बाजार में उपलब्ध हैं ।। छात्र उनको प्राप्त कर एलबम स्वयं बना सकते हैं ।।

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प्रश्न 4 . आधुनिक काल के उन कवियों की सूची बनाइए जिन्होंने कृष्ण-चरित्र को अपने काव्य का विषय बनाया ।।
उत्तर:-
छात्र अपने विषय अध्यापक की सहायता से सूची स्वयं बनाएँ ।।

सूर के बालकृष्ण परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण
I . वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

Hindi Solution Class 12 Mp Board प्रश्न 1 .
‘आजु मैं गाइ चरावन जैहौं’ पद के रचयिता हैं –
(क) नन्ददास
(ख) मीराबाई
(ग) सूरदास
(घ) तुलसीदास
उत्तर:-
(ग) सूरदास ।।

प्रश्न 2 .
ब्रज के लोग अत्यंत भयभीत क्यों हो गए?
(क) कंस की ललकार सुनकर
(ख) श्रीकृष्ण की चीख सुनकर
(ग) वादलों की गर्जना सुनकर
(घ) कालिया नाग की फुफकार सुनकर
उत्तर:-
(ग) बादलों की गर्जना सुनकर ।।

प्रश्न 3 .
सूरदास किसके अनन्य भक्त थे?
(क) श्रीकृष्ण के
(ख) श्रीराम के
(ग) भगवान विष्णु के
(घ) भगवान महादेव के
उत्तर:-
(क) श्रीकृष्ण के ।।

प्रश्न 4 .
यशोदा श्रीकृष्ण को अकेला कहाँ छोड़कर गईं?
(क) आँगन में
(ख) णलने में
(ग) नंद के पास
(घ) चौक में
उत्तर:-
(क) ऑगन में ।।

प्रश्न 5 .
‘पर्यो आपनी टेक’ में ‘टेक’ शब्द का अर्थ है –
(क) टिकना
(ख) ठिकाः
(ग) हठ
(घ) हटा
उत्तर:-
(ग) हठ ।।

प्रश्न 6 .
‘लाड़ लडैतें’ का अर्थ है –
(क) प्यार से लड़ना
(ख) लाड़ला बालक
(ग) लाड़-प्यार करना
(घ) लाड़ लड़ाना
उत्तर:-
(ख) लाड़ला बालक ।।

प्रश्न 7 .
यशोदा श्रीकृष्ण को नहाने के लिए कैसे मनाती हैं?
(क) माखन-रोटी देकर
(ख) जो कुछ माँगते उसे देकर
(ग) लाड़-प्यार से पुचकारकर
(घ) जबरदस्ती पकड़कर
उत्तर:-
(ख) जो कुछ माँगते उसे देकर ।।

II . रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:-

सूरदास ने श्रीकृष्ण के ……… . का वर्णन किया है ।। (बालरूप/यौवनरूप)
माँ ……… ने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया था ।। (देवकी/यशोदा)
बड़े होने पर श्रीकृष्ण ……… . के राजा बन गए ।। (बनारस/मथुरा)
श्रीकृष्ण को खाने में ……… . पसंद था ।। (माखन-रोटी/दही-रोटी)
सूरदास ने अपनी कविता में …… . . भाषा का प्रयोग किया है ।। (अवधी/ब्रज)
सूरदास ……… . अनन्य भक्त थे ।। (श्रीराम के/श्रीकृष्ण के)
उत्तर:-

बालरूप
यशोदा
मथुरा
माखन-रोटी
ब्रज
श्रीकृष्ण के ।।
III . निम्न कथनों में सत्य/असत्य छाँटिए:-

श्रीकृष्ण स्नान करने के बड़े शौकीन थे ।।
माँ देवकी, उद्धव के माध्यम से यशोदा को संदेश भेजती हैं ।।
माँ यशोदा श्रीकृष्ण को बहुत प्यार करती थीं ।।
श्रीकृष्ण इतने संकोची थे कि माँ यशोदा की हर बात चुपचाप मान – लेते थे ।।
श्रीकृष्ण गाय चराने के लिए बन जाने को लालायित थे ।।
सोइ-सोइ, क्रम-क्रम में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।।
ब्रज के लोग बादलों की गर्जना सुनकर अत्यंत भयभीत हो गए ।। (M . P . 2009)
उत्तर:-

असत्य
असत्य
सत्य
असत्य
सत्य
सत्य
सत्य ।।
IV . निम्न के सही जोड़े मिलाइए:-

V . निम्न प्रश्नों के उत्तर एक शब्द अथवा एक वाक्य में दीजिए:-

श्रीकृष्ण की असली माँ कौन थीं?
श्रीकृष्ण का स्वभाव कैसा था?
माँ यशोदा किसके माध्यम से देवकी के पास संदेश भेजती हैं?
‘कमल बदन’ में कौन-सा अलंकार है?
श्रीकृष्ण ने क्या निश्चय कर लिया है?
उत्तर:-

श्रीकृष्ण की असली माँ देवकी थीं ।।
श्रीकृष्ण का स्वभाव संकोची था ।।
उद्धव के माध्यम से ।।
रूपक अलंकार ।।
श्रीकृष्ण ने वन जाकर गाय चराने का निश्चय कर लिया है ।।
VI . निम्न कथन के लिए सही विकल्प चुनिए:-

प्रश्न 1 .
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपनी गाय चराने के लिए वन में जाने का निश्चय सुनाया ताकि –
(क) अपने साथियों के साथ खेलकूद सकें ।।
(ख) अपनी मनमानी कर सकें ।।
(ग) अनेक प्रकार के फल अपने हाथों से तोड़कर खा सकें ।।
(घ) उन्हें किसी प्रकार की चिन्ता न हो सके ।।
उत्तर:-
(ग) अनेक प्रकार के फल अपने हाथों से तोड़कर खा सकें ।।

सूर के बालकृष्ण लघु उत्तरीय प्रश्न .

प्रश्न 1 .
सूरदास ने श्रीकृष्ण के किस रूप का वर्णन किया है?
उत्तर:-
सूरदास ने श्रीकृष्ण के बाल-रूप का वर्णन किया है ।।

प्रश्न 2 .
‘जसुमति मन अभिलाष करै’ पद में यशोदा की किन अभिलाषाओं का चित्रण किया गया है?
उत्तर:-
इस पद में यशोदा की शिशुपरकी अभिलाषाओं का चित्रण किया है ।।

प्रश्न 3 .
यशोदा किसके द्वारा किसे संदेश भेजती हैं?
उत्तर:-
यशोदा कृष्ण के अनन्य मित्र उद्धव के द्वारा देवकी को संदेश भेजती हैं ।।

प्रश्न 4 .
कृष्ण अपनी किस बात पर अड़े हुए हैं?
उत्तर:-
कृष्ण गाय चराने के लिए जाने की बात पर अड़े हुए हैं ।।

प्रश्न 5 .
माता यशोदा कृष्ण की किस प्रकार की हँसी की अभिलाषा करती हैं?
उत्तर:-
माता यशोदा कृष्ण के समस्त दुखों को दूर करने वाली मधुर हँसी की अभिलाषा करती हैं ।।

प्रश्न 6 . श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि की क्या विशेषता है?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि की यह विशेषता है कि उससे सारे दुख दूर हो जाते हैं ।।

प्रश्न 7 . श्रीकृष्ण क्या देखकर भाग जाया करते थे और क्यों?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण तेल, उबटन और गर्म पानी देखकर भाग जाया करते थे ताकि नहाना न पड़े ।।

प्रश्न 8 . यशोदा ने श्रीकृष्ण का निश्चय सुनकर क्या किया?
उत्तर:-
यशोदा ने श्रीकृष्ण का निश्चय सुनकर उन्हें समझाने का प्रयास किया ।।

सूर के बालकृष्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 . मथुरा जाकर कृष्ण राजा हो गए, फिर भी . माता का हृदय उन्हें किस रूप में अनुभव करता है?
उत्तर:-
मथुरा जाकर कृष्ण राजा बन गए ।। निस्संदेह वे बड़े हो गए ।। पूरी मथुरा की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर उठा ली लेकिन माता का हृदय उन्हें कभी भी बड़ा स्वीकार नहीं करता ।। उनका हृदय तो सदैव अपने पुत्र को शिशु रूप में ही अनुभव करता है ।। माता यशोदा के लिए तो वे सदैव बच्चे ही रहते हैं ।।

प्रश्न 2 . यशोदा और देवकी में से कृष्ण पर किसका अधिकार अधिक है औरक्यों?
उत्तर:-
यशोदा और देवकी में से कृष्ण पर यशोदा का अधिकार अधिक है ।। देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया था, परंतु उनका पालन-पोषण करने के लिए उन्हें यशोदा नर से नारायण के पास भेज दिया था ।। यशोदा ने बड़े लाड़-प्यार से कृष्ण का पालन-पोषण किया ।। इस कारणं कृष्ण पर उनका अधिकार अधिक है, न कि देवकी का ।।

प्रश्न 3 . यशोदा ने देवकी को क्या संदेश भेजा? (M . P . 2009, 2012)
उत्तर:-
यशोदा ने देवकी को यह संदेश भेजा कि मैं तो कृष्ण का पालन-पोषण करने वाली धाय थी, लेकिन तुम तो वास्तविक माँ हो इसलिए उस पर दया करते रहना ।। कृष्ण को मक्खन-रोटी बहुत पसंद है ।। वह गर्म जल से स्नान नहीं करना चाहता है ।। वह तेल-उबटन देखकर भागने लगता है ।। मैं तो उसकी इच्छानुसार उसे सारी चीजें देती थी ।। तुम भी उसकी इच्छाओं का ध्यान रखना ।।

प्रश्न 4 . श्रीकृष्ण ने माता यशोदा से क्या हठ किया?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा से यह हठ किया कि वह वन में अवश्य जाएँगे ।। उन्होंने तर्क देकर कहा-माँ! तेरी कसम, वंन में मुझे न गरमी, न भूख, न प्यास और न ही कोई चीज परेशान करेगी ।। इसलिए मैं वन में अवश्य जाऊँगा ।।

सूर के बालकृष्ण कवि-परिचय

प्रश्न 1 . सूरदास का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।।
उत्तर:-
जीवन-परिचय:-
सूरदासजी भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा के प्रमुख कवि थे ।। वे कृष्ण भक्त थे ।। उनका जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी को विक्रम संवत 1535 (सन् 1478 ई०) रुनकता नामक गाँव में हुआ था ।। कुछ विद्वानों का मत है कि सूर का जन्म दिल्ली के पास सीही नामक ग्राम में एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था ।। सूरदासजी विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित अष्टछाप के अग्रणी कवि थे ।। वे वृंदावन के गऊघाट पर जाकर रहने लगे थे ।। वहाँ वे भक्तिमय विनय के पद गाते थे, जिनमें दैन्य भाव की प्रधानता थी ।। वल्लभाचार्य ने इन्हें पुष्टिमार्ग में दीक्षित किया और भगवद्लीला से परिचित कराया ।। उनके आदेश से आप ‘गोकुल में श्रीनाथजी के मंदिर में कीर्तन करने लगे और आजन्म वहीं रहे ।। उनका देहावसान विक्रम संवत 1642 में हो गया ।।

साहित्यिक विशेषताएँ:-
कहा जाता है कि सूरदास जन्मांध थे ।। वे बहुश्रुत, अनुभव संपन्न, विवेकशील और संवेदनशील व्यक्तित्व के स्वामी थे ।। परंतु उनके काव्य में प्रकृति और श्रीकृष्ण की लीलाओं आदि का वर्णन देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वे जन्मांध थे ।। उन्होंने कृष्ण के जन्म से लेकर मथुरा जाने तक की कथा और कृष्ण की विभिन्न लीलाओं से संबंधित अत्यंत मनोहर पदों की रचना की है ।। श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन उनकी सहजता, मनोवैज्ञानिकता और स्वाभाविकता के कारण अद्वितीय है ।। वे मुख्यतः वात्सल्य एवं शृंगार के कवि थे ।। उनके काव्य में वात्सल्य, माधुर्य एवं सख्य भाव की धारा सतत प्रवाहमान रही है ।।

रचनाएँ:-
सूरसागर, सूर सारावली और साहित्य लहरी ।।

1 . भाषा-शैली:-
कवि सूरदास की भाषा ब्रजभाषा है ।। साधारण बोलचाल की भाषा को परिष्कृत कर उन्होंने उसे साहित्यिक रूप प्रदान किया है ।। उनके काव्य में ब्रजभाषा का स्वाभाविक, सजीव एवं भावानुकूल प्रयोग है ।।

2 . अलंकार विधान:-
सूर का अलंकार विधान उत्कृष्ट है ।। उसमें शब्द चित्र उपस्थित . करने एवं प्रसंगों की वास्तविक अनुभूति कराने को पूर्ण क्षमता है ।। उनके काव्य में अन्य अनेक अलंकारों के साथ उपमा, उत्प्रेक्षा और रूपक का कुशल प्रयोग हुआ है ।। उनकी भाषा में मुहावरों और लोकोक्तियों का सहज प्रयोग हुआ है ।।

3 . शैली:-
सूर के सभी पद गेय हैं और किसी न किसी राग से संबंधित हैं ।। उनके पदों में काव्य और संगीत का अपूर्व संगम है ।।

4 . महत्त्व:-
हिंदी साहित्य में सूरदास का महत्त्वपूर्ण स्थान है ।। वे सगुण कृष्ण भक्ति-धारा के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कवि थे ।। उनके काव्य में भक्ति, काव्य और संगीत की त्रिवेणी के दर्शन होते हैं ।। उन्होंने कृष्ण की बाल छवि, स्वभाव, बाल क्रीड़ाओं आदि का सरल, सहज, माधुर्यपूर्ण वर्णन किया है ।। उनके काव्य में बालक कृष्ण के प्रति नन्द-यशोदा के स्नेह का हृदयग्राही चित्रण दृष्टिगोचर होता है ।। उनका वात्सल्य वर्णन विश्व साहित्य की अमूल्य निधि है ।। हिंदी साहित्यजगत् में सूरदासजी सदा सूर्य की भाँति प्रकाशमान रहेंगे ।।

सूर के बालकृष्ण’ पाठ का सारांश

प्रश्न 1 .
‘सूरदास के बालकृष्ण’ पदों का सार लिखिए ।।
उत्तर:-
पहले पद में माँ यशोदा की शिशुपरक अभिलाषा का वर्णन किया गया है ।। माँ यशोदा की अभिलाषा है कि कब कृष्ण घुटनों के बल चलेंगे, कब उनके दूध के दाँत दिखेंगे, कब वे तोतली बोली में बोलेंगे और नंदजी को बाबा कहकर और उन्हें माँ कहकर संबोधित करेंगे, कब वे आँचल खींचकर झगड़ा करेंगे, हठ ठानेंगे, कब अपनी मधुर हँसी बिखेरेंगे और कब अपने मुँह को अपने हाथों से भरेंगे ।। इस बीच यशोदाजी श्रीकृष्ण को आँगन में अकेला छोड़कर कुछ काम करने चली गईं और आकाश में बादल गरजने लगे ।। सूरदासजी कहते हैं कि गर्जना सुनकर ब्रज के सभी लोग बहुत भयभीत हो गए ।।

दूसरे पद में श्रीकृष्ण थोड़े बड़े हो जाते हैं और अपनी माँ से वन में गाय चराने के लिए जाने की हठ करते हैं ।। माँ उन्हें समझाती हैं कि तुम छोटे-छोटे पैरों से कैसे चलोगे, सुबह जाओगे और शाम को घर लौटोगे ।। धूप-गर्मी में तुम्हारा कोमल शरीर कुम्हला जाएगा ।। लेकिन श्रीकृष्ण के भी अपने तर्क हैं ।। वे उन तर्कों का हवाला देकर गाय चराने के लिए वन जाने की बात दोहराते हैं ।।

तीसरे पद में माँ यशोदा, उद्धव के माध्यम से देवकी को संदेश भेजती हैं ।। यद्यपि कृष्ण अब राजा हैं किंतु माँ का हृदय तो सदैव अपने पुत्र को शिशु रूप में अनुभव करता है ।। वे संदेश भेजती हैं कि कृष्ण को सुबह माखन-रोटी अच्छी लगती है ।। उबटन करके, उसे गर्म पानी से नहाना अच्छा नहीं लगता ।। वे जो कुछ माँगते हैं, उन्हें देती हैं ।। इसमें माँ का वात्सल्य भाव प्रकट हुआ है ।।

सूर के बालकृष्ण संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1 .
जसुमति मन अभिलाष करै ।।
कब मेरो लाल घुटुरुवनि रेंगै, कब धरनी पग द्वैक धरै॥
कब द्वै दाँत दूध के देखों, कब तोतरै मुख बचन झरे ।।
कब नंदहिं बाबा कहि बोलें, कब जननी कहि मोहि ररै॥
कब मेरो अँचरा गहि मोहन, जोइ-सोइ कहि मोसौं झगरे ।।
कब धौं तनक-तनक कछु खैहैं, अपने कर सौं मुखहिं भरै ।।
कब हँसि बात कहैगौ मोसौं, जा छबि तैं दुख दूर हरै ।।
स्याम अकेले आँगन छाँडै, आपु गई कछु काजु धरै॥
इहि अंतर अँधवाइ उठ्यो इक, गरजत गगन सहित घहरै ।।
सूरदास ब्रज-लोग सुनत धुनि, जो जहँ-तहँ सब अतिहि डरै॥ (Page 1)

शब्दार्थ:-

जसुमति – माता यशोदा ।।
अभिलाष – इच्छा, चाहना ।।
लाल – पुत्र (श्रीकृष्ण) ।।
घुटुरुवनि – घुटनों के बल ।।
धरनी – पृथ्वी ।।
पग – पैर ।।
द्वैक – दो, एक ।।
तोतरें – तोतला ।।
झरै – निकलें ।।
अँचरा गहि – आँचल पकड़कर ।।
मोसौं – मुझसे ।।
तनक-तनक – छोटे-छोटे ।।
कर – हाथ ।।
काजु – काम ।।
अंतर – बीच ।।
अँधवाइ – आँधी ।।
गगन – आकाश ।।
सुनत – सुनना ।।
अतिहि – अत्यधिक ।।
प्रसंग:-
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से लिया गया है ।। इस पद में माता यशोदा की शिशुपरक अभिलाषा का चित्रण किया है ।। माता यशोदा चाहती हैं कि श्रीकृष्ण घुटनों के बल चलें और वे बोलना सीखकर उन्हें तोतली भाषा में संबोधित करें ।। अपनी मधुर हँसी बिखेरें ।। माँ की इन आकांक्षाओं, शिशु की भाव-भंगिमाओं और चेष्टाओं में वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है ।।

व्याख्या:-
श्रीकृष्ण की आयु सात-आठ मास की होगी ।। माता यशोदा उन्हें देखकर अपने मन में अभिलाषा करती हैं, वह चाहती हैं कि कब उनका पुत्र कृष्ण घुटनों के बल रेंगना सीखेगा और कब पृथ्वी पर अपने दो-एक पग धर कर चलेगा ।। अर्थात्! माता यशोदा की आकांक्षा है कि श्रीकृष्ण जल्दी से घुटनों के बल चलें फिर खड़े होकर अपने पैरों से चलें ।। माता यशोदा चाहती हैं कि बालकृष्ण के मुख में दूध के दो दाँत दिखाई दें अर्थात् श्रीकृष्ण के दूध के दाँत निकलें और उनके मुख से तोतली भाषा में शब्द निकलें ।। वे अपनी तोतली भाषा में नंद को बाबा कहकर पुकारें और उन्हें तोतली बोली में माता कहकर संबोधित करें ।।

कब वे मेरा आँचल पकड़कर, जोइ-सोइ कहकर मुझसे झगड़ा करेंगे अर्थात् माता यशोदा की इच्छा है कि श्रीकृष्ण अपनी तोतली बोली में नंद को बाबा और मुझे माता कहकर पुकारें तथा मेरा आँचल पकड़कर मुझसे झगड़ा करें, बाल-हठ करें ।। कब वे हँसकर मुझसे अपनी बात कहेंगे अर्थात् कब अपनी मधुर हँसी बिखेरेंगे, उनकी हँसीयुक्त छवि को देखकर मेरे समस्त दुख दूर हो जाएंगे ।। यह अभिलाषा करती हुई माता यशोदा श्रीकृष्ण को घर के आँगन में खेलता हुआ छोड़कर, घर का कुछ काम करने के लिए अंदर चली गईं ।। इसी बीच एक आँधी उठी और आकाश में गर्जना करते हुए बादल छा गए ।। कवि सूरदास कहते हैं कि ब्रज के लोग बादलों की गर्जना को सुनकर, जो जहाँ था वहीं सब अत्यंत भयभीत हो उठे ।।

विशेष:-

इस पद में माँ की शिशुपरक अभिलाषाओं का बड़ा यथार्थ चित्र हुआ है ।। प्रत्येक माता चाहती है कि उसका बाल अथवा पुत्र जल्दी से घुटनों के बल चले, फिर पैदल चले ।। उसके दूध के दाँत निकलें और वह तोतली बोली में उसे पुकारे, आँचल पकड़कर बालहठ करे तथा अपने हाथों से अपना मुँह ।। यहाँ माता के हृदय का यथार्थ
वर्णन हआ है ।।
मनोविज्ञान की सुंदर अवधारणा हुई है ।।
अंतिम पंक्तियों में प्रकृति की कठोरता का भी चित्रण हुआ है ।।
द्वै दाँत दूध के देखों, दुख दूर, अकेले आँगन, कछु काजु, अंतर अँधवाइ, गरजत गगन में अनुप्रास अलंकार है ।।
‘तनक-तनक’ में पुनरुक्ति अलंकार है ।।
ब्रजभाषा की सरसता, सरलता तथा पद में गेयता है ।।
माँ की आकांक्षाओं, शिशु की भाव-भंगिमाओं और चेष्टाओं में वात्सल्य भाव का चित्रण है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i) यशोदा अपने मन में क्या-क्या अभिलाषा करती हैं?
उत्तर:-
यशोदा की उत्कट अभिलाषा है कि उनका पुत्र घुटनों के बल चले, फिर अपने पैरों के बल ।। उसके दूध के दाँत निकलें और वह अपने मुख से तोतली भापा बोले और नंद को बाबा कहकर तथा मुझे माता कहकर पुकारे ।।

प्रश्न (ii)
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण की हँसीयुक्त छवि से सारे दुख दूर हो जाते हैं ।।

प्रश्न (iii)
आकाश में बादल गरजने का ब्रज के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:-
आकाश में बादल गरजने से ब्रज के सभी लोग बहुत भयभीत हो गए ।।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:-
इस पद में माता यशोदा की शिशुपरक अभिलाषा का चित्रण किया गया है ।। माँ यशोदा चाहती हैं कि उनका कृष्ण जल्दी से जल्दी घुटनों के बल चले, तोतली बोली में उन्हें माँ कहकर और नंद को बाबा कहकर संबोधित करे, और अपना बाल सुलभ हठ दिखाए ।। दुखों को दूर करने वाली हँसी बिखेरे ।। माँ की इन आकांक्षाओं, शिशु की भाव-भंगिमाओं, चेष्टाओं द्वारा वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है ।।

प्रश्न (ii)
पद का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:-
इस पद में माँ यशोदा की शिशुपरक इच्छा तथा अंतिम पंक्तियों में प्रकृति के कठोर रूप का चित्रण हुआ है ।। द्वै दाँत दूध के देखों, दुख दूर, अकेले आँगन, कछ काजु, अंतर अँधवाइ, गरजत गगन में अनुप्रास अलंकार है ।। ‘तनक-तनक’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।। सरल, सरस तथा स्वाभाविक ब्रजभाषा है ।। पद में गेयता, लय और तुक का प्रयोग किया गया है ।।

प्रश्न 2 .
आजु मैं गाइ चरावन जैहौं ।।
वृंदावन के भाँति-भाँति फल अपने कर मैं खैहौं ।।
ऐसी बात कहौ जनि बारे, देखो अपनी भाँति ।।
तनक-तनक पग चलिहौं कैसें, आवत है है राति ।।
प्रात जात गैया लै चारन, घर आवत हैं साँझ ।।
तुम्हरौ कमल बदन कुम्हिलैहैं, रेंगति घामहिं माँझ ।।
तेरी सौं मोहि धाम न लागत, भूख नहीं कछु नेक ।।
सूरदास प्रभु को न मानत पर्यो आपनी टेक ।। (Page 2)

शब्दार्थ:-

आजु – आज ।।
गाइ – गाय ।।
चरावन – चराने के लिए ।।
जैही – जाऊँगा ।।
कर – हाथ ।।
खैहौं – खाऊँगा ।।
जनि – मत ।।
बारे – बालक ।।
भाँति – तरह ।।
तनक – छोटे, लघु ।।
पग – पैर ।।
आवत – आना ।।
कमल बदन – कमल के समान कोमल शरीर ।।
कुम्हिलैहैं – मुरझाना, थक जाना ।।
रेंगति – धीरे-धीरे चलना ।।
माँझ – मध्य ।।
सौं – शपथ, सौगंध, कसम ।।
घाम – धूप, गर्मी ।।
टेक – हट ।।
प्रसंग:-
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से लिया गया है ।। इस पद में कवि ने श्रीकृष्ण की बालसुलभ इच्छा का, माँ की ममता और बच्चे को समझाकर रोकने के प्रयास के साथ-साथ बालहठ का भी सुन्दर चित्रण किया है ।। श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से ‘अपनी इच्छा एवं निश्चय व्यक्त करते हुए कहते हैं –

व्याख्या:-
माँ, मैंने निश्चय कर लिया है कि आज मैं वन में गौएँ चराने जाऊँगा ।। आज मुझे वह अवसर उपलब्ध होगा जिससे मैं वृंदावन के अनेक प्रकार के फल अपने हाथ से तोड़कर खाऊँगा ।। श्रीकृष्ण के उक्त निश्चय को सुनते ही यशोदा बोलीं-मेरे लाड़ले! तुम अभी बच्चे हो, अपनी उम्र देखो ।। बड़ों की देखा-देखी करने की अभी मत सोचो ।। वन के कष्टों का वर्णन करती हुई यशोदा बोलीं-तुम्हारे पैर छोटे-छोटे हैं और वन बहुत दूर तुम चलकर कैसे जा पाओगे? फिर आने के समय काफी गहरी रात और घना अँधेरा छा चुका होता है ।। ऐसा कभी-कभार नहीं होता, अपितु प्रतिदिन होता है ।।

प्रतिदिन ही ग्वाल-बाल प्रातःकाल गायों को लेकर जाते हैं और सायंकाल बहुत देर से लौटते हैं ।। जिस प्रकार ग्वाल-बाल प्रतिदिन गायों के पीछे-पीछे धूप-गर्मी में चलते हैं, उस प्रकार चलने से तो तुम्हारा कमल जैसा कोमल शरीर एक ही दिन में कुम्हला जाएगा ।। यशोदा द्वारा वर्णित कठिनाइयों को सुनकर श्रीकृष्ण बोले-माँ, मुझे तेरी कसम, मुझे गर्मी, भूख, प्यास, कुछ भी परेशान नहीं करेगी ।। मैं तो आज गोचारण के लिए वन में अवश्य जाऊँगा ।। सूरदासजी कहते हैं कि भगवान् कृष्ण माँ का कहना नहीं मानते ।। वे अपने हठ पर अडिग भाव से टिके हुए हैं ।।

विशेष:-

इस पद में बाल मनोविज्ञान का बड़ा ही यथार्थ वर्णन हुआ है ।। बच्चे बड़ों की नकल करने अथवा उसकी देखा-देखी करने को उत्सुक रहते हैं ।। ग्वाल-बाल जब सायंकाल घर लौटने पर दिनभर के वन-विहार के अनुभव सुनाते होंगे तो श्रीकृष्ण का मन भी उन्मुक्त विहार के लिए मचलता होगा ।। इसकी प्रतिध्वनि इस पंक्ति में हुई है-“वृंदावन के भाँति-भाँति फल अपने कर मैं खैहौं ।। ” इसके साथ ही मातृ हृदय का भी यथार्थ वर्णन हुआ है ।। माँ की दृष्टि में बच्चा कितना ही बड़ा हो जाए, वह बच्चा ही रहता है ।। इस प्रकार बाल मनोविज्ञान और मातृ मनोविज्ञान दोनों का ही सुंदर चित्रण हुआ है ।।
पद में माँ-बेटे के मध्य संवादात्मकता ने कथ्य को सजीव एवं चित्रात्मक बना दिया है ।।
‘तेरी सौं’ के द्वारा तत्कालीन समाज में माँ की कसम की महत्ता को अंतिम निर्णय की सूचना के रूप में चित्रित किया गया है ।।
‘कमल बदन’ में रूपक अलंकार है ।।
भाँति-भाँति, तनक-तनक में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।।
पद में ब्रजभाषा की मधुरता एवं गेयता है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
श्रीकृष्ण ने अपना कौन-सा निश्चय माता यशोदा को बताया और क्यों?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को गाय चराने के लिए वन में जाने का अपना निश्चय बताया ताकि वे वन में जाकर वृंदावन के अनेक प्रकार के फल अपने हाथ से तोड़कर खा सकें ।।

प्रश्न (ii)
श्रीकृष्ण का निश्चय सुनकर यशोदा की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण का गाय चराने के लिए वन में जाने का निश्चय सुनकर माँ यशोदा की चिंतायुक्त प्रतिक्रिया हुई ।। उन्होंने श्रीकृष्ण को वन में जाने से रोकने के लिए उनकी कोमलता और प्रकृति की कठोरता की बात बता उन्हें समझाने का प्रयास किया ।।

प्रश्न (iii)
कवि ने श्रीकृष्ण की किस हठ का वर्णन किया है?
उत्तर:-
कवि ने श्रीकृष्ण की बालहठ का वर्णन किया है ।। वे गायें चराने के लिए वन में जाने की जिद पर अड़े हुए हैं ।।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:-
श्रीकृष्ण थोड़े बड़े होने पर गाय चराने के लिए वन में जाना चाहते हैं ।। वे वन में जाकर अपने हाथों से फल तोड़कर खाना चाहते हैं ।। वे अपना निश्चय माँ यशोदा को बताते हैं ।। माँ यशोदा उन्हें रोकने के लिए उनकी कोमलता और प्रकृति कठोरता का तर्क देती हैं तो श्रीकृष्ण अपने तर्क देते हैं कि उन्हें धूप, भूख कुछ नहीं लगेगी ।। वे वन अवश्य जाएँगे ।।

प्रश्न (ii)
काव्यांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए ।।
उत्तर:-
पद में बाल मनोविज्ञान और मातृ-स्नेह का सुंदर चित्रण हुआ है ।। बालहठ का सजीव एवं आकर्षक चित्रण हुआ है ।। माँ-बेटे के मध्य हुए संवाद ने कथ्य को सजीव एवं चित्रात्मक बना दिया है ।। ‘तेरी सौं’ के द्वारा तत्कालीन समाज में माँ की कसम के महत्त्व को रेखांकित किया गया है ।। ‘कमल बदन’ में रूपक अलंकार है ।। भाँति-भाँति और तनक-तनक में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।। ब्रजभाषा माधुर्य गुण संपन्न सरल एवं सरस है ।। पद में गेयता, लय और तुक का समावेश है ।।

प्रश्न 3 .
संदेसौ देवकी सौं कहियौ ।। (M . P . 2011)
हौं तो धाइ तिहारे सुत की, मया करत ही रहियौ॥
जदपि टेव तुम जानति उनकी, तऊ मोहिं कहि आवै ।।
प्रात होत मेरे लाड़ लडैतें, माखन रोटी भावै॥
तेल उबटनौ अरु तातौ जल, ताहि देखि भजि जाते ।।
जोइ-जोइ माँगत सोइ-सोइ देती, क्रम-क्रम करि कै न्हाते॥
सूर पथिक सुनि मोहि रैन-दिन, बढ्यो रहत उर सोच ।।
मेरौ अलक लडेतो मोहन, है हैं करत संकोच ॥ (Page 2)

शब्दार्थ:-

संदेसौ – संदेश ।।
सौं – से ।।
हौं – मैं ।।
धाइ-(धाय) – पालन-पोषण करने वाली दासी ।।
तिहारे – तुम्हारे ।।
मया – ममता, दया ।।
टेव – आदत, स्वभाव, पसंद-नापसंद ।।
लाड़ लडैतें – लाड़ले, प्यार से पले बालक कृष्ण ।।
भावै – अच्छी लगती है ।।
तातो – गर्म ।।
भजि जाते – भाग जाना ।।
क्रम-क्रम करि कै – नखरे करते हुए ।।
पथिक – राहगीर ।।
रैन-दिन – रात-दिन ।।
उर – हृदय ।।
सोच – चिंता ।।
संकोच – हिचकिचाहट ।।
प्रसंग:-
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ के मथुरागमन प्रसंग से लिया गया है ।। श्रीकृष्ण मथुरा जाने के बाद अपने अनन्य मित्र उद्धव को गोपियों तथा नंद-यशोदा को समझाने, उन्हें ढाढ़स बँधाने के लिए ब्रज भेजते हैं ।। उद्धव ब्रज से वापस मथुरा जाते समय यशोदा से मिलने जाते हैं तो यशोदा उन्हें देवकी के नाम जो संदेश देती हैं, उसमें मातृ हृदय के ममत्व का अत्यंत सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण कवि ने किया है ।। यशोदा उद्धव से कहती हैं –

व्याख्या:-
हे राहगीर! कृष्ण की जननी देवकी को यशोदा का यह संदेश देना कि मैं तुम्हारे पुत्र पर अपना अधिकार नहीं जता रही हूँ ।। मैं यह स्वीकार करती हूँ कि . कृष्ण की माँ तुम ही हो, मैं तो केवल उसका पालन-पोषण करने वाली धाय हूँ ।। धाय, बच्चे के संबंध में उसकी माँ से कुछ कहे यह सर्वथा अनुचित ही लगेगा ।। फिर भी मैं यह विनती करती हूँ कि तुम बालक पर ममता, दया करती रहना अर्थात् उसके प्रति कठोरता का व्यवहार मत करना ।। यद्यपि मैं यह जानती हूँ कि तुम कृष्ण की सभी रुचियों-आदतों से भली प्रकार परिचित हो परंतु फिर भी मुझसे रहा नहीं जाता, इसलिए कह रही हूँ कि प्रातःकाल मेरे लाड़ले बालक कृष्ण को माखन-रोटी का नाश्ता ही अच्छा लगता है ।। अतः उसे प्रातःकाल माखन-रोटी ही देना ।।

यहाँ मैं यह भी बता दूँ कि तेल, उबटन और गरम पानी आदि स्नान करने की चीज़ों को देखकर वह दूर भाग जाता है ।। अर्थात् वह मुश्किल से ही स्नान करता है ।। फिर अपनी फरमाइशें रखता है ।। वह जो कुछ माँगता है, उसे वह सब देती हूँ ।। इस प्रकार अनेक नखरे करने के बाद तेल, उबटना लगवाता है और नहाता है ।। अतः यदि वह स्नान करने से इनकार करे तो तुम खीझना नहीं अपितु उसको मनाना, उसकी माँगों को पूरा करके उसे नहाने के लिए तैयार करना ।।

सूरदास कहते हैं कि यशोदा उद्धव को संबोधित करती हुई कहती हैं-हे राहगीर! रात-दिन मेरे हृदय में यही चिंता रहती है कि मेरा लाड़ला पुत्र कृष्ण अत्यंत संकोचशील स्वभाव का है ।। वह अपने मुँह से कुछ नहीं कहेगा ।। वह देवकी की रुचि-प्रवृत्ति के अनुसार अपने मन को मारकर चलेगा ।। यह उचित नहीं होगा ।। इसी कारण मैं रात-दिन चिंता में रहती हूँ ।। चिंता के कारण न तो मुझे नींद आती है और न ही दिन में मुझे चैन पड़ता है ।।

विशेष:–

यशोदा के मातृ हृदय का अत्यंत मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है अपने को धाय कहना और अधिकार न जताते हुए भी उसके प्रति चिंतित होना मातृ-स्नेह का बड़ा गहन, सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण सूरदास ने किया है ।। ।।
लाड़ लडैतें, क्रम-क्रम करि कै, है हैं’ में अनुप्रास अलंकार है ।।
जोइ-जोइ, सोइ-सोइ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है ।।
पद में प्रवाहपूर्ण ब्रजभाषा तथा गेयता है ।।
काव्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
माता यशोदा किसके माध्यम से किसे संदेश भेजती हैं और क्यों?
उत्तर:-
माता यशोदा श्रीकृष्ण के मित्र उद्धव के माध्यम से देवकी को संदेश भेजती हैं क्योंकि माता यशोदा ने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण कर बड़ा किया है और अब वे अपनी माता देवकी के पास मथुरा में रहने लगे हैं ।। माता यशोदा को श्रीकृष्ण की सभी आदतों का पता है इसीलिए वे उद्धव के माध्यम से श्रीकृष्ण की आदतों के बारे में जानकारी देने के लिए संदेश भेजती हैं ।।

प्रश्न (ii)
श्रीकृष्ण को प्रातःकाल खाने में क्या अच्छा लगता है?
उत्तर:-
श्रीकृष्ण को प्रातःकाल माखन-रोटी खाना अच्छा लगता है ।।

प्रश्न (iii)
यशोदा देवकी को श्रीकृष्ण की कौन-कौन-सी आदतों से परिचित कराती है?
उत्तर:-
यशोदा देवकी को श्रीकृष्ण की खाने, स्नान करने, रूठने और मनाने की आदतों से परिचित कराती हैं ।।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य-बोध संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:-
यद्यपि कृष्ण अब मथुरा के राजा हैं किंतु माता का हृदय तो अपने पुत्र को सदैव शिशु रूप में ही अनुभव करता है ।। वे अपने संदेश में कृष्ण के खाने-पीने, स्नान करने, रूठने-मनाने की आदतों से देवकी को परिचित कराती हैं ।। इस पद में माँ का वात्सल्य भाव व्यक्त हुआ है ।।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।।
उत्तर:-
यशोदा के मातृ हृदय का अत्यंत प्रभावपूर्ण एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है, कवि ने मातृ-विज्ञान का गहन, सुक्ष्य और यथार्थ चित्रण कर अपनी सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति का परिचय दिया है ।। लाड़-लडैतें, क्रम-क्रम करि कै, है हैं, में अनुप्रास अलंकार है ।। जोइ-जोइ, सोइ-सोइ, क्रम-क्रम में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार हैं, ब्रजभाषा माधुर्य गुण संपन्न है ।। पद में गेयता, लय और तुक समाहित है ।।

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