Mp board class 10 hindi Subhadra kumari chauhan jeevan parichay

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कवि परिचय राष्ट्रीय चेतना की अमर गायिका सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 ई. में प्रयाग – के निहालपुर मोहल्ले में हुआ था। बचपन में ही काव्य में रुचि के कारण पन्द्रह वर्ष की आयु में इनकी प्रथम काव्य रचना प्रकाश में आई। राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निर्वाह करते हुए आपको कई बार जेल यात्राएँ भी करनी पड़ी। साहित्य, परिवार और राजनीतिक जीवन की त्रिधारा से गुजरते हुए अप्रैल सन् 1948 ई. में अल्पायु में हो आपका देहावसान हो गया।

सुभद्राकुमारी चौहान मूलतः वीर रस की कवयित्री थीं। इनकी कविताओं में पारिवारिक और राष्ट्रीय जीवन के सरोकारों का सफल चित्रांकन हुआ है। सुभद्राजी की कविताएँ ‘मुकुल’ और ‘त्रिधारा’ में संकलित है। कविताओं के अतिरिक्त आपने कहानियाँ और निबंध भी लिखे हैं ‘बिखरेमोती’ और ‘उन्मादिनी’ आपकी कहानियों का संकलन हैं।

सुभद्राकुमारी चौहान की रचनाओं में समसामयिक देश-प्रेम, भारतीय इतिहास एवं संस्कृति की गहरी छाप पड़ी है। उन्होंने अपनी काव्य प्रतिभा से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावनाओं को तत्कालीन राजनीतिक सन्दर्भों से जोड़कर नव- जागरण का शंखनाद किया है। देश में नव चेतना, त्याग, बलिदान का अलख जगाने में आपके काव्य की महती भूमिका रही है। आप अपनी सहज, सरल और सामान्य बोलचाल की स्वाभाविक भाषा में जटिल से जटिल भावों को बड़ी सादगी से व्यक्त करती है। इन कविताओं में वीर एवं वात्सल्य रस प्रधान है। गीत और लोकगीतों को गायन शैली में अपने भावों को स्वर देने में आप सिद्ध है। अलंकार और प्रतीकों के मोह से मुक्त अनुभूतियों का सहज प्रकाशन ही आपकी काव्यगत विशेषता है। आपकी गद्य रचनाएँ छायावादी प्रवृत्ति को निर्मल झाँकी है जहाँ छायावाद का वही स्वप्नलोक, वही आदर्शवाद, वही उदात्तभाव आधारभूत रूप में विद्यमान है।

जन-जन में देश प्रेम और स्वाभिमान की भावना जगाने वाले कवियों में आपका स्थान प्रमुख है।

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